जब अल्लाह के नबी ने फरमाया ना लाल का जिक्र कि अपनी जुबानों को हमेशा अल्लाह के जिक्र से तर रखा करो। ऑलवेज कीप योर टंग मोस्ट वि द रिमेंबर्स ऑफ़ अल्लाह सुभाना ताला। एक मुसलमान मेहनत करता है इंडिविजुअल लेवल पे या कलेक्टिव लेवल पे। उसने सारी जिंदगी मेहनत की। हो सकता है जंग भी उसने लड़ी। इट इज पॉसिबल कि उसकी जिंदगी में उसको शायद विक्ट्री ना मिले। उसको फ्रीडम ना मिले। इसका हरगिज़ मतलब नहीं है कि वो हार चुका है या वो उसकी शिकस्त हो गई है। नो आप जब अल्लाह के नबी की सीरत पढ़ते
हैं सल्लल्लाह वसल्लम। जिस दिन उनको नबूवत मिली और आप चलते जाएं माइग्रेशन हुई। मदीना में आए वहां पर भी जंग लड़ी गई। कितनी मुश्किलात आई। सहाबा इकराम को टॉर्चर किया गया। रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के चाचा की बॉडी को म्यूटिलेट किया गया। हमजा बिन अब्दुल मुत्तलिब मुसा बिन उमैर के साथ क्या किया गया? यानी इट्स अ लॉन्ग हिस्ट्री। क्या कुछ नहीं हुआ? खबा बिन अरत के साथ क्या हुआ? सुमैया रज़ अल्लाह अन के साथ क्या हुआ? खून बहाया गया। लोगों पे मशक्कतें आई। भूख बर्दाश्त की गई। कितना कुछ किया। अल्लाह ताला एंड में आके क्या
बताते हैं? इवेंचुअली आफ्टर ऑल इट वाज़ फ्रॉम मी। यह मेरी तरफ से फतह मिली है तुम्हें। ये फतह मेरी तरफ से है। ऐ मुसलमानों अपना अकीदा ठीक रखो। यू डिड योर बेस्ट। अल्हम्दुलिल्लाह। तुमने अपनी तरफ से मेहनत की। लेकिन एट द एंड ऑफ़ द डे नेवर ब्रिंग दिस थिंग इन योर माइंड। जो कारून कहा करता था इनहु अला इल्मी कि यह तो जो है मेरे इल्म की वजह से मुझे माल मिला है। सी आई स्टार्टेड फ्रॉम स्क्रैच। आज मेरे पास यू नो मल्टी यू नो मल्टी बिलियन डॉलर इंडस्ट्री है। नो नो नो बंदे को हमेशा
हंबल रहना चाहिए। जो ईमान वाले होते हैं वो हमेशा हम्ल रहते हैं। वो अपनी तरफ से पूरी एफर्ट डालते हैं और अपनी एफर्ट डालने के बाद अल्लाह पे मामला छोड़ देते हैं। और ये अल्लाह वालों का तरीका है। यूसुफ अल सलाम आप जब उनकी जिंदगी पढ़ते हो इतने अप्स एंड डाउन्स आते हैं। अल्लाहू अकबर। इतने अप्स एंड डाउन्स आते हैं। और आपको पता है एंडिंग में नाउ दिस इज़ द क्लाइमेक्स ऑफ स्टोरी। एंडिंग में वो जब खुतबा देते हैं या अपने घर वालों को एड्रेस करते हैं क्या कहते हैं वकस मेरे रब ने मुझे बहुत
अच्छे तरीके से रखा जब मुझे जेल से बाहर निकाला एक्सक्यूज मी यानी एक बच्चे को कुएं में डाला जा रहा है। उसके बाद उसको गुलाम बना के जो है बेचा जा रहा है और फिर उसको फितने में मुब्तला किया जा रहा है। खवातीन के फितने में एंड देन ही वाज़ इन जेल बाय द वे ऑन अ साइड नोट दिस माइट बी न्यू फॉर यू हम समझते हैं कि जैसे ही वह जेल से बाहर निकले उनकी आजमाइश खत्म हो गई थी नो उनको मिनिस्टर बना दिया गया था ना एग्रीकल्चर अल्लाह ताला ने माल देके भी उनको
आजमाया था और ये सबसे बड़ा फितना होता है सारे फितनों से गुजर के वो क्या कहते हैं वकस और फिर एंड में क्या कहते हैं अल्लाह व दुनिया व आखिरा त मुस्लिम ऐ अल्लाह आप ही मेरे वली हैं। इसमें मेरी कोई बहादुरी नहीं है जो भी मैंने किया। आप मेरे वली हैं। आपकी सपोर्ट थी तो मैं ये सब कुछ कर पाया। अगर आप ना होते तो मैं कुछ भी ना कर पाता। राइट? तफ मुस्लिम। अब देखिए ना ऐ अल्लाह मुझे मुसलमान बनाकर ही वफात देना। मीनिंग आई डोंट वांट टू डाई एज अ डिसबिलीवर। उन्होंने ये
नहीं कहा कि जी मैं शायद ईमान और मुत्तकीन या उस लेवल पे चला गया नूरी मुस्लिम या अल्लाह आई एम जस्ट एन ऑर्डिनरी मुस्लिम इसको कहते हैं हंबलनेस तो मुसलमान हमेशा हंबल रहता है इदा जाल्लाह व फत ऐ मुसलमानों तुमने मेहनत की थी आफ्टर ऑल इट्स हेल्प फ्रॉम अल्लाह ये अल्लाह ताला की मदद है और जो विक्ट्री है वह अल्लाह ताला की तरफ से ही आती है तो इस कांसेप्ट को क्लियर करना बहुत जरूरी है। और एक और पॉइंट यहां पे समझते हुए आगे बढ़ते हैं। चल एक एस्पेक्ट तो समझ में आ गया कि एक
मुसलमान मेहनत करता है इंडिविजुअल लेवल पे या कलेक्टिव लेवल पे। उसने सारी जिंदगी मेहनत की। हो सकता है जंग भी उसने लड़ी। इट इज पॉसिबल कि उसकी जिंदगी में उसको शायद विक्ट्री ना मिले। उसको फ्रीडम ना मिले। इसका हरगिज़ मतलब नहीं है कि वो हार चुका है या वो उसकी शिकस्त हो गई है। नो देयर आर टू एस्पेक्ट्स। यह समझना बहुत जरूरी है। देखें जब ईमान वाला मेहनत करता है, सबर करता है, आगे बढ़ने की कोशिश करता है, स्ट्रगल करता है। दो में से एक काम जरूर होंगे। या तो उसके सब्र का फल उसको उसकी
जिंदगी में ही मिल जाएगा। विक्ट्री मिलेगी। अल्हम्दुलिल्लाह इस्लाम फैल जाएगा। या हो सकता है कि वह भी शहीद हो जाए। उसके साथी भी शहीद हो जाएं और फिर भी जुल्म का गलबा रहे। जालिम का गलबा रहे। अगर ऑप्शन बी होती है, इसका हरगिज़ मतलब नहीं है कि इनकी मेहनत जाया हो गई। नहीं। सूर बुरूज इस हवाले से बहुत इंपॉर्टेंट सूर है। एक जालिम बादशाह उसने क्या किया? जितने भी मुसलमान थे, उस वक्त की जो भी उम्मते मुस्लिम थी, उनको थ्रेटन किया कि अगर तुम अपने दीन से ना हटे, तो मैं तुम सबको जिंदा जला दूंगा।
कोई भी नहीं हटा। तो उसने जो है गड़े खुदवाए और वहां पर आग भड़काई और सबको एक-एक करके अंदर फेंक दिया। द होल मुस्लिम उ्मा वाज़ बर्न अलाइव। सबको जिंदा जला दिया गया। अब अगर कांसेप्ट क्लियर नहीं है एंड आई एम टेलिंग यू दिस इज़ फिकुद्दीन। असल में अंडरस्टैंडिंग ये है दीन की। व्हेन यू हैव द राइट अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ दीन। आपके सामने से ना फोग खत्म हो जाती है। यू गेट द क्लियर विज़। फिर आप यह नहीं कहते कि देखो हमारे पड़ोस में मुसलमानों के साथ क्या हो रहा है। यू नो आई सी डेड चिल्ड्रन
बिल्डिंग्स डेमोलिश्ड हैं। क्योंकि आपका विज़ क्लियर है। सूर बुरूज में अल्लाह ताला यह सारा इंसिडेंट बयान करने के बाद क्या फरमाते हैं? जालिक फजुल कबीर। यही तो असल में कामयाबी है। असल में जीत तब होती है मुसलमान के लिए के चाहे अपेरेंटली जो रिजल्ट्स है वो नेगेटिव हो या पॉजिटिव हो। बंदा जब इंटरनली अपनी एफर्ट एग्जर्ट करता रहता है, स्ट्रगल करता रहता है। ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुर रसूल्लाह पे कॉम्प्रोमाइज नहीं करता और जो खबर है जो गैब की खबर है उस पर तस्दीक उसकी होती है। तस्दीक रखता है कि देयर इज़ पैराडाइज आउट देयर। हां,
अभी हालात खराब हैं। नो प्रॉब्लम। इंशाल्लाह एक वक्त आएगा यह भी वक्त खत्म हो जाएगा। मैक्सिमम क्या हो जाएगा? मेरी सांसे खत्म हो जाएंगी। असल में जिंदगी मुसलमान की क्या है? वो जिंदगी है ना? वो वाक्य आपको याद है ना कि उमर बिन खत्ताब आए थे सुभान अल्लाह। रसूल अल्लाह के जब हुजरे को उन्होंने स्कैन किया ना रसूल अल्लाह वहां पे बैठे हैं। अपनी चटाई पे रिलैक्स कर रहे हैं। उमर बिन खत्ताब कहते हैं कि मुझे हार्डली कोई ऐसी चीज मिली जो मैं बता सकूं कि मैंने ये ये चीजें देखी। इट वाज़ नथिंग। एक छोटा
सा मटका था और एक मैट था जिस पे रसूल अल्लाह जो है वहां पे आराम कर रहे थे और वो खजूरों के तनों का बना हुआ था। रसूल्लाह जब बैठते हैं सल्लल्ला वसल्लम तो उस मैट्रेस के वो जो मैट था उसके प्रिंट्स उनके कमर मुबारक पे लगे होते हैं। और उमर बिन खब सिचुएशन देख के ना उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। एंड बाय द वे रसूल अल्लाह का जो हुजरा था ना अगर कोई बंदा वहां पे खड़ा हो ना हुजरे में तो उसका आराम से हाथ लग सका था ऊपर। दिस वास द हाइट।
और यह रहमतुल आलमीन का हुजरा था। उमर बिन खब कहते हैं या रसूल अल्लाह आई डोंट अंडरस्टैंड दिस कि जो रोमन एपरर्स हैं ये जो बादशाह हैं फारिस के बादशाह ये हर किस्म की अय्याशियां कर रहे हैं। इनके पास सब कुछ है अंता रसूल अल्लाह आप अल्लाह के रसूल हैं और वो तो गुनहगार भी हैं। वो मुशरिकन भी हैं। वो ये ये करते हैं। अल्लाह के नबी ने कैसी तसल्ली दी? ही वास स्माइलिंग। ही वाज़ रिलैक्स। कहते हैं कि यबना खताब ऐ खत्ताब के बेटे क्या तू यह पसंद नहीं करता कि उनके लिए यह दुनिया
हो और हमारे लिए आखिरत हो अफी शक उमर कहीं तुझे शक तो नहीं है वो जो गैरब की खबर है जितनी उसमें तस्दीक होगी उतना ही आपका अमल यकीन ज्यादा हो जाएगा। सो दिस इज़ व्हाट इज़ रिक्वायर्ड। अगर कोई मुसलमान कोई मुस्लि वो इस सिराते मुस्तकीम पे चलते-चलते उसकी जान चली भी जाए। अल्हम्दुलिल्लाहिक फज़ुल कबीर हम यानी अल्लाह ताला हमें ईमान वालों में शामिल फरमाए। देखिए ईमान वाले शॉर्ट साइटेड नहीं होते। दे डोंट हैव अ प्लान फॉर 10 इयर्स, 50 इयर्स और 100 इयर्स। नो ये शॉर्ट टर्म प्लान है। जो ईमान वाले होते हैं वो
लॉन्ग टर्म प्लान अपने सामने रखते हैं। जो एटर्निटी है उसके हवाले से वह सोच रहे होते हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं 50 60 साल के बारे में बस सोच के यह ना हो यहां पर तो मैं लेट्स से कोट इन कोर्ट मैं अय्याशी कर लूं अगर वहां पे मेरे लिए मसला खड़ा हो तो फिर यू नो आई विल बी अ लूजर और आज जुम्मे का दिन है यही तो आप अपने आप को दोबारा रिमाइंड करवाते हो सूर काफ की जो आखरी आयात है क्या आयात हैं कुल हल नबी बिल आमाला कि हम
तुम्हें ना बताएं कि सबसे बड़े लूजर्स कौन है ये कौन है अलदी हयात दुनिया सुना ये वो लोग हैं जो दुनियावी लिहाज से बड़ा प्रोस्पर कर रहे हैं। यस पहले इनकी सैलरी बहुत थोड़ी थी। अब सैलरी डबल हो गई है। अब ये फाइव फिगर्स, सिक्स फिगर, सेवन फिगर्स लेना शुरू हो गए हैं। पहले एक शॉप थी, अब दो शॉप्स हैं। पहले एक बिज़नेस था। अब दो नो ये जो प्लान कर रहे हैं टेंजिबल एस्पेक्ट्स में प्लान कर रहे हैं। अच्छा पहले मेरे अकाउंट में इतने पैसे थे आज इतने यस मैं सही ट्रैक पे लगा हुआ
हूं। अल्लाह ताला फरमाते हैं दीज़ आर द बिगेस्ट लूज़र्स। क्योंकि इनकी जो साइट है ना सिर्फ 100 साल तक जाती है मैक्सिमम। या जब तक ये जिंदा रहेंगे। वंस दे आर डेड एवरीथिंग इज़ गॉन। बंदे ने जो घर भी बनाया वो भी उसका नहीं रहता। और वही घर वाले जो आपके क्लोज वंस होते हैं वही तो आपको छोड़ के आते हैं ग्रेवयार्ड में। राइट? और वही बाद में फिर इन्हहेरिटेंस सारी जो है डिस्ट्रीब्यूट हो रही होती है। वेयर इज इट? मेहनत कहां गई? सो असल में मेहनत क्या है जो आप उस जहां के लिए मेहनत
करते हो। सो दिस इज़ द राइट अंडरस्टैंडिंग ऑफ इस्लाम। तो ये जो है दो मैंने एस्पेक्ट्स आपको बता दिए हैं। व्हाट इज द रियल सक्सेस? कि असल में कामयाबी क्या है? अब आखरी आयत पे आ जाते हैं। आयत नंबर थ्री फस सब रब्बिका वस्तफिर एंड इंशाल्लाह दिस वुड बी अ पॉइंट यू नो व्हिच वुड क्लेरिफाई इंशाल्लाह द कांसेप्ट एट टाइम्स अ पर्सन माइट थिंक कि इस्लाम के कुछ शायर हैं कुछ सिंबल्स हैं कुछ टूडस हैं जिनको हो सकता है बंदा बी लिटल कर रहा हो या जितनी सिग्निफिकेंस देनी चाहिएेंस देनी चाहिए वह नहीं दे रहा
उसमें नमाज भी आ जाती है रमजान के रोज़ भी आ जाते हैं उसमें तस्बी भी आ जाती है जो अजकार आप करते हैं यह बात आप जान लो जो बात अल्लाह ने बताई है अपनी किताब में या नबी करीम सल्लल्लाह वसल्लम ने बताई है वो मामूली बात नहीं है वो एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी है राइट और वो दीन का हिस्सा है और जो चीज दीन का हिस्सा बन जाती है वो मामूली नहीं होती। यह बात आप याद रखना। इफ अ पर्सन कम्स टू यू और से कि यार तू हमेशा नमाज़ की बात करता रहता है। यू नो
डोंट टॉक टू मी अबाउट सला। अच्छा तू मुझे अज़कार के बारे में बताता रहता है। यू नो डोंट टेल मी अबाउट अकार। आई नो मच बेटर यू नो व्हाट शुड आई डू। मुझे पता है तू मुझे ना सिखा। ये बंदा क्या कर रहा होता है। आउट ऑफ इग्नोरेंस ये इस्लाम के शायर को भी लिटिल कर रहा होता है। डू यू अंडरस्टैंड द पॉइंट हियर? तो जो चीज हमारे जो हुक्म हमारे रब ने हमें दिया है या हमारे नबी ने हमें बताई है सल्लल्लाह वसल्लम वो बात मामूली नहीं है। वो बात मामूली नहीं है। अब मुझे
आप यह बताएं कि ये जो हुक्म दिया जा रहा है अल्लाह के नबी को आप तस्बीह बयान करें। आप जब अल्लाह के नबी की जिंदगी को जरा जरा अपने सामने रखें। राइट? जरा हॉरिजॉन्टली अपने सामने रखें। डिफरेंट फेसेस आते हैं। टफ टाइम्स थे जब नबूवत का जो है सिलसिला शुरू होता है। लोगों ने क्या कुछ कहा। डिफरेंट नेम से पुकारा साहिर मजनून उनकी जो बेटियां थी और टॉर्चर करने के लिए देखिए एक साइकोलॉजिकल टॉर्चर होता है और एक फिजिकल टॉर्चर होता है। उन्होंने क्या किया? अपने चाचा ने ही अबू लहब ने पहले ना बात पक्की
हुई थी उनकी बेटियों की के शादी होगी। लेकिन उन्होंने कहा कि नहीं हम शादी अब नहीं हम रिश्ता तोड़ रहे हैं और ये बड़ा झचका होता है एक फादर के लिए बाय द वे राइट और कोई लेजिट रीज़न भी नहीं है। तो बाय द वे लोगों ने ना कोई कसर नहीं छोड़ी। साइकोलॉजिकल टॉर्चर जहां दे सकते थे वो भी दिया और जहां पे फिजिकल टॉर्चर कर सकते थे वो भी किया। आपको जो है वो जो ताइफ का वाक्य है वो आपके सामने है। राइट? मैं चाहता हूं कि आप अगर आपके पास ऐप है। आप सूर
अल हिजर निकालें। सूरह नंबर 15, आयत नंबर 97, सूरह नंबर 15, आयत नंबर 97 ओके शुड आई रिसाइड वकम अन सद का यकूल ए नबी हम जानते हैं जो लोग बातें बना रहे हैं ना आपको बुरा कहते हैं। उससे आपका दिल ना घुटता है। जैसे हम मुहावरतन कहते हैं ना कि मेरा दिल घुट रहा है। तंग पड़ रहा है। अब देखें अंबिया के लिए बड़ा मुश्किल टास्क होता है। नबी जब भी दावत देता है वो दिल से देता है। ये बड़ी टफ जॉब होती है। देखें लेट्स से किसी कंपनी में आप सिर्फ एक मिसाल है।
आप सैलरी के लिए काम करते हो। सो योर मोटिवेशन इज सैलरी। आपको पैसे मिलेंगे। डू यू अंडरस्टैंड? नबी दावत इसलिए देता है क्योंकि नबी चाहता है कि मेरे उम्मती जहन्नुम की आग से बचे। उसको ना माल से गज़ होती है ना किसी और चीज से। तो उसको वही मोटिवेशन चाहिए होती है। और देखिए जब आप किसी को अच्छी बात बताते हो और जब बंदा वो बात ना सुने और उल्टा आपको बुरा भला कहे। यू फील बैड अबाउट इट। कि मैं इसके भले की बात कर रहा हूं। अपना ही नुकसान कर रहा है। तो अंबिया के
लिए बहुत मुश्किल होता है। तो अल्लाह ताला यही फरमा रहे हैं कि ऐ नबी हम जानते हैं आपके लिए कितना मुश्किल है। कि आपका दिल ना टाइट होता है। नाउ द नेक्स्ट आया जस्ट फोकस ऑन द नेक्स्ट आया। अल्लाह ताला फरमाते हैं जब ऐसा हो जब आपका दिल ऐसे घुटे तो आपने क्या करना है? फसबे हम रबिक व साजिद आप अल्लाह की तस्बीह बयान करें हम के साथ। यानी अल्लाह ताला की तस्बी बयान करें और हमद करें। सो देयर आर एटलीस्ट टू थिंग्स टू अंडरस्टैंड हियर। नंबर वन व्हेन टाइम्स आर टफ जब कोई बंदा टफ
टाइम से गुजर रहा हो तो उसके लिए स्यूशन क्या है? वो अल्लाह ताला की तस्बीह बयान करे। अल्लाह की हमद बयान करें। यह बहुत बहुत इंपॉर्टेंट नुस्खा है। और कुछ लोग गाफिल हैं। वह समझते हैं कि जिक्र अकार ही तो हैं। वास द बिग डील अंबिया का इतना बड़ा टास्क है और अल्लाह ताला जो अपने अंबिया को नुस्खा बताएंगे डेफिनेटली वो कार आमद है इट इज़ प्रैक्टिकल राइट और अगर वो नुस्खा अंबिया के लिए काम कर रहा है तो हमारी तो प्रॉब्लम्स कोई प्रॉब्लम्स ही नहीं है क्योंकि अशद अंबिया सबसे ज्यादा जो सेिवियरली टेस्ट किया
जाता है वो अल्लाह ताला के प्रॉफिट्स हैं अल्लाह ताला के अंबिया हैं तो अल्लाह के नबी को यह जो जो है नुस्खा बताया गया फसब हम रब्ब सो अब जो दूसरा पॉइंट है उसकी तरफ मैं दोबारा आता हूं कि जब अल्लाह के नबी की आप जिंदगी को थोड़ा सा ना हॉरिजॉन्टली अपने सामने रखें यू नो इन अ चार्ट व्हेन टाइम्स वर टफ अल्लाह ताला की तरफ से हुक्म क्या आ गया तस्बीह बयान करें और हम्द बयान करें राइट एंड द अदर डे आई वाज़ रिसाइटिंग सूर एंड कबूत पढ़ रहा था तो एक चीज़ क्लिक की
अल्लाह ताला ने ना उस सूर में भी अल्लाह के नबी को हुक्म दिया है कि आप अल्लाह की हमद और अल्लाह ताला की तस्बीह बयान करें। और सूरह अनकबूत यह नाजिल तब हुई थी कि जब माइग्रेशन का वक्त बहुत करीब आ चुका था। यानी जो मुसलमान हैं वो अब मक्का से मदीना माइग्रेट करने लगे हैं। तो इनिशियली मक्का में भी अल्लाह के नबी को हुक्म क्या था? ऐ नबी तस्बी बयान करें, हम बयान करें। और जब दरमियानी दौर की तरफ आप आएंगे तो तब भी क्या हुक्म दिया गया तस्बी बयान करें और हम बयान करें
और जब फतह आ गई फसब हम रब्बिका वस्तफिर हालात जैसे मर्जी हो अल्लाह की तस्बीह कभी ना छोड़ना हालात जैसे मर्जी हो अल्लाह की हमद कभी ना छोड़ना कभी कबभार लोग ना अल्लाह ताला सबको हिदायत दे दिस इज द अंडरस्टैंडिंग ऑफ दीन वो कभी कबभार कहते हैं कि यार इतना कुछ हो रहा है। अभी भी तुम नमाज़ों की बातें कर रहे हो। अभी भी तुम जिक्र-ए-अकार की बातें कर रहे हो। देखो वहां पे क्या हो रहा है। नाउ यू टेल मी? इज इट द राइट थिंग टू से कि अल्लाह के दीन की किसी चीज को
छोटा कर देना और किसी चीज को बहुत ऊपर लेके चले जाना। देयर इज़ नो डाउट जिहाद फी सबी अल्लाह। ये पिनिकल है दीन का। मैं इस चीज को डिनाई नहीं कर रहा हूं। लेकिन इसके साथ-साथ अल्लाह ताला के सिंबल्स को नीचे लेके जाना यह भी एटीट्यूड ठीक नहीं है। डू यू अंडरस्टैंड द पॉइंट हियर हर जिक्र की हर शायर की हर सिंबल की अपनी-अपनीेंस है। राइट? और ये तो चले हमने दुनियावी एस्पेक्ट से हमने बात समझने की कोशिश की। अल्लाह ताला ने फरिश्तों को जो टास्क दिया है वो भी यही टास्क है। सब रब फरिश्ते
अल्लाह ताला की तस्बी बयान करते रहते हैं। अल्लाह ताला की पाकी बयान करते हैं। बढ़ाई बयान करते हैं और अल्लाह ताला की हम्द बयान करते हैं। एंड वन मोर थिंग। इसके बाद इंशाल्लाह बात आगे बढ़ाएंगे। जब ईमान वाले जन्नत में जाएंगे वहां पे क्या मामला होगा? फॉर दैट वी हैव टू रेफर टू सूरह यूनुस। सूरह नंबर 10 आयत नंबर 10 सूर यूनस सूर नंबर 10 एंड आयत नंबर 10 जिसके पास अगर कुरान ऐप नहीं है देन शेयर इट विद योर फ्रेंड इंशाल्लाह दूसरा भाई जो है उसके साथ शेयर कर ले जी शुद इंशा्लाह दवा फीहा
सुभान अल्लाह हु्मा जब जन्नती जन्नत में दाखिल होंगे तो क्या कहेंगे सुभान अल्लाह ऐ अल्लाह आप पाक हैं व आखिर दावा अनम्दुलिल्लाह रब आलमीन और उनकी आखरी बात होगी ऐ अल्लाह सारी तारीफें आप ही के लिए हैं आप रब्बुल आलमीन है बंदा तस्बी और हम जन्नत में भी जाके बयान करेगा अल्लाह ताला की सो दिस गोज़ थ्रू आउट द लाइफ ऑफ द बिलीवर और एक और बात इफ आई आस्क यू व्हाट इज द मीनिंग ऑफ सुभान अल्लाह ग्लोरी बी टू अल्लाह ओके ओके एंड व्हाट इज दी ट्रांसलेशन ऑफ़ अल्हम्दुलिल्लाह प्रज़ बी टू अल्लाह यहां अल्लाह
ताला की तारीफ यानी तमाम तारीफ अल्लाह ही के लिए है ओके द नेक्स्ट क्वेश्चन व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन सुभान अल्लाह एंड सुभान अल्लाह एंड अल्हम्दुलिल्लाहब बिल्कुल ठीक कहा अल्लाह ताला बेब है यानी अल्लाह ताला पाक है जो हम कहते हैं जनरल जो इसकी जो है हम ट्रांसलेशन करते हैं। राइट अल्लाह ताला पाक यानी इसकी डेफिनेशन क्या है? या इसको अगर थोड़ा सा हम एक्सट्रैक्ट करें यूनुस अल सलाम जब मछली के पेट में गए थे। उनका जिक्र क्या था? ला इलाहा इल्ला अता सुभान इन कुलमीन। राइट? जब भी कोई बंदा सुभान अल्लाह कह रहा होता
है, वह यह कह रहा होता है कि ऐ अल्लाह आप हर एरर से पाक हैं। आपके अंदर कोई एरर नहीं है। ना आपकी प्लानिंग में एरर है, ना आपकी विज़डम में कोई एरर है, आपकी ना कोई खलकत में एरर है। यू आर परफेक्ट। आप परफेक्ट हैं। यूनुस अल सलाम वो यही तो कह रहे थे। ला इलाहा इल्ला अता सुभान ऐ अल्लाह आप पाक हैं। आपने मुझे इस मछली के पेट में रखा हुआ है। ऐ अल्लाह आई हैव नो राइट टू कंप्लेन या अल्लाह व्हाई डिड यू डू दिस टू मी? ऐ अल्लाह आप पाक हैं। आई
कांट कंप्लेन। इसकी क्या हिकमत है? हो सकता है बिकॉज़ आई एम अ ह्यूमन बीइंग। ये मैं अब अपनी बात कर रहा हूं। राइट? हो सकता है कि मुझे समझ में ना आए कि यह जो काम हो रहा है या यह जो प्रॉब्लम है, बीमारी है, फाइनशियल इशू है, यह क्यों हो रहा है। मे बी आई एम स्टक लेकिन मुझे एट द सेम टाइम ये कहना है सुभान अल्लाह। ऐ अल्लाह मुझे ये समझ में नहीं आ रही। आप अल अलीम हैं। आपको हर किस्म जो है आप हर किस्म का नॉलेज आपके पास है। आप अलह हैं।
आप जिंदा थे और जिंदा है और हमेशा रहेंगे। यू नो बेस्ट। ऐ अल्लाह मैं अपना मामला आप पर छोड़ता हूं। डू यू गेट द पॉइंट हियर? यानी आप अल्लाह ताला को ग्लोरिफाई कर रहे होते हैं कि अल्लाह ताला आपके अंदर कोई एरर नहीं है। ये जब आपको कांसेप्ट समझ में आ जाएगा तो अब थोड़ा सा एक और मैं आपको कांसेप्ट समझा दूं। इट कुड बी फनी। लेकिन यह है कि हमारे यहां थोड़ा सा यह कंफ्यूजन भी है। हमारे यहां जनरली सुभान अल्लाह आना कवालियों में ही बोला जा रहा होता है। सुभान अल्लाह। राइट? यानी जब
कोई अच्छी चीज हो रही है ना, सुभान अल्लाह। क्या ही बात है। डू यू अंडरस्टैंड द पॉइंट? मैं आपको समझाने के लिए कह रहा हूं। आई एम नॉट यू नो मैं डरोगेटरी टर्म में नहीं आपके सामने बात रख रहा हूं। तो, हमारे ज़हन में कांसेप्ट ये आ गया है कि जब कोई अच्छी बात होगी या कोई अच्छी चीज होगी या अच्छा काम होगा, तब ही सुभान अल्लाह कह सकते हैं। आर वी ऑल टुगेदर? सुभान अल्लाह का एस सच जो अच्छा काम हो रिलेशन इसलिए नहीं है कि आप लिमिटेड नहीं हो कि आप सिर्फ अच्छे वक्तों
में सुभान अल्लाह कहो और बाय द वे कवाली कह के तो सुभान अल्लाह वैसे भी नहीं कहना चाहिए। कवाली ना ही सुने तो बेहतर है। कोई बंदा आपके पास न्यूज़ लेके आता है कि जी मेरे पड़ोस में ना फौतगी हो गई है। एंड यू से सुभान अल्लाह यू कैन से दैट बाय द वे। सुभान अल्लाह। जब आप कह रहे होते हो, आप यह कह रहे होते हो के जो शख्स फौत हुआ है, जाहिर सी बात है वो मोटल था। उसकी बिगिनिंग थी, वो उसकी एंडिंग हो गई है। सुभान अल्लाह अल्लाह ताला पाक हैं। अल्लाह ताला
अल है। अल्लाह ताला की ना बिगिनिंग है ना एंड है। आप अल्लाह ताला को एक्सेंट करते हैं। अल्लाह ताला हर एरर से पाक हैं। तो बात ये समझ में आ गई कि अगर कोई क्लमिटी, कोई मुसीबत आती है, कोई परेशानी आती है तब भी आप सुभान अल्लाह कह सकते हैं। तो प्लीज ये ना हो कि कोई बंदा सुभान अल्लाह कहे आप मुंह बना लें कि यार तू मेरे साथ ये हो रहा है। तू सुभान अल्लाह कह रहा है। नहीं ही कैन से सुभान अल्लाह। तो सुभान अल्लाह का असल में मकसद ये होता है। आई होप
द पॉइंट इज़ क्लियर। समझ में आ गई है ना बात? अल्हम्दुलिल्लाह। सो दिस वाज दी ब्रीफ एक्सजेसिस जो हमने जो है समझना था वो मैंने आपके सामने बात रख दी है। आई थिंक वी शुड हमें ना शायद इत्तफा करना पड़ेगा सू नसर से ही। चले इंशाल्लाह सू काफिरून में हम नेक्स्ट क्लास में इंशाल्लाह बात कर लेंगे। इस्तकफार के हवाले से भी कुछ बात कर क्लियर करनी थी। लेकिन उससे पहले मैं सुभान अल्लाह के हवाले से और कुछ बातें जो है आपके साथ शेयर कर लूं कि इसकी क्या सिग्निफिकेंस है। अल्लाह के नबी जब मेराराज पे
गए ना तो उनकी मुलाकात इब्राहिम अल सलाम से हुई थी। इब्राहिम अल सलाम ने कहा था कि ए मोहम्मद सल्लल्लाह वसल्लम अपने उम्मतियों को मेरी तरफ से सलाम देना और उनको यह कहना कि जन्नत प्लेन लैंड है। जन्नत प्लेन लैंड है और उसकी जो मिट्टी है या जो उसकी लैंड है बड़ी जरखेज है। जो बंदा अपनी जन्नत को बिल्ड करना चाहता है। जितना खूबसूरत करना चाहता है, तो उसको चाहिए उतने ही सीड्स प्लांट करे। उतने ही बीज बोए। और जन्नत के जो बीज हैं सुभान अल्लाह, वल्हम्दुलिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह व अल्लाहु अकबर। जितना बंदा यह
जिक्र करता है, उतने ही वो सीड्स प्लांट करता है और उतनी ही ग्रीनरी होती है। उतनी ही उसकी जन्नत खूबसूरत होती रहती है। यू नो इट्स लाइक जस्ट फॉर द सेक ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग। कुछ गेम्स ऐसी होती है ना माइनक्राफ्ट जैसी जिसमें आप खुद अपना जो है ना बिल्ड कर रहे होते हो। दैट्स हाउ जन्ना इज। यह अब आप पर डिपेंड करता है कि आप अपनी जन्नत कितनी खूबसूरत बनाते हो। सुभान अल्लाह व अल्हम्दुलिल्लाह ला इलाहा इल्लल्लाह व अल्लाहू अकबर। द मोर यू से इट उतनी ही आपकी जन्नत खूबसूरत होती चली जाएगी। और देखें अल्लाह के
नबी कितना सीरियसली लिया करते थे कि मैंने आपको बताया ना कि जब भी आपको हुक्म दिया जाता है अमर दिया जाता है यू हैव टू डू दैट अल्लाह के नबी के बारे में आता है वो दिन में एटलीस्ट 100 दफा तस्बीह बयान करते थे सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह वही सुभान अल्लाह अज़म एटलीस्ट 100 टाइम्स जो है वो पढ़ा करते थे और अल्लाह ताला यह भी फरमाते हैं व सब रबिका कबत त शमसी कब गुरूब वसार सुजूद यानी डे एंड नाइट सुबह भी तस्बीह बयान करनी है शाम से पहले भी तस्बीह बयान करनी है रात को
भी तस्बीह बयान करनी है तो एक मुसलमान की जो जिंदगी है ना वो रिवॉल्व कर रही होती है अल्लाह ताला की तस्बीह में और अल्लाह ताला के जिक्र में और अल्लाह ताला की हमद में और देखें यू हैव टू अंडरस्टैंड ब्रदर्स हमारा दीन जो है ना आपको एनी डोट्स देता रहता है आपको हिंट्स मिलती रहती है हिंट्स क्या है बल्कि मैं तो समझता हूं कि क्लियर आपको जो है ना मैसेज दिया जाता है जब अल्लाह ताला के जब अल्लाह के नबी ने फरमाया ना ला यसान का ज़िक्र्लाह कि अपनी जुबानों को हमेशा अल्लाह के जिक्र
से तर रखा करो ऑलवेज कीप योर टंग मोइस्ट वि द रिमेंबर्स ऑफ़ अल्लाह सुभाना ताला इससे क्या होगा एक तो आपके दर्जात बुलंद होते रहेंगे आपके गुनाह मिटते रहेंगे प्लस इससे उम्मीद है कि जो दिन या जो लम्हा आपका आखिरी लम्हा होगा जब फ़रिश्ते आ रहे होंगे तो आपकी जुबान पे सुभान अल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह ला इलाहा इल्लल्लाह व्लाहु अकबर होगा व्हाट अ ब्यूटीफुल वे टू डाई तो ये तभी होगा जब आप अपनी हैबिट ऐसी बना लोगे जब आपकी हैबिट है ही नहीं ऐसी देन यू नो इट्स इट्स आई थिंक यू नो यू आर जस्ट फैंटसाइजिंग कि
बंदा अपनी मनमानी करता रहे और एंड में विश ये रखे कि जी मुझे मौत ना मस्जिद नबवी में आए और सजदे की हालत में आए। नो दिस इज़ विशफुल थिंकिंग देन। आपको अपनी जनरल रूटीन में हैबिट वैसे बनानी है। राइट? सो ये तस्बीह है और ये हुकुम सबसे पहले अल्लाह के नबी के लिए था। सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। और अल्लाह के नबी ने ये करके दिखाया। और अल्लाह के नबी ने ये जो है नमूना हमारे सामने रख दिया कि दिस इज़ व्हाट यू हैव टू डू। और असल में आशिक रसूल वही है। अल्लाह के नबी से
मोहब्बत करने वाला वही है जो अल्लाह के नबी की पैरवी करे। इत्तबा करें व्लाह रसूल और मैं आपको बताऊं वो बंदा शायद अंडरस्टैंडिंग नहीं रखता दीन की जो कहता तो है मैं अल्लाह ताला से मोहब्बत रखता हूं बट एट द सेम टाइम वो सुन्नत को फॉलो नहीं करता वो अल्लाह के नबी की पैरवी नहीं करता इसका प्रूफ क्या है ये आयत पॉइंट ऑफ़ रेफरेंस है कुल इन कुब्लाह फनी्लाह अल्लाहू अकबर आप तसवुर करें कि अल्लाह ताला ने अपनी मोहब्बत को एक कंडीशन में जो है कैद कर दिया है। मीनिंग कि इफ यू फॉलो माय प्रॉफिट
ओनली देन आई लव यू। यू हैव नो अदर ऑप्शन। कुल इन तब्ल्लाह फब्ला ए नबी इनसे कह दीजिए कि अगर तुम वाकई अल्लाह से मोहब्बत करते हो फिर तुम्हें मेरी पैरवी करनी होगी। मुझे फॉलो करना होगा। अगर तुम ऐसा करोगे तब अल्लाह ताला तुमसे मोहब्बत करेंगे। सिर्फ मोहब्बत नहीं करेंगे। तुम्हारे गुनाहों को माफ़ कर देंगे, बख्श देंगे। अल्लाहू अकबर। व्हाट अ ब्यूटीफुल डील। और वो बंदा महरूम है जो इस डील को अवेल नहीं करता। राइट? सो तस्बीह और हम ये अपनी जिंदगी में हम लेके आए। एंड देन यू नो द लास्ट वर्ड वस्तफिरहु इस्तकफार करें।
क्वेश्चन बंदा इस्तकफार कब करता है? जब गुनाह करता है। राइट? ऐ अल्लाह मुझे बखश दे। ऐ अल्लाह मुझे माफ़ कर दे। जैसा कि हम जानते हैं कि इस आयत के सबसे पहले मुखातब रिसिपिएंट कौन है? अल्लाह के नबी हैं। रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के कितने गुनाह थे? ही वास सिलेलेस उनके कोई गुनाह नहीं थे। देन व्हाई इज ही सेइंग अस्तकफिरुल्लाह। वह क्यों अपनी नमाजों में कह रहे हैं सुभान अल्लाह वम्दिक सुभान अल्लाह हु्मा रब्ब अल्लाह मफिर ली दिस इज़ अ गुड पॉइंट के ही वांटेड अस टू नो एंड ही वांटेड टू टीच अस के मैं
इस्तकफार कर रहा हूं मुझे देख के फॉलो करो राइट मुझे फॉलो करो ओके दिस इज़ वन ऑफ़ द पॉइंट लेकिन इसका एक और पॉइंट भी है। सर उस नहीं होता कि मतलब कोई भी बंदा अपने आल पे नहीं जाता। सिर्फ अल्लाह के मर्जी भेज जाते हैं। बारक अल्लाह फीक ब्यूटीफुल। दिस वाज़ द नेरेस्ट आंसर आई वाज़ लुकिंग। करीब-करीब आंसर यही है। अब देखिए दिस इज़ आल्सो अ न्यू पर्सेक्टिव। इंशा्लाह फॉर यू। इस्तकफार जरूरी नहीं है कि बंदे ने गुनाह किए हो। इस्तकफार इसलिए बंदा नहीं करता। जरूरी नहीं है, लाजिम नहीं है कि बंदा गुनाहगार है।
इस्तकफार बंदा इसलिए भी करता है व्हेन द पर्सन थिंक्स कि आई हैव बीन ब्लेस्ड विद एंडलेस ब्लेसिंग्स कि अल्लाह ताला की इतनी ब्लेसिंग्स है मेरे ऊपर। रहमतों की बारिश हैं। मैं सारी जिंदगी इबादत करता भी रहूं। तब भी मैं अल्लाह ताला की इबादत का हक अदा नहीं कर सकता। आई एम वीक। बंदा झुक जाता है। इसीलिए फरिश्ते यह कहा करते थे जब अल्लाह ताला फरिश्तों को दोबारा जिंदा करेंगे ना कयामत के दिन यह वो फरिश्ते हैं जिनका एक ही टास्क है। जब से इनको पैदा किया गया और जब तक यह जिंदा रहे इनको हुक्म यह
दिया गया था कि आपने सजदा करना है बस नो अदर टास्क। और जब इनको दोबारा जिंदा किया जाएगा यू नो द फर्स्ट स्टेटमेंट दे वुड अर वुड बी सुभान का या रब मादना का ह इबादत ऐ अल्लाह आप पाक हैं वही ऐ अल्लाह आपके अंदर कोई एरर नहीं है सुभान का या रब हमने आपकी इबादत का हक अदा नहीं किया और ना ही हम कर सकते हैं वी आर वेरी वीक हम बहुत कमजोर हैं इसीलिए हमारे नबी भी इस्तकफार किया करते थे कि इंसान जितनी मर्जी मर्जी कोशिश कर ले। इंसान कभी भी अपने रब का
देन नहीं दे सकता। हक नहीं अदा कर सकता। तो अल्लाह ताला का शुक्र अदा किया करें। इस्तकफार किया करें। तो यह जो है एक मकसद है इस्तकफार का और अस्तकफिरुल्लाह। तो वैसे भी हमें जो है अल्लाह के नबी ने फरमाया के आफ्टर एव्री सलाह हर नमाज़ के बाद एटलीस्ट थ्री टाइम्स आपने अस्तकफिरुल्लाह पढ़ना है। यानी एक दफा अल्लाहू अकबर देन अस्तकफिल्लाह अस्तफिल्लाह अस्तकफिल्लाह अल्लाह सलाम का सलाम वो जो नमाज़ के बाद के अकार हैं। तो ये इंशा्लाह जो है हमने ये करना है। तो विथ दिस वी विल एंड अप। आज अपनी क्लास को वाइंड अप
करते हैं विथ दिस नोट कि देखिए हमने अल्हम्दुलिल्लाह आज यह सूरत पढ़ ली है। सो वी हैव टू ब्रिंग दिस दीन इन प्रैक्टिकिटी। तो इंशा्लाह हम भी अपनी नमाजों में अपने रुकू में सुजूद में सुभान अल्लाह रबना अल्लाह ले आए। सुभान रब सलाम रब आलम।