फ्रेंड्स, वी विल स्टार्ट आर प्रेस कॉन्फ्रेंस शार्प एट 2 ओ क्लॉक इन अबाउट 2 मिनट्स। इट विल बिगिन विद इंट्रोडक्टरी रिमार्क्स बाई मिनिस्टर सर फोल्लोड बाय दैट वी विल हैव अ प्रेजेंटेशन देन वी विल टेक योर क्वेशन्स। सो, वी विल मीन बी रेडी विद योर कैमरा एंड अलर्ट योर ऑफिस। वी विल स्टार्ट शार्पली एट 2 ओ क्लॉक। आज भारत के विकसित भारत 2047 45 के यात्रा का एक बहुत अहम दिन हम सब यहां पे एकत्रित हुए हैं। आपका स्वागत है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जिस प्रकार से प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी जी ने एक बहुत ही भविष्य को सामने रखकर दोनों देशों की संबंधों को दोनों देशों की कूट नीति को देखते हुए दोनों नेताओं की मित्रता को देखते हुए जो बटरल ट्रेड एग्रीमेंट फरवरी 2025 में चर्चा शुरू की थी इस उद्देश्य के इस उद्देश्य के साथ के भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच 500 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हर वर्ष होना चाहिए। उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। पूरे देश में खुशी की लहर है। देश के हर क्षेत्र में बहुत ही उत्साह है भविष्य को लेकर।
और मानो आने वाले दिनों में जिस प्रकार से नए अवसर नए मौके खुलते हैं। जिस प्रकार से हमारे निर्यातकों के लिए बहुत बड़े पैमाने पे यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था अब हमारे निर्यातकों के लिए मोस्ट प्रेफर्ड ड्यूटी के साथ खुलती है। और जिस प्रकार से हमारे किसानों के हितों का संरक्षण किया गया है। पूर्णतः संरक्षण किया गया है। किसानों का डेरी का उसको मद्देनजर रखते मैं मानता हूं यह जो यूनाइटेड स्टेट्स और भारत के बीच जॉइंट स्टेटमेंट कल देर रात फाइनललाइज हुआ। विश्व के
समक्ष रखा गया। इसका देश के कोनेकोने में स्वागत हुआ है। यहां तक के आज सुबह मैं एक वीडियो देख रहा था। एक साधारण हस्तकला के क्षेत्र के हमारे कारीगर का सल से उत्तर प्रदेश के सल से और वो कह रहे थे अब 18% टेरिफ हो गया अब तो मौज है। हमारे को बहुत लाभ है। अब नए ऑर्डर्स आएंगे और तरक्की होगी। यह उनके शब्द आज सुबह मैंने एक्स हैंडल पर किसी पत्रकार को उनको कहते हुए सुना। मित्रों यह जो जॉइंट स्टेटमेंट है यह एक प्रकार से नई आशा उमंग और नए संकल्प के लिए हर भारतवासी
को अवसर देता है। मौके देता है। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत बनाने के दृष्टिकोण से जो बटरल ट्रेड एग्रीमेंट का पहला अंश अब तय किया है उसके तहत 50% की जो रेसिप्रोकल टेरिफ भारत के निर्यात के ऊपर अमेरिका में लगती थी वो अब 50% से घटकर मात्र 18% लगेगी और 18% हमारे जितने अड़ोस पड़ोस के देश हैं जितने देश हैं जिनके साथ हमारा हमारी स्पर्धा रहती है उन सभी देशों से कम है और आगे आने वाले दिनों में हमें और हमारे निर्यातकों को बहुत लाभ देंगे। अगर हम
देखें तो चाइना के ऊपर अमेरिका ने लगभग 35% ड्यूटी रखी है। वियतनाम पर 20% बांग्लादेश पर 20% इंडोनेशिया पर 19% हम सभी स्पर्धा में खड़े देशों से कम है। साथ ही साथ कई ऐसे वस्तुएं जिसके ऊपर अब शून्य क्या है ये? अब शून्य ड्यूटी लगेगी जब हमारे निर्यातक अमेरिका में यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में सामान भेजेंगे। उदाहरण के लिए जेम और डायमंड्स पूरी तरीके से शून्य ड्यूटी लगेगी। फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स जो भारत से दवाइयां बड़े रूप में जाती हैं लगभग 13 बिलियन डॉलर की उस पे शून्य ड्यूटी लगेगी। स्मार्टफोनस जो भारत से बड़े रूप में अमेरिका
जाते हैं उसमें आगे भी चलकर शून्य ड्यूटी ही लगी रहेगी। इस प्रकार से ढेर सारी ऐसी वस्तु है जिन पर आगे चलकर शून्य ड्यूटी लगेगी। कृषि के क्षेत्र में भी ऐसे कई सारे वस्तुएं जो भारत से निर्यात होंगे अमेरिका में जिस पर शून्य रेसिप्रोकल टेरिफ लगेगा। एडिशनल ड्यूटी शून्य हो जाएगी। उदाहरण के लिए स्पाइसेस, चाय, कॉफी और उसमें से बने वस्तु, कोपरा यानी कोकोनट और कोकोनट ऑयल, वेजिटेबल वैक्स, एरेका नट, ब्राज़ल के नट, कैशू नट, चेस्ट नट, कई सारे फल और कई सारी सब्जियां जैसे कि अवोकाडोस बनाना केला गु्वावा मैंगो आम किवी पपाया पाइनएप्पल शिटाके
मशरूम कश्मीर का बाकी देश अन्य विभाग से इसी प्रकार से वेजिटेबल प्लेटिंग का जो मटेरियल होता है वेजिटेबल सैप कुछ वेजिटेबल के रूट्स जैसे टैरो बमबरा बींस कुछ सीरियल्स जैसे बार्ले कैनरी सीड्स कुछ बेकरी के प्रोडक्ट्स कोका और कोका का से बने हुए वस्तु सेसमी सीड्स पॉपी सीड्स प्रोसेस फूड बनाना पल्प के शेप में सिट्रस के जूस ग्वावा और मैंगो का पेस्ट पाइनएप्पल का जैम अब ये सभी वस्तुओं पर जो हमारे किसान भारत में बनाते हैं। इस पर अमेरिका में रेसिप्रोकल टेरिफ 50% से घटकर शून्य हो जाएगा। शून्य। इसी के साथ-साथ कई सारे और वस्तु
जो भारत से निर्यात होते हैं जिसमें अमेरिका रेसिप्रोकल टेरिफ शून्य करेगा। उदाहरण के लिए एयरक्राफ्ट के पार्ट्स, मशीनरी के पार्ट्स, जेनेरिक ड्रग्स, फार्मासटिकल प्रोडक्ट्स, कुछ एलिममेंट्री ऑटो पार्ट्स, जेम एंड डायमंड्स जो वेस्ट बंगाल में बनते हैं। महाराष्ट्र, गुजरात में बनते हैं। तमिलनाडु में बनते हैं, केरल में बनते हैं। जेम एंड डायमंड्स, कॉइंस, प्लैटिनम, क्लॉक्स एंड वॉचेस, एसेंशियल ऑइल्स, कुछ होम डेकोर के वस्तु जैसे सैंडलयर्स, इलुमिनेटिंग साइंस, लैंप्स के कुछ पार्ट्स, सीड्स, कुछ इनऑर्गेनिक केमिकल्स, आयरन और हाइड्रोऑक्साइड्स, एलुमिनियम ऑक्साइड्स इनऑर्गेनिक कंपाउंड्स, प्रेशियस मेटल्स के, जिंक ऑक्साइड्स, कुछ इंस्ट्रूमेंट्स और अपेरेटस, कुछ अलग-अलग प्रकार के मिनरल्स और
नेचुरल रिसोर्सेज, कुछ पेपर, प्लास्टिक और वुड की वस्तुएं, नेचुरल रबर, देखिए, कितने सारी वस्तुओं पे भारत को शून्य रेसिप्रोकल टेरिफ मिलने जा रहा है। इसी के साथ-साथ हम सबके लिए बहुत ही खुशी की बात है और इसका तो मैं समझता हूं पूरे देश में चर्चा हो रही है कि कैसे कई सारे किसानों के उत्पादन उत्पाद किए गए वस्तु किसानी क्षेत्र के उत्पाद अब भारत से शून्य ड्यूटी पर अमेरिका में जा सकेंगे और जिसका भारत के निर्यात को फायदा होगा। इसी के साथसाथ एक देश में कुछ लोग जो भारत के किसानों के विरोध है, विरोधी हैं।
भारत के किसानों की चिंता नहीं करते हैं। भारत को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। ऐसे कुछ लोगों को आज यह देख के हैरानी हो रही है के कैसे भारत और यूएस के इस अह एग्रीमेंट के द्वारा कई सारे किसानी क्षेत्र के सामान पर शून्य कोई लाभ भारत में इंपोर्ट करते हुए दिया गया। कोई लाभ नहीं दिया गया। कोई रिहायत नहीं दी गई है। लोग सोचते थे ना कि भाई किसानी क्षेत्र में सब खुल जाएगा। हमने कोई ऐसा काम नहीं किया है जिसमें किसी भी किसान को नुकसान हो सके। जो वस्तु भारत में सेंसिटिव है,
हमारे किसान पर्याप्त मात्रा में बनाते हैं। जिसमें हम आत्मनिर्भर है, उन सब वस्तुओं को इस एग्रीमेंट के दायरे से बाहर रखा गया है। उसमें भारत ने कोई छूट नहीं दी है। जैसे कि उदाहरण के लिए जीएम का बना हुआ जेनेटिकली मॉडिफाइड कोई वस्तु भारत में नहीं आएगा। मीट उस पर कोई रिहायत नहीं दी गई है। पोल्ट्री कोई रिहायत नहीं दी गई है। डेयरी के कोई वस्तु के ऊपर कोई रिहायत नहीं दी गई है। सोयाबीन कोई रिहायत नहीं दी गई है। मेज कोई रिहायत नहीं दी गई है। मेज यानी मक्का कोई रिहायत नहीं है। चावल, गेहूं,
चीनी सीरियल कोई रिहायत नहीं, दी गई है। मिलेट जैसे जवार, बाजरा, रागी, कोडो, अमरनाथ इस पर कोई रिहायत नहीं दी गई है। फल जो भारत में पर्याप्त मात्रा में बनते हैं। जैसे केला, बनाना, स्ट्रॉबेरी, चेरीज, सिट्रस फ्रूट उस पे कोई रिहायत नहीं दी गई है। ग्रीन टी, काबुली चना, मूंग कोई रिहायत नहीं दी गई है। ऑयल सीड्स कोई रिहायत नहीं दी गई है। कुछ एनिमल फीड के प्रोडक्ट्स हैं। ग्राउंड नट्स, हनी, मोल्ट और मोल्ट से बना हुआ सामान। नॉन अल्कोहलिक बरेजेस, फ्लावर एंड मील्स, स्टार्च, एसेंशियल ऑइल्स, इथेनॉल जो बड़े पैमाने में भारत में बन रहा
है और टोबैको जो हमारा एक प्रकार से निर्यात होता है बड़े रूप में। इन सभी वस्तुओं पर किसी प्रकार की रिहायत इस एग्रीमेंट के द्वारा नहीं दी गई है और इसीलिए मैं डंके की चोट पर कह सकता हूं कि किसी प्रकार से यह करार भारत और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के बीच भारत के किसानों के हितों को भारत के एमएसएमईस को भारत के हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। बल्कि हमारे हुनर वाले युवा युवती, हमारे कर्मठ कर्मचारी, हमारे कारीगर, हमारे विश्वकर्मा, हमारी बहनें, विशेषकर जो वस्त्र क्षेत्र के साथ जुड़े
हैं। टेक्सटाइल्स, लेदर के और फुटवेयर के साथ जुड़े हुए हैं। टॉयज के साथ जुड़े हुए हैं। स्पोर्ट्स गुड्स के साथ जुड़े हुए हैं। ढेर सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत को अब अमेरिकन मार्केट में लाभ मिलेगा। भारत को कम ड्यूटी पर बाकियों से कम ड्यूटी पर मात्र 18% पर रेसिप्रोकल ड्यूटी उनको वहां पे मार्केट एक्सेस मिलेगा होम डेकोर हो वुड और फर्नीचर हो पिलोस कुशन जो अपोलस्ट्री के साथ सामान बनता है क्विल्ट्स कंफर्ट नॉन इलेक्ट्रिकल लैंप्स इसी प्रकार से जो मशीनरी और पार्ट्स अलग-अलग प्रकार के मशीनरी के पार्ट्स होते हैं। खिलौनों का मैंने जिक्र किया
टॉयज ज्वेलरी जो बनती है ज्वेलरी लेदर एंड फुटवेयर टेक्सटाइल और अपरल का बहुत बड़ा हमारा निर्यात में फायदा होगा। खासतौर पे सिल्क जिसको सिल्क इज एट जीरो ड्यूटी। सिल्क के प्रोडक्ट्स जीरो ड्यूटी पे ले आए हैं। तो एक प्रकार से अलग-अलग क्षेत्रों को निर्यात के लिए लाभ देना और हमारे किसानी क्षेत्र को आयात से संभालना, सुरक्षित रखना ये दोनों का ट्विन ऑब्जेक्टिव यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका और भारत के इस द्विपक्षीय करार में किया गया है। मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और माननीय डॉनल्ड ट्रंप जी राष्ट्रपति यूनाइटेड स्टेट्स के दोनों को बधाई देता हूं कि
बड़ा ही फेयर इक्विटेबल और बैलेंस्ड ट्रेड एग्रीमेंट जो भारत के हितों को संरक्षित रखता है। द्विपक्षीय व्यापार को मौका देता है बढ़ने के लिए। भारत को अलग-अलग प्रकार के टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स जो हमारे विकास के लिए हमें आवश्यकता है। उदाहरण के लिए हवाई जहाज हो, सेमीकंडक्टर्स हो, चिप्स हो, एआई मिशन को हमें आगे ले जाना है। हाई क्वालिटी मशीनरी हो जो हमें सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री और अह क्वांटम और हाई हाई हाई क्वालिटी इनोवेटिव प्रोडक्ट्स जो भारत में लगते हैं। इन सबको अब भारत में मौका मिलेगा। भारत के उपभोक्ताओं को लाभ देने का? मौका मिलेगा या नए रोजगार
के अवसर खड़े करने का? मौका मिलेगा। भारत की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे ले जाने का। मैं समझता हूं यह समझौता हम समर्पित करते हैं भारत के निर्यातकों को। यह समझौता हम समर्पित करते हैं भारत के किसानों को। यह समझौता समर्पित है भारत के सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग एमएसएमईस को। यह समझौता समर्पित है भारत के कामगारों को, युवाओं को, बहनों को, मछुआरों को और लाखों करोड़ों लोगों को इस बहुत ही बेहतरीन करार से बड़े पैमाने पे रोजगार के अवसर, उद्योग के अवसर, उद्यमी बनने के अवसर स्टार्टअप शुरू करने के अवसर, व्यापार करने के अवसर,
अलग-अलग क्षेत्रों में मिलेंगे। मेरा पूरा विश्वास है कि 140 करोड़ देशवासी पुनः एक बार दिवाली मनाएंगे, खुशहाली मनाएंगे। और इस साल तो 12 महीने में हमने इनकम टैक्स का देखा। 12 लाख तक की छूट हमने इसी साल में जीएसटी में ऐतिहासिक लगभग हर एक रोजमर्रा की वस्तुओं पे बड़ी छूट देखी। हमने इसी साल में ढेर सारे विकसित देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करके हमारे निर्यातकों के लिए बड़ा बाजार खोला है। चाहे वो पहली अक्टूबर से लागू हो गया एफटा का चार यूरोपियन देशों का करार हो। यह 27 देशों का ईयू का करार जो 27
जनवरी को ही तय हुआ है। चाहे यूके का एग्रीमेंट जो जुलाई पिछले वर्ष माननीय प्रधानमंत्री जी ने मंजूरी दी हस्ताक्षर हुआ जिस पर चाहे न्यूजीलैंड का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 2 महीने पहले हुआ हो। चाहे ओमान का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट डेढ़ महीने पहले हुआ हो। आप देखिए कितने सारे ढेर सारे अफसर और उन सबके ऊपर यह बड़ा सौगात भारत और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के बीच ये एग्रीमेंट वास्तव में भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और नए युक्त विकसित भारत की तरफ हमारे अमृत काल के तेज गति से प्रगति को और चार चांद लगाएगा। बहुत-बहुत
धन्यवाद। नहीं पहले प्रश्न ले लेते हैं फिर बाद में सत्र चल रहा है अपोजिशन ये कह रहा है कि सरकार कह रही है कि ये डील बहुत अच्छा है तो सदन में इस पर चर्चा हो जाए तो पूरा देश जान पाएगा कि आखिरकार हितों के साथ समझौता हुआ है या नहीं हुआ है। मैं समझता हूं कि सभी जानकारियां सबके समक्ष रखी गई है और संसद में क्या करना है नहीं करना है वो तो माननीय स्पीकर और माननीय चेयरमैन ही तय कर सकते हैं। लेकिन मैंने संसद में भी बड़े विस्तृत रूप से जानकारी दी थी। स्टेटमेंट
दिया था। संसद में एक-एक वस्तु तो नहीं सुनाई जा सकती है। स्वाभाविक है वो तो काम देश को हमें डायरेक्टली करना पड़ेगा। सर दीपिका माइक सर कुड यू आल्सो शेयर द लिस्ट ऑफ़ आइटम्स ऑन व्हिच इंडिया वुड बी रिड्यूसिंग ड्यूटी टू जीरो फॉर अमेरिकन प्रोडक्ट्स? भारत ने अपने हितों को देखते हुए और अपनी जरूरतों को देखते हुए बड़ा कैलिबेटेड तरीके से उन वस्तुओं पर विशेषकर जहां हम आज भी आयात के ऊपर निर्भर है और हमारे किसानों को संरक्षण रखते हुए कुछ वस्तुओं पे खोली है मार्केट उदाहरण के लिए अगर हम देखें तो डीडीजीएस डिस्टिल ग्रेन
सॉलुबल अब यह इसमें एक सीमित रूप से अमेरिका से सामान लाया जाएगा भारत में जो हमारे एनिमल हस्बेंडरी ने मांग रखी थी हमारे सामने जो उनकी जरूरत थी उतनी क्वांटिटी अमेरिका से लाई जाएगी जो पोल्ट्री के लिए बहुत लाभदायक होगी। इसी प्रकार से कुछ चीजें ऐसी हैं जिसमें भारत को जरूरत पड़ती है। किसानों की हितों को रक्षा करते हुए इसमें हमने उसको खोला है। कुछ चीजें ऐसी है जो भारत में बनती है पर पर्याप्त मात्रा में नहीं बनती है। जिसमें कंपटीशन होगा तो उपभोक्ताओं को लाभ होगा। कुछ वाइन और स्पिरिट्स खोली है जो अमेरिका में
बनती है और कुछ लोग भारत में लेना चाहते हैं तो अलकोहलिक बरेजेस में कुछ खुलासा किया गया है जिसमें एक मिनिमम इंपोर्ट प्राइस भी रखी है जिससे भारत के स्वदेशी उत्पाद और उसके बीच कंपटीशन ना हो दोनों एक दूसरे के पूरक बने तो कुछ चीजें हम 20 साल से जब यूपीए की सरकार चल रही थी तब से इंपोर्ट चलते आ रहे हैं। जैसे पिस्ता है, वालनट है, आलमंड है, कुछ लेंटिल है। कुछ चीजें वर्षों वर्षों से निर्यात होते जा रही हैं। उन चीजों के ऊपर हमने फेस्ड एलिमिनेशन कुछ चीजों पर और जो हमारी जरूरत है
कुछ चीजों पर शुरू से ही उनको छूट दी है। वैसे ही मैंने जैसे पहले बताया इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में बहुत सारे ऐसे वस्तु हैं जो भारत की जरूरत है। कई सारी दवाइयां हैं जो बहुत इनोवेटिव है कैंसर के ट्रीटमेंट के लिए, हार्ट के ट्रीटमेंट के लिए, न्यूरो ट्रीटमेंट के लिए, पीडियाट्रिक ट्रीटमेंट के लिए जो महंगी हो जाती है ड्यूटी लगने से ऐसे कई सारे वस्तु जो देश हित में है, जनहित में है, उनको खोला गया है। ऐसे ही हमारे उपभोक्ताओं के लिए कॉस्मेटिक्स आइस अह खो कुछ खोले गए हैं जो कंपटीशन लाएंगे चीजों को सस्ता करेंगे
भारत में ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स भारत में काफी इंपोर्ट होते हैं। उसमें ड्यूटी कम की गई है। कंप्यूटर से रिलेटेड कई प्रोडक्ट्स आज भी विदेश से आते हैं। हम चाहते हैं कि वो ऐसे देशों से आए जहां पे फ्री ट्रेड है और जहां पे दोनों द्विपक्षीय ट्रेड है उसमें हमने रिहायत दी है। कुछ मेडिकल डायग्नोस्टिक रीजेंट्स होते हैं। मेडिकल डिवाइसेस हैं कुछ जो भारत की आवश्यकता है। कुछ फाइबोस्कोप्स हैं, लैप्रोस्कोप्स हैं। एक्सरे के कोई वाल्व लगते हैं। ऐसे करके बहुत चोजन प्रोडक्ट्स और हमने देखा कि इन प्रोडक्ट्स पे आज भी भारत 26 बिलियन डॉलर का
इंपोर्ट करती है जिनको खोला गया है। कुछ प्रोडक्ट्स को कुछ समय सीमा में खोला गया जिसमें ट्रांजिशन पीरियड मिले और भारत के मैन्युफैक्चरर्स को पर्याप्त समय मिले एस्टैब्लिश होने का। इसमें भी कुछ मेडिकल डिवाइसेस हैं जैसे पेसमेकर्स, कुछ पेट्रोलियम और गैस की मशीनरीज हैं। कुछ डायग्नोस्टिक इंस्ट्रूमेंट्स हैं। अ इमेजिंग अपेरेटस है, हार्ट लंग मशीनंस हैं। इयरिंग एज सिस्टम्स हैं। आर्टिफिशियल जॉइंट्स है। जो जो चीजें भारत में हम डेवलपमें भी कर रहे हैं। पर साथ-साथ में विदेश से आएगा स्पर्धा होगी तो हमारे उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता का भी माल मिलेगा और सामान भी सस्ता रहेगा एफिशिएंसी
आएगी इंडस्ट्री में और कुछ थोड़े बहुत प्रोडक्ट्स हैं जहां पे हमने टेरिफ का एक कोटा दिया है जिसमें टेरिफ रिडक्शन की तो इस प्रकार से भारत के ऑफर्स हैं। स्वाभाविक है कोई भी दो पक्षीय जब करार होता है तो दो तरफ होता है और दोनों तरफ को लाभ होता है तभी वह आगे फलता फूलता है। पीयूष सर पीयूष सर हैज़ इंडिया अग्रीड नॉट टू इंपोर्ट रशियन ऑयल एज मेंशंड इन ट्रंप ट्रंप एक्सक्यूटिव ये इसकी जानकारी आपको दे पाएंगे। सर कपास और सेब जो आपने जो लिस्ट आई है एक प्रोडक्ट्स की उसमें कपास और सेब का
क्या स्टेटस है? क्या उसके लिए हमने बाजार खोला है? इन दोनों के ऊपर आज के दिन भी इंपोर्ट भारी मात्रा में होता है। उदाहरण के लिए सेब आज भी 6 लाख टन इंपोर्ट होता है। अमेरिका से भी सेब बड़े पैमाने पे इंपोर्ट होता है। आज जो इंपोर्ट हो रहा है वो ₹50 मिनिमम इंपोर्ट प्राइस पे इंपोर्ट होता है। और उस पे 50% ड्यूटी यानी ₹25 तो एक प्रकार से सेब के किसानों को संरक्षण देने के लिए 50 मिनिमम इंपोर्ट प्राइस उस पे 25 ड्यूटी ₹75 आज एक फ्लोर है जिससे नीचे इंपोर्टेड माल नहीं आ सकता
है। और 6 लाख टन आज भी आ रहा है क्योंकि हमारी खपत ज्यादा है और हमारे प्रोडक्शन उस पैमाने पे कम है और खपत बढ़ते जा रही है जैसेजैसे लोगों की अ और ज्यादा जरूरतें या डिमांड बढ़ते जा रही है। खपत भी बढ़ रही है। उस उसके बावजूद जितना आज अमेरिका से इंपोर्ट होता है उससे कम कोटा आज अमेरिका को कंसेशनल ड्यूटी पर दिया गया है। उस पर भी मिनिमम इंपोर्ट प्राइस ₹80 रखी गई है और 25% ड्यूटी यानी ₹80 का मिनिमम इंपोर्ट प्राइस 25% ड्यूटी यानी ₹20 तो भी आज के ₹75 के फ्लोर प्राइस
से वो ₹100 है जिस पे कोटा दिया गया। तो हमारे सेब के किसान पूर्णतः संतुष्ट है और वो जरा भी चिंता ना करें। उनका सामान उनका बनाया हुआ उत्पाद और उसकी कीमत उनको सया सही दाम उनको सुनिश्चित किया गया। कापस में भी आज बड़े पैमाने पर कापोस इंपोर्ट होता है क्योंकि हमारे पास एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेबल कॉटन जो अमेरिका में उगता है भारत में पर्याप्त मात्रा में उगता नहीं है। वैसे तो बहुत ही कम उगता है। मैंने वस्त्र मंत्रालय संभाला है। मैं जानता हूं कि हमें निर्यात के लिए बड़े पैमाने पे कास की जरूरत पड़ती है
भारत में। एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेबल कॉटन बड़े पैमाने पे आते हैं और आज से नहीं कांग्रेस के जमाने से आते हैं। उसमें हमने एक आज जो निर्यात आयात होते हैं आज के आयात के लगभग कोटा ओपन किया है। टाइम्स वी विल कम टू एवरीवन। कम या थैंक यू जॉन रीड फ्रॉम द एफटी। डस द ऑनरेबल मिनिस्टर हैव एनी कमेंट ऑन द वाइट हाउस स्टेटमेंट दैट इट्स गोइंग टू बी मॉनिटरिंग इंडियास परचेस ऑफ़ रशियन ऑयल एंड इट कुड रीइमोज्ड 25% आई जस्ट मेंशन दैट दैट विल बी रेस्पोंडेड बाय द फॉरेन मिनिस्ट्री माइक है ना आपके पास सर
आमिर न्यूज़ नेशन से पहला तो यह कि एक्सपोर्टइ इंपोर्ट में डिफरेंसेस क्या है कितना हम एक्सपोर्ट कर पा रहे हैं और कितना हम इंपोर्ट करेंगे। इसका कोई फिगर आउट अगर आप दे सकके। दूसरा यह प्रोडक्ट को की क्वालिटी को लेकर के सवाल खड़े होते हैं। कई बार आपने देखा विदेश में जो कुछ प्रोडक्ट भारत से गए उनकी क्वालिटी को लेकर से सवाल खड़े हुए हैं। मसालों की खास बात मैं बात कर रहा हूं। तो उसको लेकर के क्या कंसर्न रहेगा भारत की तरफ से कि एक्सपोर्ट हो। सबसे पहले तो हमारा लक्ष्य है कि द्विपक्षीय व्यापार
अमेरिका और भारत के बीच 500 बिलियन डॉलर 500 बिलियन डॉलर यानी 45 लाख करोड़ का द्विपक्षीय व्यापार हम अमेरिका के साथ आगे चल के देखते हैं। इसमें सर्विसेज भी हैं, गुड्स भी हैं। और मैं समझता हूं बड़े पैमाने पे अब हमारे निर्यातकों के लिए अवसर खुले हैं। अब हमारे निर्यातक इसका बड़े से बड़े अह तौर पर लाभ ले। ऐसा मैं उन सबको अपील करता हूं। रही बात क्वालिटी की। मेरा मानना है आज भारत की क्वालिटी दुनिया में उत्तम क्वालिटी का माल होता है। आपने देखा है माननीय प्रधानमंत्री ने क्वालिटी पे कितना जोर दिया है। 2014
से ही जब उन्होंने प्रधानमंत्री का देश को सेवा करने का पद संभाला। पहले से ही उन्होंने क्वालिटी के ऊपर जोर दिया है। उन्होंने कहा था भारत जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट जेड के मूल्य पर चलेगा। हाल में ही उनके मन की बात जो पिछ दो हफ्ते पहले हुई थी रविवार को उसमें भी माननीय प्रधानमंत्री जी ने क्वालिटी पर बल दिया। पार्लियामेंट का सेशन शुरू हुआ। उनके पहले दिन के उद्बोधन में भी उन्होंने क्वालिटी का जिक्र किया और परसों ही राज्यसभा में माननीय महामहिम राष्ट्रपति जी के उद्बोधन पर जो धन्यवाद का प्रस्ताव था उस पर भी जवाब
देते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने बल दिया कि भारत की क्वालिटी और भारत का ब्रांड सर्वोच्चम होना चाहिए बेस्ट होना चाहिए दुनिया का फेवरेट होना चाहिए और मैं मानता हूं हमारे निर्यातक बहुत बेहतरीन काम कर रहे हैं। सर सर कृषि और डेयरी क्षेत्र में क्या 100% प्रोटेक्शन है क्योंकि कंफ्यूजन ये है कि क्या कुछ शर्तों के साथ उनको एंट्री दी गई है और लगातार विपक्ष जो ये कह रहा है कि पूरी बात बता नहीं रही है सरकार। अब विपक्ष के लाचारी का, झूठ और भ्रम का तो हमें अब इतना अनुभव हो गया है कि भारत
की जनता भी उनसे अब भ्रमित नहीं होती है। झूठ और फरेब के अलावा उनके पास जनता के पास लेकर जाने के लिए कुछ नहीं है। मैं पुनः एक बात दोहराता हूं कि भारत की डेरी में कोई शर्त के साथ भी कुछ खोला नहीं गया है। किसी प्रकार का कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं है और पूरी तरीके से भारत की डेरी में कोई ओपन कुछ नहीं किया गया। कोई कंसेशन नहीं दिया गया। इसी के साथ-साथ जो भारत के प्रमुख कृषि क्षेत्र के उत्पाद है और मैंने बड़े विस्तार से कहा मैं चाहूंगा कि उसका इनफोग्राफिक्स भी हम लगा दें
तो दोनों चारों टीवी पे आपको एक इनफोग्राफिक भी एक बार देख लीजिए। हमने जो मेन इंडिया के प्रोडक्शन है जिसमें मीट है। पोल्ट्री है, डेरी है, जीएम फूड प्रोडक्ट्स है, सोयाबीन है, मेज है, सीरियल्स है, मिलेट्स है, ज्वार, बाजरा, रागी, कोडो, अमरानंद, फल है, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, सिट्रेस फ्रूट यानी मेरे ख्याल से संतरा वगैरह ग्रीन पीस काबुली चना मूंग ऑयल सीड्स कुछ एनिमल फीड के प्रोडक्ट्स ग्राउंड नट हनी मल्ट और उसके एक्सट्रैक्ट नॉन अल्कोहलिक बेवरेजेस फ्लावर और मील्स स्पार्च कुछ एसेंशियल ऑइल्स इथेनॉल और टोबैको अब इतने वस्तु एक बार मठ-मोटे और भी है जिसके इंफोग्राफिक्स
आप सबको शेयर भी हो जाएंगे। स्क्रीन पे भी लगातार दिखाए जाएंगे। इन सबको जब हमने कोई छूट, कोई रिहायत, कोई शर्त या बिना शर्त किसी प्रकार से भी कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं किया तो मैं समझता हूं भारत के किसान आज खुशहाली मनाएंगे और पूरी तरीके से संतुष्ट है। सर करिश्मा फ्रॉम बिज़नेस टुडे। कांग्रेचुलेशंस टू यू। अह, सर यू स्पोक ऑफ सम लिमिटेशंस ऑन इंपोर्ट्स लाइक यू मेंशंड अबाउट एप्पल एंड एप्पल्स एंड आल्सो पर्टिकुलर क्वांटिटी फॉर डीडीजीएस। सो इज दिस गोइंग टू बी मोर कोटा बेस्ड एंड इफ फॉर ऑल द इंपोर्ट्स। नॉट नेसेसरली इट डिपेंड्स देयर आर
सम आइटम्स वी डोंट मेक इन इंडिया। सो दे वी हैव डन अ वैरी कैलिब्रेटेड ओपनिंग डिपेंडिंग ऑन इंडियास नीड्स एंड इंडियास करंट सिचुएशन। सर दिस इज़ अच फ्रॉम बिज़नेस स्टैंडर्ड। सर दो छोटे सवाल हैं। एक तो जो डॉलर 500 बिलियन का ट्रेड होगा उसमें एनर्जी इंपोर्ट का कॉम्पोनेंट क्या होगा? और सरकार का क्या अनुमान है कि रूस से हटकर अगर हम अमेरिका से ऑयल इंपोर्ट करेंगे तो खर्चा कितना होगा? और दूसरी बात सोयाबीन ऑयल की जहां तक बात है हमने पिछले साल एडिबल ऑयल ईयर में 3.7% ऑफ़ आवर टोटल क्रूड सोयाबीन ऑयल नीड्स वी हैड
इंपोर्टेड फ्रॉम यूएस। डू यू सी दिस गोइंग अप एंड हाउ बाय हाउ मच व्हेन इंपोर्ट ड्यूटीज आर रिड्यूस टू ज़ीरो। नाउ देयर 27.8 एज़ रिगार्ड्स दी कंपोज़िशन ऑफ़ दी इंपोर्ट्स इट इज़ अप टू दी इंपोर्टर्स एंड अप टू दी सप्लायर्स ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स टू गिव देम एन ऑफर दैट दे कैन नॉट रिफ्यूज एंड मटेरियल कम्स इंटू इंडिया। उसमें सरकार तो कुछ खरीदती नहीं है, बेचती नहीं है। वो प्राइवेट ट्रांजैक्शन है। रही बात ऑयल की उसका मैं आपको कई बार बोल चुका हूं। आप जितनी बार और पूछोगे मेरा जवाब वही होगा कि वो एमए उसका
जवाब देगा और जहां तक सोयाबीन ऑयल की बात है उसमें भी एक कोटा निर्धारित किया गया। अमित सर या सर सर अमित हियर फ्रॉम बिज़नेस लाइन सर ऑन आईसीटी इंपोर्ट्स ऑन लैपटॉप्स एंड टैबलेट्स एंड ऑल। सो आर वी मूविंग बैक टू अह फ्री इंपोर्ट रिजीम फ्रॉम द लाइसेंस और द ऑथराइज़ेशन? रिजम देयर नो लाइसेंस रिजीम ऑन दिस ऑथराइजेशन ऑथराइजेशन रिक्वायरमेंट वेल दैट इज मोर डायरेक्टेड टुवर्ड्स सेफगार्डिंग आवर इंटरेस्ट फ्रॉम कंट्रीज व्हिच आर नोन टू डू प्रिडेटरी प्राइसिंग और सप्लाई गुड्स एट इररेशनल प्राइसेस व्हिच आर इवन समटाइम्स लोअर देन द कॉस्ट ऑफ़ मैन्युफैक्चर इन इंडिया कंट्रीज
व्हिच हैव फेयर प्ले एंड सर्टेनली एंड इट इज़ेंट दैट वी ऑल अंडर अंडरस्टैंड दिस अ कंट्री लाइक द यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका वेयर द कॉस्ट ऑफ़ लेबर इज़ प्रोबेब्ली 50 टाइम्स द कॉस्ट ऑफ़ लेबर इन इंडिया अ कंट्री लाइक द यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका वि द पर कैपिटा इनकम ऑफ $90 नियरली वर्सेस इंडिया व्हिच इज़ एट $3000 पर कैपिटा देयर इज़ सर्टेनली नो कंपटीशन वी एक्चुअली कॉम्प्लीमेंट ईच अदर एंड फॉर आवर नेशनल सिक्योरिटी वी विल सर्टेनली नीड मेनी आईसीटी प्रोडक्ट्स फॉर एग्जांपल एनवीडिया चिप्स वी विल सर्टेनली नीड एआई इक्विपमेंट वी विल सर्टेनली नीड डेटा सेंटर्स
इफ वी हैव टू रिमेन अब्रेस्ड विथ व्हाट इज़ हैप्पेनिंग इन द वर्ल्ड इफ आर आईटी कंपनीज़ हाव टू रीऑरिएंट देम सेल्व टू स्टार्ट बिकमिंग मोर इन ट्यून विथ द नीड्स ऑफ द वर्ल्ड वी विल नीड दीेंट आईसीटी प्रोडक्ट्स। इट इज़ अ बिग विल। आई रिपीट इट इज़ अ बिग विल फॉर इंडिया दैट अमेरिका हैज़ एग्रीड टू प्रोवाइड असर्स ऑल दीज़ आईसीटी प्रोडक्ट्स व्हिच आर द नीड ऑफ़ द आवर इन आवर कंट्री। सर हां लीजिए। सर माइक उठा लीजिए। हमारे यहां से अह स्मार्टफोन वगैरह जाता है और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट जो एक्सपोर्ट होते हैं उस पे स्टेटस
क्या होगा? और दूसरा सर जॉइंट स्टेटमेंट में जो चौ लास्ट का चौथा पॉइंट है उसमें कुछ बोला गया है ऐसा कि यूएस और इंडिया जो है आगे भी टेरिफ कम करने पे बातचीत करते रहेंगे जो 18% अभी हुआ है। ऐसा ये अगर मैं गलत हूं तो सही करिएगा सर। सबसे पहली बात तो स्मार्टफोनस आगे भी जीरो ड्यूटी पर भारत से एक्सपोर्ट होते रहेंगे। उनका निर्यात जीरो ड्यूटी पर आगे भी चलेगा जो एक प्रकार से बड़ा एज देता है भारत के स्मार्टफोन इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरर्स को और स्वाभाविक है हम तो बड़े लक्ष्य के साथ दुनिया के
साथ काम कर रहे हैं। भारत अब कमजोर नहीं है। भारत एक आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से भरा हुआ देश है। और हम चाहेंगे कि आगे भी आगे भी हम यूनाइटेड स्टेट्स के साथ अपने रिश्ते और सुधारें और नई चीजों पे चर्चा करें। तो यह पहला फ़ेज है। आगे हम और देखेंगे कि क्या द्विपक्षीय लाभ जो दोनों तरफ़ को लाभ मिल सकता है। उन चीजों पे आगे चर्चा करेंगे। मैडम फ्रॉम सीएनए न्यूज़ 18 आई वुड लाइक टू आस्क यू सर हाउ दिस डील विल कॉम्प्लीमेंट दी मेक इन इंडिया? द वेरी फैक्ट दैट अमेरिका हैस इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी
फार सुपीरियर टू एनी अदर कंट्री इन द वर्ल्ड बट बिकॉज़ ऑफ़ देयर हाई कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन एंड लेबर देयर आर मेनी प्रोडक्ट्स व्हिच दे आर नॉट एबल टू कंपीट इन द वर्ल्ड मार्केट्स एट अफोर्डेबल प्राइसेस प्रोवाइड्स अ हज यूनिक अपॉर्चुनिटी फॉर अमेरिकन इनोवेशन टू प्रोड्यूस इन अमेरिका फॉर द नीड्स ऑफ अमेरिका एंड टू कोलबोरेट वि फ्रेंडली कंट्रीज ट्रस्टेड डेमोक्रेसी लाइक इंडिया टू वर्क टुगेदर टू मैन्युफैक्चर इन इंडिया टू कैप्चर वर्ल्ड मार्केट देयर फॉर वी कॉम्प्लीमेंट ईच अदर भारत और अमेरिका का एक दूसरे के पूरक है। वी कॉम्प्लीमेंट ईच अदर। हम स्पर्धा नहीं करते। वी डोंट
हैव अ कंपटीशन विद ईच अदर। हां जी। सर ये जॉइंट स्टेटमेंट असीम हूं सीएनबीसी आवास से। ये जो जॉइंट स्टेटमेंट है उसमें लिखा गया है कि वाइनेंस स्पिरिट्स के बाद एडिशनल प्रोडक्ट। तो एडिशनल प्रोडक्ट कौन से हैं? और इसे इतना ओपनड क्यों छोड़ा गया है जॉइंट स्टेटमेंट के अंदर? दो तरफ बातचीत आगे भी चलती रहे वह भारत के हित में है और अगर फेयर एक्विटेबल और बैलेंस ट्रेड आगे और बढ़ता है तो मैं समझता हूं उसका तो स्वागत ही करना चाहिए। सर सर सर सर आई एम प्रशांत फ्रॉम एशियानेट न्यूज़ हाउ विल दिस हेल्प दी
मरीन इंडस्ट्री इन इंडिया एंड आल्सो आर द अमेरिकन कार्स इंक्लूडेड इन दिस एग्रीमेंट दी मरीन इंडस्ट्री इज़ ऑलरेडी सेलिब्रेटिंग एंड आई कॉम्प्लीमेंट द फिशरमैन एंड द सी फूड एक्सपोर्टर्स बिकॉज़ व्हेन द ड्यूटी वेंट अप टू 50% दे लुक फॉर अल्टरनेट मार्केट्स एंड एंड द ग हेल्प देम ओपन अप मार्केट्स एंड अदर जग्राफीस फॉर एग्जांपल द होल यूरोपियन यूनियन ओपन अप अ बिग मार्केट अपॉर्चुनिटी एंड डिस्पाइट अ फॉल इन यूएस एक्सपोर्ट्स वी सॉ 20% इनक्रीस इन सी फूड एक्सपोर्ट्स इन द लास्ट फ्यू मंथ्स नाउ विद सी फूड आल्सो कमिंग डाउन टू 18% दे विल हैव अ
डबल बेनिफिट। दे हैव न्यू मार्केट्स व्हिच दे हैव ओपन अप एंड दे विल आल्सो बी एबल टू सप्लाई टू द अमेरिकन मार्केट। सो आई आई आई सॉ सम न्यूज़ रिपोर्ट्स दैट सी फूड एक्सपोर्टर्स आर सेलिब्रेटिंग इन ऑल द कोस्टल एरियाज़ पर्टिकुलरली इन केरला सीपड एंड फिशरमैन आर सेलिब्रेटिंग पर्टिकुलरली इन तमिलनाडु सीूड एंड फिशरमैन आर सेलिब्रेटिंग इन महाराष्ट्र इन गुजरात इन आंध्र प्रदेश इन उड़ीसा देयर इज अ वेव ऑफ हैप्पीनेस इन अमोंग्स द सी फूड एक्सपोर्टर्स सर मनोहर सिंह यूनिवर्ता से मेरे सर छोटे-छोटे दो तीन सवाल हैं। एक तो मैं चाहूंगा जानना कि जो टीआरक्यू का
हमने प्रोटेक्शन लिया है क्या टेरिफेट कोटा का सेब और कॉटन के अलावा हमें किन-किन वस्तुओं पर हमने व्यवस्था रखी है। दूसरा जो हमारा स्टील और एलुमिनियम प्रोडक्ट है जिसको नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत राष्ट्रपति ट्रंप ने उसको जो है उनके आयात पे हमारे जो प्यूरिटिव या प्रोटेक्शन प्रोटेक्टिव टेरिट्स लगाए। कई कई प्रोडक्ट्स हैं जिस पे टेरिफ कोटा रखा गया। तो लिस्ट बड़ी लंबी है। अह समय पर आपके पास आ जाएगा। और जहां तक स्टील और एलुमिनियम का सवाल है वो पूरे विश्व के ऊपर उन्होंने 50% टेरिफ लगाया है। तो वो टेरिफ पूरे विश्व में सबके
ऊपर सेम है। जितना भारत पे है उतने बाकी सब देशों पे भी है। सर हां जी। सर फ्रॉम मीडिया वर्ल्ड सर मेजर अनाउंसमेंट्स इन ब्रेक द माइक क्लोज। सर धन फ्रॉम मीडिया वन मेजर अनाउंसमेंट्स इंक्लूड अ फ्री ट्रेड एंड रशियन ऑयल अनाउंस बाय डोनाल्ड ट्रंप कुड यू जॉइन आई हैव स्टेडियड सो मेनी टाइम्स द एमए विल रिसोंड टू दैट एनीबडी एल्स दिस इज़ हेलो एक छोटा सर ऋषभ विद एनtb प्रॉफिट हियर सर द स्टेटमेंट आल्सो मेंशंस दैट यूएस इंडिया विल वर्क टुगेदर टू एड्रेस नॉन मार्केट मार्केट पॉलिसीज ऑफ़ थर्ड पार्टीज इज दैट रेफरेंस टू आवर
नर्द नेबर व्हाट इज द प्रोसेस देयर समझने वाले समझ गए सर जस्ट अ स्मॉल क्लेरिफिकेशन ये बात कही जा रही है कई जगह शंका है कि डीबीजीएस क्योंकि अमेरिका में जीएम से ही होता है तो ये क्या इनडायरेक्ट एंट्री हो जाएगी जीएम की इसके ऊपर एनवायरमेंट मिनिस्ट्री के प्रोसेससेस हैं और जैसे बोवन मीट है। एक बार बोन मीट प्रोसेस हो जाता है तो फूड फुट एंड माउथ डिजीज के ट्रेस नहीं आते उसमें। दैट इज़ डन एंड डस्टेड आफ्टर इट गेट्स प्रोसेस्ड। ऐसे कई सारे प्रोडक्ट्स में एक बार प्रोसेस हो जाता है तो उसके उसका इफेक्ट
जीएम का नहीं रहता है। और वो तो हम इतने दुनिया भर का सामान आप लोग खाते हैं, चॉकलेट्स खाते हैं और क्या-क्या दुनिया भर के जाते हो। आप भी विदेश जाके खाते हो तो एक बार प्रोसेस हो जाता है तो उसके बाद वो विषय रहता नहीं यस दिस यार सर इंट्रोड्यूस योरसेल्फ सर दिस इज़ विभूति फ्रॉम संवाद सर दिस दिस इज़ विभूति फ्रॉम संवाद ओडसा सो आई वांट टू आस्क यू वन थिंग एज यू नो सर ओडिसा इज़ अ वेरी फास्ट ग्रोइंग स्टेट इन स्ट्रॉबेरी एंड व्हाट इज़ योर स्पेशली प्लान फॉर इंपोर्ट एंड एक्सपोर्ट अबाउट
स्ट्रॉबेरी सिचुएशन अभी क्या है और सेकंड चीज है पेस्टिसाइड्स प्रोडक्ट को लेके लास्ट टाइम यूएस हैज़ डन अ प्रॉब्लम ऑन मैंगोज़ सो उनके प्लांस ऑफ एग्रीकल्चर तो ओसा गवर्नमेंट बता पाएगी नहीं मैं क्वेश्चन इज़ लास्ट ईयर व्हेन द मैंगो वी एक्सपोर्ट टू यूएस दे आर क्रिएटिंग सम प्रॉब्लम रिगार्डिंग ऑन दैट पेस्टिसाइड्स एंड सेम काइंड सर देयर आर एव्री कंट्री हैज़ हेल्थ एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स इंडिया आल्सो हैज़ हेल्थ एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स एफएसएसएआई एफडीए वी ऑल हैव आर हेल्थ एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स व्हेन वी इंपोर्ट एनी मटेरियल दे हैव टू मीट आवर स्टैंडर्ड व्हेन वी एक्सपोर्ट एनी मटेरियल
वी हैव टू मीट देयर स्टैंडर्ड इफ समबडी डजंट मीट दैट स्टैंडर्ड इट डजंट मीन दैट वी आर सपोज टू सपोर्ट अ बैड क्वालिटी। आई एम अगेन रिपीटिंग क्वालिटी क्वालिटी एस क्वालिटी। इंडिया इज़ नोन फॉर हाई क्वालिटी एंड आई रिक्वेस्ट ऑल एक्सपोर्टर्स एंड इंपोर्टर्स टू एनश्योर दैट इंडियास नेम एंड इंडियास कंज्यूमर्स गेट द बेस्ट क्वालिटी। सर सर तरुण शर्मा फ्रॉम Zee बिज़नेस माइक में माइक में। सर पहला सवाल एक क्लेरिफिकेटरी सवाल है कि जो अभी 25% इमीडिएट हट जाएगा और 18% हम कब होगा? 25% का तो एग्जैक्टली आर्डर निकल चुका है। तो वो तो हट गया
है और 18% भी हो जाएगा अगले हफ्ते तक मेरे ख्याल से। उसके लिए नया एग्जैक्टली सर सोलर मॉड्यूल और सोलर सेल्स के लिए भी कोई ड्यूटी क्योंकि यूएस को सर हमारे यहां से जो सोलर सेल्स और सोलर मॉड्यूल्स जाते हैं उसमें इशू रहता है तो उसमें कोई ड्यूटी रिलैक्सेशन हो गई उसमें भी 50% लगने लगा था वो घट के 18% हो गया है आरटी कीर्तिका सर कीर्तिका फ्रॉम इकोनॉमिक टाइम्स व्हाट आर दी अह डिस्क्रिमिनेटरी एंड दोज अह नॉन-रिफ बैरियर्स इन डिजिटल ट्रेड दैट वी विल एड्रेस देयर आर नो डिस्क्रिमिनेटरी बैरियर्स बट इफ देयर आर एनी
इट विल बी एड्रेस ऑन बोथ साइड्स। सो जस्ट अ क्विक क्लेरिफिकेशन इन द एग्जीक्यूटिव ऑर्डर द यूएस मेंश दैट इंडिया विल बाय प्रेशियस मेटल्स फ्रॉम द यूएस। सो हाउ मच ऑफ़ आवर गोल्ड डोमेस्टिक डिमांड डू वी प्लान टू बाय फ्रॉम द यूएस सर? सेड गवर्नमेंट डजंट डिक्टेट परचेजेस बट इफ द डील इज गुड ऑब्वियसली वी वांट टू डवर्सिफाई आवर सोर्सेस। सो इफ द गोल्ड इंपोर्टर्स आर और प्लैटिनम इंपोर्टर्स अदर मिनरल प्रेशियस मेटल इंपोर्टर्स विल गेट अ गुड डील आई एम श्योर दे विल बी हैप्पी टू इंपोर्ट फ्रॉम द यूएस। लेडीज सिटींग एट द एंड प्लीज
इफ यू कैन कम अप टू आवर माइक देन देन यू कैन आस्क योर क्वेश्चन। मीन वाइल टेस्ट यू कैन गो अहेड सर अभी जिस पे 18% लग रहे हैं लगेंगे तो वो रेसिप्रोकल टरी फॉर जो पेनल्टी कैप वो लगने से पहले कितने लग रहा था 50 लगता था उससे पहले इस प्रोडक्ट पे कितने लग रहे थे हाउ डस दैट मैटर जो अभी लगता था उससे 50 से 18 हुआ है ना यस आई एम पूजा दास फ्रॉम डाउन टू अर्थ मैगजीन सर माय क्वेश्चन इज रिलेटेड टू क्रिटिकल मिनरल्स आफ्टर चाइना इंपोज्ड एक्सपोर्ट बैन ऑन रेयर अर्थ
एंड आफ्टर दिस बीटीए हाउ डू यू सी इंडिया एंड यूएस पार्टनरिंग फॉर क्रिटिकल मिनरल्स स्पेशली फॉर वेरी गुड क्वेश्चन यूएस एंड इंडिया आर बोथ स्ट्रेटेजिक पार्टनर्स फ्रेंड्स एंड अलाइस एंड वी आर अ पार्ट ऑफ पैक सिलिका द यूएस लेड इनिशिएटिव व्हिच इज़ वर्किंग टू डेवलप अल्टरनेट सोर्सेस ऑफ क्रिटिकल मिनरल्स व्हिच इज़ वर्किंग टू क्रिएट रेिलिएंट सप्लाई चेन्न टू एनश्योर अनइंटरप्टेड सप्लाई ऑफ क्रिटिकल मिनरल्स टू सपोर्ट इंडस्ट्री एंड सपोर्ट इकॉनमीज़ अराउंड द वर्ल्ड एंड वी आर वेरी कॉन्फिडेंट दैट लाइफ माइंडेड फ्रेंडली कंट्रीज हु आर ऑल मेंबर्स ऑफ़ पैक सिलिका विल हैव अ सिग्निफिकेंट इंपैक्ट इन इंश्योरिंग
वेरी रोबस्ट एंड रेजिलिंट सप्लाई चेन्स इन क्रिटिकल मिनरल्स। अह सर, अभिमन्यु फ्रॉम सीएनबीसी टीवी 18. अह सर, व्हाट इज़ द काइंड ऑफ़ गेन वी आर लुकिंग एट विथ रिस्पेक्ट टू एक्सपोर्ट ऑफ़ एयरक्राफ्ट पार्ट्स फ्रॉम इंडिया इंटू द यूएस एंड हाउ इज़ द ड्यूटी रिडक्शन गोइंग टू बी इफ़ेक्टेड लाइक? ऑलरेडी बोइंग इज अ लार्ज बयर ऑफ एयरक्राफ्ट पार्ट्स फ्रॉम इंडिया। ऑलरेडी एयरबस इज अ लार्ज बयर ऑफ एयरक्राफ्ट पार्ट्स फ्रॉम इंडिया। इनफैक्ट आई एम टोल्ड बोथ दी कंपनीज़ आर लुकिंग एट इंडिया एस देयर लार्जेस्ट फॉरेन ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर ओईएम फॉर पार्ट्स एंड गोइंग फॉरवर्ड एंड आई हैव
हैड कन्वर्सेशंस विद द विद द टॉप बोर्ड सीईओ एंड द टॉप बोर्ड ऑफ बोथ दिस कंपनीज़ देयर इस अ लॉट ऑफ एक्साइटमेंट अबाउट द यूएस इंडिया पार्टनरशिप एंड विद द एग्जीक्यूशन ऑफ़ दिस इंटेरिम एग्रीमेंट एस अ फर्स्ट फ दिस विल ओनली गेट स्ट्रेंथ वि सर्च परमिशन वी विल टेक लास्ट कपल ऑफ क्वेश्चंस राजीव जी सर मेरा सवाल राजीव दैनिक जागरण से सर मेरा सवाल है कि बहुत सारे आइटम पे जीरो ड्यूटी अब हमारा हो गया है जो हम एक्सपोर्ट करेंगे अमेरिका में तो उसका वॉल्यूम कितना है कितने बिलियन डॉलर का हम वो एक्सपोर्ट करते हैं
जिस पे जीरो ड्यूटी हो गया और क्या इससे तत्काल रूप से कितना फायदा मिलेगा दूसरा सवाल है सर ऑटो पार्ट्स को लेकर हम लोगों ने क्या किया है? इस पर थोड़ी स्थिति स्पष्ट नहीं है। किस चीज पे? ऑटो पार्ट्स। ऑटो पार्ट्स ऑटो पार्ट्स पे जैसे मैंने कहा कि कुछ ऑटो पार्ट्स ऐसे हैं जिस पे हमें जीरो ड्यूटी मिलेगी। कुछ पे 18% रहेगा। दोनों प्रकार के ऑटो पार्ट्स रहेंगे और लगभग आधा जो हमारा एक्सपोर्ट है वो जीरो ड्यूटी पे चले जाएगा। 45 मिलियन 40 टू 45 मिलियन 44 के करीब है अगर इतना ही आप लोग हमारे
को ग्रिल करके स्पष्टता चाहते [हंसी] हैं तत्काल रूप से बढ़ेगा तत्काल रूप से फायदा होगा हमारे एक्सपोर्ट को क्योंकि जीरो पे जाएगा तो देखिए हमारे एक्सपोर्टर्स को मैं अपील करता हूं अब बड़ा अच्छा समय है भारत का जैसे माननीय प्रधानमंत्री जी कहते हैं यही सही समय है। सही समय है। दुनिया के 38 विकसित देशों के साथ प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हमने नए बाजार खोलने का काम किया है। आज हमारे निर्यातकों के लिए, हमारे मेक इन इंडिया प्रोग्राम के लिए, हमारे स्टार्टअप्स के लिए स्वर्णिम मौका है। हमारे को पूरी दुनिया भारत को एक विश्वसनीय
साझेदार के रूप में देखती है। भारत के युवा युवतियों के हुनर पर उनके टैलेंट पर उनके स्किल पर दुनिया को बहुत उम्मीदें लगी हुई है। और मेरा पूरा विश्वास है माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत आगे आने वाले दिनों में दशकों तक विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा और जल्द ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 2000 47 तक आज की 4 ट्रिलियन डॉलर की भारत की अर्थव्यवस्था इकॉनमी कम से कम 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक भारत की अर्थव्यवस्था हो जाएगी। बहुत-बहुत धन्यवाद मित्रों। मैं समझता
हूं जैसे माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा अब भारत फ्यूचर रेडी है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में माननीय प्रधानमंत्री जी ने वाक्य इस्तेमाल किया था भारत अब फ्यूचर रेडी है। मैं समझता हूं के इस आज के एग्रीमेंट से यूएस के साथ एग्रीमेंट जिसकी महीनों से सभी को इंतजार थी। मैं एक-एक एग्रीमेंट करता था। आपके पास आता था। आप सीधा पूछते थे यूएस का कब हो रहा है? तो मैं समझता हूं ये एग्रीमेंट होने से किसान भी सुरक्षित, देश भी विकसित और भारत फ्यूचर रेडी बन गया है। बहुत-बहुत धन्यवाद। यू वांट एन इंग्लिश स्टेटमेंट आल्सो?
आर दे इंग्लिश चैनल्स? सो दोज़ हु डोंट वांटेड कैन लीव, दोज़ हु वांटेड कैन स्टे। लोगों के काम ही आएगा। क्या कहना? सर ले लीजिए। नहीं मोदी जी वेल आई आई वुड लाइक टू कॉम्प्लीमेंट ऑनरेबल प्राइम मिनिस्टर श्री नरेंद्र मोदी जी एंड प्रेसिडेंट मिस्टर डॉनल्ड ट्रम्प फॉर दिस हिस्टोरिक एग्रीमेंट द इंटेरिम फ्रेमवर्क फॉर इंटेरिम एग्रीमेंट व्हिच हेज़ बीन फाइनलाइज्ड व्हिच इज़ सून बी कन्वर्टेड इंटू द फर्स्ट ब्रांच ऑफ ऑफ़ आवर पोटेंशियल बलटरल ट्रेड एग्रीमेंट ब्रिंगिंग टू फ्रूशन व्हाट वाज़ डिसाइडेड बाय बोथ लीडर्स व्हेन दे मेट इन वाशिंगटन डीसी इन फेब्रु 2020 बोथ लीडर्स दैट एग्रीड
दैट इंडिया एंड द यूएस आर स्ट्रेटेजिक पार्टनर्स एंड दे विल टुगेदर पावर द ग्लोबल इकॉनमी एंड वर्क टुवर्ड्स ग्रोइंग बटरल ट्रेड बिटवीन द यूएस एंड इंडिया टू 500 बिलियन डॉल पर ईयर। आई एम एक्सट्रीमली डिलाइटेड टू शेयर विद यू दैट टुडे वि द साइनिंग ऑफ दिस जॉइंट स्टेटमेंट फाइनलाइजेशन ऑफ दिस जॉइंट स्टेटमेंट वी हैव सर्टेन मोशन द फर्स्ट ट्रैक ऑफ अचीविंग दिस गोल ऑफ 500 बिलियन डॉलर बटरल ट्रेड एनुअली टुडे विल बी रिमेंबर्ड फॉर इयर्स एज़ द फाउंडेशन ऑफ़ अ वेरी स्ट्रांग स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप बिटवीन टू ऑफ द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट डेमोक्रेसी टवर्ड्स सपोर्टिंग फेयर ट्रेड टवर्ड्स
प्रोवाइडिंग ओपोरर्चुनिटीज फॉर बिनेसेस बोथ इन द यूएस एंड इंडिया टू ग्रो एक्सपेंड एंड सर्व देयर पीपल टुवर्ड्स ग्रेटर प्रोस्पेरिटी ऑफ बोथ नेशंस अंडर द लीडरशिप ऑफ प्राइम मिनिस्टर मोदी एंड प्रेसिडेंट ट्रंप दे हैव कम टू अ वेरी फेयर इक्विटेबल एंड बैलेंस्ड एग्रीमेंट व्हिच विल स्लैश यूएस रेसिप्रोकल टेरिफ्स ऑन इंडियन गुड्स टू 18% एडिशनली 0% % टेरिफ्स विल बी गिवन ऑन सेवरल प्रोडक्ट्स लाइक जेनेरिक फार्मा एयरक्राफ्ट कॉमोनेंट्स ऑटो पार्ट्स एटसेट्रा मैसिव पोटेंशियल विल बी ओपन अप फॉर इंडियन एक्सपोर्ट्स इन द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट इकॉनमी द 30 ट्रिलियन डॉलर मार्केट प्रोवाइडिंग अपोरर्चुनिटीज फॉर आवर एमएस एफएमस आवर फार्मर्स
आवर फिशरमैन आवर यूथ आवर वुमेन एंड द वेरी टैलेंटेड एंड स्किल्ड पीपल ऑफ इंडिया लैक्स एंड करोड़ ऑफ जॉब अपोरर्चुनिटीज बिज़नेस ओपोरर्चुनिटीज मैन्युफैक्चरिंग सर्विस सेक्टर विल ओपन अप आर फार्मर्स एंड फिशरमैन विल गेट बेटर प्राइस फॉर देयर प्रोड्यूस एंड एंड गोइंग फॉरवर्ड देयर विल बी अ हज ग्रोथ इन सेक्टर्स लाइक टेक्सटाइल एंड एपरल जर्मन ज्वेलरी मशीनरी पार्ट्स टॉयज लेदर एंड फुटवेयर होम डेकोर स्मार्टफोनस सेवरल एरियाज इन एग्रीकल्चर व्हिच विल ओपन अप इन द यूएस एंड प्रोवाइड अ ह्यूज फॉर ऑल स्टेक होल्डर्स अक्रॉस द लेंथ एंड ब्रेड्थ ऑफ़ इंडिया। वी आर हैप्पी दैट वी हैव बीन
एबल टू सेफगार्ड सेंसिटिव सेक्टर्स एंड बैलेंस आवर फार्मर्स सेंसिटिविटीज पर्टिकुलरली इन एग्रीकल्चरल गुड्स एंड डेरी बाय फुल्ली प्रोटेक्टिंग एंड इंश्योरिंग अ कार्स केयरफुली क्राफ्टेड एक्सेंपशन इन सेवरल एग्री प्रोडक्ट्स लाइक मीट, पोल्ट्री, ऑल द डेरी प्रोडक्ट्स, जीएम फूड प्रोडक्ट्स, सोया मील, मेट्स, सीरियल्स, मिलेट्स लाइक जवार, बाजरा, रागी, कोडो, अमरंत, फ्रूट्स लाइक बनाना, स्ट्रॉबेरीज, चेरीज, सिट्रस फ्रूट्स, एटसेट्रा ग्रीन ग्रीन पीस काबुली चना मूंग ऑइल सीड्स सर्टन एनिमल सीड्स ग्राउंड नट्स हनी मोल्ट एंड इट्स एक्सट्रैक्ट्स नॉन अल्कोहलिक बेवरेजेस फ्लावर एंड मील्स स्टार्च एसेंशियल ऑयल्स इथेनॉल फॉर फ्यूल टोबको एटसेट्रा सो आई थिंक इट्स ट्रूली एन एग्रीमेंट दैट विल
गिव हज इंपेटस बोथ टू फार्मर्स, फिशरमैन एंड इंडस्ट्री इन इंडिया एंड विल आल्सो ओपन अप अ ह्यूज अपॉर्चुनिटी फॉर इंडिया इन मॉडर्न एरियाज लाइक डेटा सेंटर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग वेयर वी विल गेट इक्विपमेंट, हाई क्वालिटी चिप्स, हाई क्वालिटी आईसीटी गुड्स, हाई क्वालिटी इनोवेटिव मशीनरीज़ वेयर वी कैन इंपोर्ट हाई क्वालिटी क्वालिटी फार्मा प्रोडक्ट्स, मेडिकल डिवाइसेस, अदर प्रोडक्ट्स फॉर वि द यूनाइटेड स्टेट्स इज़ वेरी वेल नोन एंड विल हेल्प अस इन एक्सपेंडिंग ट्रेड ऑन बोथ साइड्स। सो दैट इंडिया एंड यूनाइटेड स्टेट्स कंटिन्यू टू ग्रो टुगेदर फॉर द शेयर्ड प्रोस्पेरिटी ऑफ 1.75 बिलियन पीपल। फ्रेंड्स आई थिंक
टुडे वी विल बी रिमेंबर्ड एस अ डे वेयर वी हैव प्रोटेक्टेड आवर फार्मर्स एनश्यर्ड फास्ट ट्रैकिंग द ग्रोथ ऑफ इंडिया एंड इंडियास इकॉनमी एंड प्रोस्पेरिटी ऑफ़ आवर पीपल इन द अमृतकाल एज वी ऑल कलेक्टिव ली वर्क टवर्ड्स विकसित भारत बाय 2047 थैंक यू वेरी मच