एक आलिम-ए-दिन जब एक शहर से गुजरा तो वहां उसने एक अजीब मंजर देखा जिसने आलिम साहब को हैरत में डाल दिया। उसने देखा कि एक लोहार जलती भट्टी में से सुर्ख गर्म लोहा चिमटे के बजाय अपने नंगे हाथों से निकाल कर उसे हथौड़े मार रहा है और उसके हाथ जरा बराबर भी नहीं जल रहे। आलिम हैरान होकर उसकी दुकान में गया और पूछने लगा। ऐ खुदा के बंदे यह कैसा कमाल है तू कोई जादूगर है या अल्लाह का वली जो तुझे आग जला नहीं रही? लोहार ने एक ठंडी आह भरी और अपने माजी का वह
दर्दनाक वाकया सुनाने लगा कि मैं कोई वली नहीं बल्कि एक इंतहाई गुनहगार शख्स था। बरसों पहले मेरे पड़ोस में एक बेहद खूबसूरत हसीन और पाक दामन बेवा औरत रहती थी जिसके छोटे-छोटे यतीम बच्चे थे। मैं उस औरत पर बुरी नजर रखता था। उसे अपने पास आने की दावत देता था। लेकिन वो मुझे हमेशा धुत्कार देती थी। फिर एक साल शहर में बहुत ज्यादा क़्त साली पड़ गया। लोग भूख से मरने लगे। एक रात वह औरत मेरे दरवाजे पर आई और रोकर बोली मेरे बच्चे भूखे हैं। उन्होंने तीन दिन से कुछ नहीं खाया। खुदा के वास्ते
मेरी मदद करें। मुझे थोड़ा सा अनाज दे दें ताकि मेरे बच्चों की भूख मिट सके। मुझे उस रात मौका मिल गया। मैंने उसकी मजबूरी का फायदा उठाना चाहा। मैंने कहा, "अनाज तुम्हें दे दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त तुम्हें माननी पड़ेगी।" वह घबरा कर दो कदम पीछे हट गई और बोली, क्या शर्त मैंने अपनी शर्त बताई? तुम्हें आज रात खुद को मेरे हवाले करना पड़ेगा। औरत यह सुनकर कांप उठी और रोती हुई वापस चली गई। दो दिन और गुजर गए। तीसरे दिन वह फिर मेरे दरवाजे पर आई। उसकी हालत पागलों जैसी थी। उसने रोते हुए कहा,
"मेरे बच्चे मर रहे हैं। मैं तेरी शर्त मानने को तैयार हूं। बस मुझे खाना दे दे।" लोहार आलिम को बताने लगा। मैं उसे कमरे में ले गया और दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया। फिर जैसे ही उसके करीब जाकर बैठा, तो मैंने देखा कि उसका पूरा जिस्म कांप रहा था। वह आसमान की तरफ देखकर रो रही थी। मैंने पूछा, अब क्यों कांप रही हो? दरवाजा तो लॉक है। हमें यहां कोई नहीं देख रहा। फिर उसने जो जवाब दिया ना, उस जवाब ने मुझे हिला कर रख दिया। वह आसमान की तरफ हाथ की उंगली उठाकर बोली,
"घर का दरवाजा बंद करके लोगों की नजरों से तो छुप गए। लेकिन जो ऊपर आसमानों पर बैठा देख रहा है, उसकी आंखें कैसे बंद करोगे? वो हमें देख रहा है। उसके इस जुमले ने मेरे अंदर के इंसान को जगा दिया। खुदा के खौफ से मेरा पूरा जिस्म कांपने लगा। मैं फौरन पीछे हट गया और दौड़कर घर में जितना भी अनाज पड़ा था, सारा लाकर उसके आगे रखा और रोकर कहा, "मुझे माफ कर दे। तूने मुझे जहन्नुम की आग से बचा लिया। यह अनाज ले जा। जाकर अपने बच्चों को खिला।" फिर उस औरत ने अपना दुपट्टा
आसमान की तरफ उठाया और रोकर दुआ करने लगी। या अल्लाह जिस तरह इस शख्स ने आज मेरी भूख की आग बुझाई है और मेरी इज्जत को खाक में मिलने से बचाया है। तू आज के बाद इस पर दुनिया और आखिरत की आग को हराम कर दे। लोहार ने मुस्कुराकर आलिम से कहा, "यह उस बेवा, मां और एक सच्ची औरत की दुआ का असर है कि उस दिन के बाद दुनिया की कोई आग मेरे जिस्म को नहीं जला पाई।" सबक अल्लाह का खौफ। जब इंसान तन्हाई में गुनाह करने की ताकत रखता हो और सिर्फ अल्लाह के
खौफ से उस गुनाह को छोड़ दे तो अल्लाह उसे ऐसा इनाम देता है जो दुनिया की अकल से बाहर होता है। मदद और दुआ किसी मजबूर की मजबूरी का फायदा उठाने के बजाय अगर उसकी मदद की जाए तो वह दुआ तकदीर बदल देती