कि इस्लाम टो हिम अस्सलाम वालेकुम वेलकम टू क्विक रिव्यू और विकृतियों के अंदर आज जो है हमारा जो टॉपिक है वह इन 25 हिस्ट्री का है और हमारा जो और टॉपिक है वह मॉडर्न हिस्ट्री 872 1947 आज हम जो है वह बात करने लगे हैं जो इवेंट्स इंपोर्टेंट पॉइंट 1957 से लेकर 1947 तक दैनिक एक साल के अंदर तकरीबन जो है जितने भी इंपोर्टेंट दिवस है यह सारे के सारे जो आपको सामने दिखाई दे रहे हैं ठीक है इन सबको हम जो है वह वीकली डिस्कस करते चले जाएंगे तो आज का जो लगे यह सबसे
इंपोर्टेंट तो यह जो है वह एक लौंग लेकर होगा यह किसकी डेकोरेशन है वह ऑलमोस्ट कोई दो से तीन घंटे की हो सकती है ठीक है तो इसलिए आपने जो है वह है कोशिश करनी है कि वन सेटिंग नहीं थे सुनने आपको यह ज्यादा फायदा देगा और दूसरा आपने अपना फोकस बना कर रखना है और तीसरा साथ में आपने नोट्स जो है वह बनाते जाना है तो चलिए अब स्टार्ट करते हैं टॉपिक्स को जो है और पिछली जो है में का रिव्यु लेते हैं 1512 को सबसे पहले हमारे पास जो आता है जीत वॉर ऑफ
इंडिपेंडेंस 1857 जंगे आजादी से हम 60 करने लगे हैं और सबसे पहले बात करेंगे जंग-ए-आजादी के ऊपर तो सबसे पहले करवाती जंग-ए-आजादी की तरफ और इंडिपेंडेंस है क्या तो देखिए मुसलमानों ने ठीक है और हिंदुओं ने जो है वह एक मुश्तरका वॉर लड़ी अंग्रेजों के खिलाफ योनि ब्रिटिश राज के खिलाफ वह ब्रिटिश हां जी हम उत्तर का वर्ड है उसको दबाओ और इंडिपेंडेंस का नाम दिया गया जंगे आजादी का नाम दिया गया इसके जो दूसरा नाम है इसको रिवॉर्ड के नाम से भी याद किया जाता है क्योंकि अंग्रेज से रिवॉर्ड या अगर जो है वह
कहते हैं क्योंकि अंग्रेजों की हुकूमत तो जब अंग्रेजों की हुकूमत तो हकूमत के खिलाफ क्योंकि यह हुआ तो इसका मतलब उन्होंने कहा यह बगावत है वह यह रिपोर्ट है लेकिन मुसलमानों और हिंदुओं ने जो है इसे किसका नाम भेजी आजादी का के वहीं वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस कि हमने अपनी आजादी के लिए लड़ी है जो कि एक छोटे पैमाने पर लड़ी गई अगर बात करें इसके कोशिश की कि वह इंडिपेंडेंस क्यों हुए तो इस पहले हम इसका बैकग्राउंड देखे तो हम जानते हैं कि 1622 के अंदर जो है वह जो गोरे हैं यह अंग्रेजों व हिंदुस्तान
के अंदर आते हैं और ताहिर बनकर आते हैं और ताजा बनकर आते हैं और आहिस्ता-आहिस्ता 12 सालों के अंदर यह केसेस तक जो है वह पूरे के पूरे हिंदुस्तान के ऊपर जो है वह कब्जा हो जाता उनका ऐसे में जो है फिर इन दोस्तों सालों के दौरान ठीक है दोस्तों सालों के दौरान दिव्य क्योंकि डिस्ट्रेक्शन जो है पूरे का पूरा कंट्रोल वह ऑलमोस्ट एवरी पर्सन इंडिया का जो है वह उनके पास रहता अंग्रेजों के पास उनकी पॉलिसीज होती है तो उन पॉलिश इसके नतीजे के तौर पर यह पॉइंट होता है जंगे आजादी होती है ठीक
है अब इसमें अगर हम मेजर कॉज की बात करें कि कुजूर हाथ जो है वह क्या थी तो उसमें सबसे पहले एडमिनिस्ट्रेटिव को आस्था की एडमिनिस्ट्रेटिवली क्योंकि सारी एडमिनिस्ट्रेशन एडमिनिस्ट्रेशन जो है वह अंग्रेजों की थी तो जब सारी एडमिशन अंग्रेजों की थी तो इसका मतलब आठ परसेंट कंट्रोल जो है वह सारा अंग्रेजों के पास और 20% जो कंट्रोल था व हिंदुस्तानियों के पास था अब अंदाजा करें कि में का मुल्क है उनके पास 20% एडमिनिस्ट्रेशन है और जो बाहर से आगे कब्जा कर रहे हैं उनके पास एटी परसेंट एडमिनिस्ट्रेशन तो ऐसे में दो सालों के
दौरान फिल्म की ऐसी पॉलिसी ज़हींढ जिनकी वजह से ही तंग हुए हिंदुस्तानी सोशल और रिलीजस पॉलिसीज उसकी ऐसी थी कि जो कि हिंदुस्तानियों के लिए बर्दाश्त करना बहुत ज्यादा मुश्किल हो रहा था वक्त के साथ-साथ ठीक है क्योंकि स्टार्ट में तो बर्दाश्त करें लेकिन वक्त के साथ साथ बहुत मुश्किल था जैसे के सिखों को या हिंदुओं को जो है वह एक ही साथ बिठाकर मुसलमानों को भी साथ फौज में भर्ती किया जाता एक साथ जोडने खाना खिलाया जाता अच्छा एक जैसों से ट्रीट किया जाता छोटी जाति के हिंदुओं को एक साथ देखा जाता बड़ी जाति
हिंदुओं के साथ सिखों की गाड़ियां जोन घोषित करवाई जाती है फिर एक लंबी लिस्ट आती है इन इनके मजहब को वह खराब किया जाता इसी तरह सोशल चेंजेस के अंदर सोसाइटी के अंदर क्योंकि बड़े जो थे वह तो अंग्रेज ही थे क्योंकि वह कमरा इन थे तो अब इसलिए जो है फिर सोसायटी के अंदर जो है ग्रेट जॉब डन इन थे जो इंडियन जो थे वह खुद गुलाम हो गए तो वह लक्ष्मी की जिंदगी गुजारने पर मजबूर ब्लुटूथ एक आर्मी की बात करें तो जो आर मीणा आर्मी में 80परसेंट जो है यह आयरलैंड जितने भी
थे वह सारे के सारे अंग्रेजों के पास से जबकि जो सिपाही थे जरूर एंड जो थे वह सारे के सारे indians के पास थे कौन एक नौमी की बात करेंगे इकोनॉमिकली जो है किस तरह उन्होंने ट्वीट किया तो उन्होंने क्या किया जो बड़े-बड़े जो है वह टेक्स्ट है आयत कर दिए जमीनों के ऊपर इन एक किसान के एग्जांपल लें और एक किसान जो है वह स्पोर्ट्स अगर उसकी 10 बोरी जो है वह इसकी पैदावार होती है धमकी या किसी भी चीज की तो उसमें से यह इतना ज्यादा अट्रैक्ट होता कि 767 बोरी जो है वह
टैक्स के तौर पर इसको पे करनी पड़ती अब जब 6 साथ कोई टैक्स के तौर पर बेकार है तो अपने लिए क्या यूज़ करेगा और ऊपर से उनकी इकोनामिक पॉलिसीज इस तरह की ठीक है और खास करके अब उससे पहले इकोनामिक पॉलिसीज यह थी कि देखें हिंदुस्तान जो था उसको सोने की चिड़िया कहा जाता था कि सोने की चिड़िया है यह इतना ज्यादा यूनिक उस टाइम पर जीडीपी था तो हिंदुस्तान एक्सपोर्ट किया करता था एक्सपोर्ट करता है कि जब यह आयोग ने ऐसी पॉलिसीज अडॉप्टेड हिंदुस्तान सपोर्ट करने के बजाय इंपोर्ट करना स्टार्ट हो गया और
वह भी कहां से योग्य नहीं कि जो कुरान थी उन्हें केवल को से इस तरह की पॉलिसी के यहां से यह रॉ मेटेरियल जो है वह लेकर जाते अब रो मटेरियल का क्या कॉस्ट हो सकता है ऐसे ही है वह तो बहुत ही लो कॉस्ट है तो अगर 1 रुपए में रॉ मटीरियल जैसे कॉटन है ठीक है कॉटन लेकर जा रहे हैं ₹1 में तो एक हफ्ते में को टर्न लेकर जाकर उसी से वह कपड़ा बना कि ठीक और कपड़ा बनाकर यह धागे वगैरह बनाकर जब आप इससे भी तहत तो यहां पर वह rs.20 बेचते
हैं इसका मतलब 19 उसमें उस तरह से कमा रहे हैं तो इस तरह की पॉलिसी जो है नहीं तो जब यह पॉलिसीज विनोद साल तक ऑलमोस्ट रही तो उसके नतीजे के तौर पर फिर यह फैसला किया फौज के अंदर कुछ लोगों ने मिलकर कि भई अब जो है हमें अंग्रेजों के खिलाफ खड़े होना है और उन्होंने क्या किया एग्जाम लड़ी और जो जानना काम होगी लेकिन इस जंग में जो है वह एक नया रास्ता जरूर दिखाया अब यहां पर आपको एक बात समझ नहीं है कि जो 1615 आई थी वह क्या थी जी कि ईस्ट
इंडिया कंपनी थी और अभी तक जो रूल था यह 1957 तक कि जो हुकूमत चल रही थी 2 साल और कि वह इस इंडिया कंपनी की चल रही थी जो कंपनी के नाम के ऊपर ब्रिटिश राज था लेकिन फिर क्या हुआ कि जब इसका रिजल्ट हुआ अफेयर तो हुआ यह वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस है वह फेल हो गई मुसलमान और हिंदुओं के लिए ठीक है और अंग्रेज में कामयाब होंगे तो अब फैलियर हुआ तो सीरियल के बाद लेकिन फिर भी क्या हुआ कि हिंदुस्तानियों को से फायदा हुआ अब हिंदुस्तानियों को कैसे फायदा हुआ कि ईस्ट इंडिया
कंपनी को इतना ज्यादा नुकसान हो गया इस वर्ष इंडिपेंडेंस के नतीजे के तौर पर के वह खत्म हो गई यहां पर और यह जो कंट्रोल था ठीक है जो कि जो कंट्रोल पूरे का पूरा जो है वह इस इंडिया कंपनी से जो है वह ताजे बर्तानिया कुचला गया यानी कि ब्रिटिश क्राउन को जो है वह सारे के सारे इंडियन कंट्रोल चला गया 858 के एक्ट के तहत ठीक है इस तरह से यह के नुकसान भी हुआ लेकिन फायदा भी हुआ है उसके बाद कुछ ना कुछ राइट्स टो है हिंदुस्तानियों को आटे में नमक के बराबर
ही कह लें लेकिन मिलना स्टार्ट क्विक ठीक है अच्छा अगर बात करें कॉसेस ऑफ़ क्लियर कि फेल होने की नाकाम होने की ओर अपनी बरस की क्या वह उपाधि तो उसमें सबसे पहले लिपिका की अब देखिए और पिंड उसके अंदर आपको कोई भी जो बड़ा लीडर नजर नहीं आएगा तीन-चार मिनट मौजूद थे लेकिन इसके बावजूद वह हर कोई अपना अपना अपनी-अपनी टेरिटरी के अंदर जो है वह सेपरेट लूट रहे थे रिसोर्सेस की कमी थी अब क्यों के इंडियन सारी बातें गुलाम थे तो गुलामों के पास तो पहले कुछ नहीं था वह धार्मिक ज़िंदगी गुज़ारते हैं
वैसे उनके पास रिसोर्सेस नहीं थे एजुकेशन नहीं थी उनके मुकाबले के तौर पर स्ट्रैटेजी नहीं थी कोई वॉइस रेडी है कि किस तरह से इस वर्ग को लड़ना है और किस तरह से आगे बिल पे करना है और सबसे इंपोर्टेंट चीज पर जो है उससे रिसोर्सेस ही आती है कि रिसोर्स इसका जो लेग है यहां पर जो है इंडियंस ने मार खाई और नतीजे के तौर पर जो है वह अंग्रेज जो है वह दुश्मन हो गए हिंदुस्तान क्योंकि उन्होंने कहा कि अब हम जो है वह बदला लेंगे हिंदुस्तान उसे यह जो भी इन्होंने क्या वॉर
ऑफ इंडिपेंडेंस के अंदर और अगर बात करें इसके इंपैक्ट की तो इसका जो सबसे खतरनाक इंपैक्ट था वह आया मुसलमानों के ऊपर और हिंदुओं के ऊपर जो है इसका इंपैक्ट बहुत कम रहा क्योंकि हिंदुओं को अंग्रेजों ने अपने साथ मिला लिया डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी के तहत और मुसलमानों को जो है हर चीज से जुदा कर दी और मुसलमानों के लिए हिंदुस्तान के अंदर रहना बहुत ज्यादा मुश्किल कर दिया तो ऐसे मुसलमानों के लिए चैलेंज बना यह वर आफ इंडिपेंडेंस आगे बढ़ते हैं सेकेंड टॉपिक के ऊपर का सेवन टॉकिंग कि अगर बात करें तो
सबसे इंपोर्टेंट चीज अप क्या है कि अब देखिए अब क्योंकि सारे का सारा जो वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस का मलबा है वह या मुसलमानों के ऊपर के वही मुसलमान जो है वह रिस्पांसिबल है अब क्यों कहा मुसलमान इस पॉसिबल हैं इसलिए कि मुसलमान यहां पर 80 सालों से हुकूमत कर रहे थे और अंग्रेजों ने हुकूमत दिल्ली भी मुसलमान होते ही मुगलों से हुकूमत ली थी इसलिए उन्होंने मुसलमानों को ही जो है इसका गुरुदेव नाम ठहराया तो ऐसे में जो मुसलमानों को उद्दाम ठहराया तू नतीजे के तौर पर मुसलमानों के लिए जो है इंडिया के अंदर है
ना बहुत ज्यादा मुश्किल हो गया और उनके लिए सब्सक्राइब करना बहुत मुश्किल होगा क्योंकि उनके ऊपर पाबंदियां लगी एक नॉर्मली यह ऊपर पाबंदियां लगी सोशली रिलिजियसली हर तरह से उनके लिए बहुत ज्यादा मुश्किल हो गया तो ऐसे में जो है पर इससे यह रहमत खान जो है जो के उस टाइम पर वॉर के दौरान जो है उन्होंने अंग्रेजों की मदद भी की और अंग्रेजों की सर्विस में भी थे यानी कि उसकी जॉब करते थे उनके हुकूमत में थे तो ऐसे में अंग्रेज ने बड़ी कद्र की निगाहों से देखते थे तो उन्होंने क्या किया अलीगढ़ मूवमेंट
की या फिर मुसलमानों की बेहतरी के लिए भलाई के लिए सामने आए और एक मुमेंट कि जैसे अलीगढ़ मूवमेंट के सदस्य की सर्विस कहते हैं तो उसमें सबसे पहले अगर बात करें नसीहत की सर्विस की तो सर सैयद का जो कि पॉइंट था जो सबसे इंपोर्टेंट पॉइंट था कि सबसे इंपोर्टेंट की चीज ऊपर से की सर्विस खड़ी थी वह वेस्टर्न एजुकेशन के ऊपर खड़ी थी इन्हीं मगर भी तालीम जो थी सर सैयद इसको हर मसले का हल समझते थे सैयद के खयाल में अगर मुसलमान तरक्की कर सकते हैं ठीक है और अंग्रेजों के साथ मिलकर
आगे चल सकते हैं तो उनके पास एक ही जगह रास्ता है और वह क्या है वेस्टर्न एजुकेशन के वहीं जब यह मगर भी तालीम हासिल करेंगे अंग्रेजी बोलेंगे फर फर या उनकी तरह की इंग्लिश टू एजुकेशन के पास होगी तब यह सर्व कर सकते हैं तो इसलिए उनकी जितने भी सर्विस सर्विस यह सारी की सारी इसी के युद्ध में घूमती नजर आती है इस वजह से ऊपर जो है वह कुफ्र के फतवे भी लगे कि 22% का फिर हैं और बल्ला बल्ला बल्ला बहुत कुछ कहा कि उनके ऊपर अभी भी दरारें भेजो कि कुछ लोग
सर सीरियल को हीरो मानते हैं और कुछ चौहान की वजह से मानते हैं कि हम जो है वह मस्जिद शिकार हुए अंग्रेजों का तो सर्विस की बात करें तो इसकी सर्विस को चार जो है वह क्वेश्चंस के अंदर तक सीमित किया जा सकता है एजुकेशनल सर्विस के अंदर इनकी रिलेटेड सर्विसेज सोशल सर्विस और क्वालिटी का सर्विस सबसे पहले अगर बात करते हैं जो क्वेश्चन सर्विस की भी काली मिर्च फिर दिमाग जो है वह शरीयत की क्या रही तो देखिए ताली में सिर्फ के अंदर सबसे पहले उन्होंने क्या किया जी मुरादाबाद के अंदर 80 के अंदर
एक स्कूल का आगाज़ किया जहां यहीं की पोस्टिंग गई वहां यह काम करते रिग्रेशन पर ऊपर उसके बाद वह जयपुर के अंदर 1963 के अंदर स्कूल का कि हम किया उसके बाद साइंटिफिक सोसाइटी जो है वह 36 के अंदर ही जो है उसका केम टो साइंटिफिक सोसाइटी का मार्क परपस क्या था जी जो इंग्लिश बुक्स है ठीक है जी यह इंग्लिश जितना भी लिटरेचर है अच्छी सी बुक उनको ट्रांसलेट करना उर्दू के अंदर है ms word स्कूल का काम किया 1875 के अंदर यही 2 साल के बाद कॉलेज बना 80 के अंदर मडो एंग्लो ओरिएंटल
स्कूल या कॉलेज और इसका अगर आप नाम देखें मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज मोहम्मडन मतलब मतलब था कि इस्लामी ठीक है जी इस्लामिक और डेंगू से हमराज अगर हम लें तो एंग्लो का मतलब है इंग्लिश और स्कूल और इंटर से मुराद मछली की ठीक है यह ऐसा ही नजारा था जिसको उन्होंने अपनी तरफ ऐसा नाम देने की कोशिश की कि यह कैसा है धारा है जो के इंग्लिश तालीम देगा मशरिक के अंदर क्योंकि इंडिया मछली में है और साथ में इस्लामिक एजुकेशन जो है देगा उनके अकॉर्डिंग यह प्रस्ताव जो बाद में कॉलेज बना ठीक है और
इस तरह से मोहम्मडन एजुकेशनल कांफ्रेंस का काम भी 86 में अमल में लाया गया जिसका पर यह था कि वो स्टडी करेगी इस एजुकेशन सिस्टम को यह सारे के सारे इंडियन एजुकेशन मुसलमानों के बीच में सिस्टम को और प्रपोस करेगी कि भाई मस्जिद जो है वह क्या काम किया जाए जो क्वेश्चन कि मुसलमानों के लिए सेकंड पर बात करते हैं जी सोशल और रिलीज सर्विस की योनि के मोईसचर थी और मजहबी जो है इनकी सर्विस रही है वह क्या रही है तो उसमें सबसे पहले खुद अहमदी 869 अंदर जो है इन्होंने यह लिखी इनपुट बाद
में वे दिया क्या है कि 869 अंदर सैयद अपने बेटे महमूद के साथ जो है वह यूके गए थे और वहां पर जो है एक बंदे ने बुक्स लिखी हुई थी और उसमें रबी फसलों की शान में गुस्ताखी की गई थी तो इन्होंने अपनी असलम के लास्ट के ऊपर एस्से जो है वह लेकर खुद अहमदिया के और नवीन असलम की शान बयान कि उनके अंदर उनके अगेंस्ट मजबूत के बीच में इसी तरह से तब्दील कलाम जो है इन्होंने बाइबिल जो है उसका एक लॉटफी के अंदर जो है वह एक तस्वीर लिखी फिलॉस्फिकल में बाइबल की
ठीक है इसके अलावा यह काम पहले किताब जो है न लिखा के भाई आप जो है वह ले किताब यह नीचे जो इस लड़ाई में अंग्रेजों ने उन की बात की गई थी अंग्रेजों के साथ आप खाना पीना खा सकते हैं वह जायज है गुरु पर बात की गई यह पोजीशन कि यह थी कि किसी तरह से अंग्रेजों ठीक है यह जो अंग्रेज ने हुक्मरान है अंग्रेजों और मुसलमानों के बीच में जो है वह नफरतों को कम किया जा सके किसी भी तरह से तो बहुत से लोग इनको माने भी लगे थे और बहुत से
लोग जो थे जो हॉटस्पॉट ऑफ से उन्होंने को पर जाम लगा होने का फिर का नाम भी दिया लगा दिया अच्छा तहजीब यह लाख जो है इसी तरह से इन्होंने जारी किया एक हिस्सा लिया था और यह रिसाला जो है इसका परपस क्या था कि मुसलमानों के खिलाफ को बेहतर किया जाए और एक्चुअली में इसके अंदर जो है वह मजा मी होते इंग्लिश एजुकेशन के ऊपर केवल आपको हासिल करें और अंजू मैंने उर्दू का कयाम अमल में लाया जिसका पर्पस उर्दू की तरक्की था ठीक है है उसका बात करते हैं जी पॉलिटिकल सर्विस की कि
सर सैयद की जो पॉलिटिकल सर्विसेज है वह किस तरह की रही तो क्वालिटी का सर्विस में सबसे पहले जी एवं सुरक्षा के इससे जितने भी मुस्लिम ब्रिटिश कंप्रोमाइज के ऊपर काम किया के भाई सबसे इंपोर्टेंट का जो काम था वह अंग्रेजों और मुसलमानों के बीच में दोस्ती पैदा करना था और वह जो नफरत पैदा हो गई थी अंग्रेजों की क्योंकि अंग्रेज वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस का जिम्मेदार जो है वह समझते थे मुसलमानों को तो इस वजह से यह चाहते थे यह सर्च यह चाहते थे इसी तरह से अंग्रेजों के दिल से यह जो दुश्मनी है यह
खत्म करके दोस्ती जो है वह इनके दिल में लाइजर मुसलमानों के लिए तो इन्होंने क्या किया जी इन्होंने कॉसेस ऑफ़ इंडियन रिवॉर्ड से पंपलेट लिखा अब बगावत हिंदी नीचे उर्दू में भी लिखा और इंग्लिश में भी लिखा और बताया कि भाई जो कॉसेस है वह क्या चार्जेस है कि उसमें सबसे इंपोर्टेंट रोल पर किया ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन ने प्ले किया कि मुसलमानों ने हिंदुओं ने एक रिकार्ड किया तो उसका नतीजा कि वह क्यों किया क्योंकि उनकी पॉलिसी जैसी ये बताने की कोशिश की कि गलती जो है वह सिर्फ उस यह हिंदुओं की नहीं बल्कि के मुझसे
गलती हुई है वह अंग्रेजों की बेटी इसी तरह इस बार भी को पावर ही लिखा उर्दू के अंदर यह देखिए अब क्या जूही बगावत की लाल बटन शॉप इंडिया लिखा उसमें बताया कि भई यह जो मुसलमान है यह मुसलमान कितने वफादार रही अंग्रेजों आप से अंग्रेजों को बताने की कोशिश की कि भई आप भी उनके साथ दुश्मनी कर रहे हो लेकिन यह आपके फादर भी किसी टाइम पर रहे हैं अच्छा इंटरप्रिटेशन आफ वर्ण सारा यह नजारा इक्वल है जिसको बोला मुसलमान बोलते थे तो लड़का भी नफरत से नहीं बोलते बल्कि न सारा जो है वह
इस्लाम के नाम की तस्करी करते हैं तो आप इसको बुरा न माने तो मतलब इस तरह से ज्वाइन की कोशिश ही पूरी कर ली है किसी तरह से मुसलमानों को दोबारा से जो है वह सियासत के अंदर लाया जाए या फिर सियासी तौर पर थोड़ा सा उनको दोबारा से बहाल किया जाए उनके पांव ऊपर खड़ा किया जाए तो यह कुछ सहित की सर्विस रही या अलीगढ़ मूवमेंट के नाम से कुछ सर्विस रही है और यह इसके बाद आगे बढ़ते हैं जी हां है नेक्स्ट पर हमारे पास आता है जी दारुल उलूम देवबंद दारलूम देवबंद क्या
है जी के देवबंद के अंदर जो है वह बंदूक छोटा सा इलाका है ठीक है छोटा-सा गांव आप इसे कहते हैं या कछुआ कह लें इस गांव या कस्बे के अंदर इंडिया के अंदर एक जो बुध नाम की एक मस्जिद जो है वहां पर यह इस्टैबलिश्ड किया गया यह देखिए एक ऐसा सिस्टम रखा गया इस्लाम के हिसाब से यह रिकॉर्डिंग टू यह के फीका जो है जो वंशिका जिसको हम मानते हैं कि आज जो बहुत बड़ा म बना हुआ है तो उनकी यह मेल्ट हो जिसका परपस तक मुसलमानों को दोबारा से जो है वह दीन
के करीब लाना असल प्रभाव था उसका यह था यह कि इस्लामिक एजुकेशन देना इसका प्रस्ताव तो यह दारुल उलूम देवबंद जो है 18 के अंदर जो है वह इसका कयाम अमल में लाया गए सामने आपको यहां पर इसकी पिक्चर भी दिखाई दे रही है तो इसका बैकग्राउंड क्या था किस के बैकग्राउंड में सबसे इंपोर्टेंट जो था वह अलीगढ़ मूवमेंट थी यह सर सैयद की सर्विस टीम अब क्योंकि सर सैयद जो है यह अलीगढ़ जॉब कंपलीटली का तथा इंग्लिश एजुकेशन के ऊपर आपने यहां पर इस बात को समझना है कि सर सैयद के सारी कोशिश इंग्लिश
एजुकेशन के ऊपर थी अलीगढ़ के प्लेटफार्म से तो ऐसे में जो ऑर्थोडॉक्स मुसलमान थे जो कटर मुसलमान थे ठीक है उन्होंने क्या देखा कि अगर मुसलमान जो है वह सारे के सारे इंग्लिश एजुकेशन लेंगे तो उसका नतीजा क्या होगा कि मुसलमान तो अपने दिन को भूल जाएंगे तो ऐसे में और सारे के सारे मुसलमान चले जाएंगे सर सैयद की तरफ तो ऐसे हमें कैसे इदारे का काम करना चाहिए जो मुसलमानों को तालीम भी देती है और साथ-साथ इस्लाम भी सिखा यह दिन भी सिखाए तो इसलिए उन्होंने जो है सर सैयद के मुकाबले में ही अलीगढ़
के मुकाबले में जो है सिधारे को काम किया 14th अप्रैल 86 को है उसका गया अमल में आया कहां पर जी यूपी के एक छोटा सा इलाका है सहारनपुर वहां पर जो इस कस्बे के अंदर जो है एक छोटी सी मस्जिद में इसकी बुनियाद रखी फिर भला किसे लगी हाजी मोहम्मद आबिद हुसैन साहब ने रखिए और इनकी हिफाजत के बाद 867 के अंदर मौलाना क़ासिम नानौतवी साहब जो है अपने अनुसार जुए इनकी वजह से बहुत नाम फैला तो उन्होंने काफी ज्यादा पर काम किया उसको आगे लेकर गीत तो इसकी जो मक़ासिद थे वह विकसित किया
थे एक तो एजुकेशन का मकसद था कि वह इस्लामिक एजुकेशन दी जाए साथ में जो है वेस्टर्न एजुकेशन भी वीजा यह साइंस की जो क्वेश्चन है वह साइंस के क्वेश्चन विजय इसके ऊपर सैयद बहुत ज्यादा जोर रखा हुआ था और दूसरा पॉलिटिकल लेवल था कि यह जो अलीगढ़ है उस अलीगढ़ ने क्या कीजिए अगर एजुकेशन दे रहा है तो यह जो है वहां पर फिर सारे के सारे क्रिटिकल माहौल मुसलमानों का जुबान है वह सारे का सारा इंग्लिश एजुकेशन टाइप कमेंट है उसको चेंज करना ठीक हो गया और मौलाना अशरफ अली थानवी और मौलाना शब्बीर
अहमद उस्मानी जैसे जो है वह नामी गिरामी अलार्म्स जो है यहां से निकलीं दारुल उलूम देवबंद सैनिकों और आज हम जानते हैं कि दुग्ध पाकिस्तान और इंडिया के अंदर एक बहुत बड़ा फिर क्या है सुननी मसलक के अंदर ठीक है जी है आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं उड़द हिंदी डब्ड कंट्रोवर्सी कि यह के उर्दू-हिंदी तनाव से की और यह जो उर्दू-हिंदी तनाव तथा यह भी बहुत इंपोर्टेंट है पेमेंट रहा इंडियन हिस्ट्री के अंदर और यह दारुल उलूम देवबंद के एक साल बाद यह 1967 के अंदर जो है यह सामने आया अब कंट्रोवर्सी क्या
ठीक है सबसे पहले कि हम बैकग्राउंड की बात करें तो क्योंकि जो उर्दू है हम जानते हैं कि उर्दू मुसलमानों के दौर के अंदर यह मुगलों के दौर के अंदर जो मुगल बादशाह थे उनके घर के अंदर जो है यह डिवैलप हुई कहां पर जी इंडिया के अंदर के दरबार के अंदर तो डिवैलप हुई क्योंकि उर्दू जो है वह तुर्की सुनकर लफ्ज़ है और इस मुख्तलिफ लैंग्वेजेस से मिलकर बना हुआ है वह क्लिप लैंग्वेजेस मतलब जिस टाइम पर जो मुगल आर्मी थी वह बहुत ज्यादा फैल गई तो उसके अंदर जो है वह फांसी वाले भी
थे उसके अंदर जो है वह पहले भी थे उसके अंदर जो है वह अर्चना की जुबान बोलने वाले थे तब तक इसकी थे तो उसके नतीजे के तौर पर शामिल जुबान बोलते थे तो उस जवान जो है वह डिवैलप और उर्दू और स्टुअर्ट मतलब मिक्सचर थी लेकिन वह क्योंकि मुसलमानों के टाइम पर डिवैलप हुई तो इस वजह से खास करके शाहजहां के जमाने में जब सल्तनत बहुत ज्यादा जो है उसकी बाउंड्रीज फैल गई और ऐसे में जो है वह फोर्थ जो है वह बहुत ज्यादा हो गई तो फिर वहां पर जो है वह अच्छी तरह
की खोज के लोग जो है वह एरिया के लोग वहां पर आगे शामिल हुए तो एक नई जुबान डिवैलप को इसको उर्दू का नाम दिया गया अब जब उर्दू का नाम दिया गया तो उर्दू जो है वह हिंदुस्तान के अंदर बोली जाती तो अंग्रेजों ने से सरकारी दुकान का दर्जा दिया था तो ऐसे में हिंदू जो थे उन्होंने यह शो शुरू कर दिया बनारस से जो एक मुमेंट की गई और मूवमेंट क्या ठीक है भेजो संस्कृत है संस्कृत को सरकारी दुकान का दर्जा दिया जाए ना के उर्दू को उर्दू को रिप्लेस करके संस्कृत को जगह
दी जाए तो ऐसे में घृत मुमेंटम मिल की ओर से यह जो है उस टाइम पर उसने कहा था कि मैं इससे पहले कि संघ ने कहा था कि अगर हिंदू जो है वह मुसलमानों की उड़ान को वह बर्दाश्त नहीं कर सकते तो मुसलमानों को कैसे बर्दाश्त करेंगे इसकी वजह नजर आ रहा है कि मुसलमान और हिंदू एक साथ नहीं रह सकते तो समटाइम माना जाता है वह को से लोग मानते हैं कि सर सैयद जो है वह इस आइडियोलॉजी जो है इसके बानी भी है कि इन्होने सबसे पहले जो है वह यह बताया कि
मुसलमान और हिंदू झुक साथ नहीं रह सकते कि तो एक मिनट पर जॉइंट करते हैं आगे बढ़ते हैं कि आगे आता जी नदवातुल उलेमा 892 उन्हें 1898 के अंदर जो है कि नोएडा बेबुनियाद रखी गई और वह क्या था जी नदवातुल उलमा लखनऊ लखनऊ के अंदर स्किन याद रखी गई और यह भी जो है वह इस्लामी जो है वह मिला था यह इस्लामिक मदरसा भी आप इसे कह लें अब इसके बैकग्राउंड की बात करें तो देखिए एक साइड पर अलीगढ़ मूवमेंट है और अलीगढ़ वाले जो है वह काम कर रहे हैं इंग्लिश एजुकेशन के ऊपर
टोटली गोइंग टो प्रमोट कर रहे हैं और दूसरी साइड पर जो है वह देवबंद है जो बन की मूवमेंट चल रही है जो कि इस्लामिक एजूकेशन को जो है वह प्रमोट कर रही है अब ऐसे में एक जो है वह इंग्लिश एजुकेशन को प्रमोट कर रहे हैं एक इस्लामिक एजुकेशन को तो न गांव वालों ने सोचा कि ऐसा ही नारा होना चाहिए जो दोनों काम करें यानि जो इंग्लिश एजुकेशन भी दे और साथ में इस्लामिक एजुकेशन भी दे इन दोनों का मिक्सचर हो क्योंकि दोनों मुसलमानों की जरूरत है तो ऐसे में जो है वह न
डूबा का आगाज किया गया और यह जिम्मेदारी का क्या अमल में लाया गया ताकि वह दोनों तरफ से ऑप्शन दे सके क्वेश्चन और इस्लामिक एजुकेशन दे सके तो इसको 1992 केंद्रीय इसकी सर्विसमैन हुई कानपुर के अंदर एक छोटा सा जिला है उसके अंदर ठीक है और यह मदरसा फैजुल आम के अंदर जो है इसका आगाज हुआ और असल में जो इसने काम करना स्टार्ट किया 2 साल के बाद 1994 में किया और मौलाना मोहम्मद अली मोंगरी साहब जो है वह इसके पानी माने जाते हैं और इसके जो एवं सेक्युरिटी का लेंथ मुसलमानों को सियासी तौर
पर व्यवहार करना उनको एजुकेशन देना मजबूत तौर पर उनके मजबूत क्वेश्चन देना ताकि हम अब से दूर न जाएं और मॉडर्न ट्रैफिक को प्रमोट करना यानि कि मॉडर्न रिक्शा मुराद वह जो 14 साल पहले 13 साल पहले से पढ़ाई जा रही थी तो 1968 के साथ अपने बिल्कुल में को मोड ओन थॉट्स के साथ मुसलमानों को देना अतिथि डिफिकल्ट सिचुएशन जो है ठीक है एक लाख की तालीम उसके ऊपर जो है वह जोर दिया मुसलमानों की और मौलाना शिबली नोमानी जो है और सलमान जैसे बड़े नाम जो है वह उनके साथ अटैच हुए इस मकसद
में इनके तो यह आज भी हो लेकिन उसके अंदर मौजूद है और इसके जो फारुख रिमाइंड करवाओ है उनको न भैंस कहा जाता है और यह आज भी बहुत बड़ा इदारा है इंडिया के अंदर आगे बढ़ते हैं तो टिप्स पॉइंट किया कि आगे मेरे पास ही कांग्रेस 8085 यह निकला इंपोर्टेंट एवं जो आता है इंडियन हिस्ट्री के अंदर व है कांग्रेस का और हम देखेंगे कि कांग्रेस है अब जो कांग्रेस थी देखिए अब कांग्रेस की सबसे पहले रन देकर उन्हें शांत क्यों रखिए ठीक है अब देखिए सबसे पहले जो 857 के अंदर जो वॉल्व इंडिपेंडेंस
हुई थी तो जब अंग्रेजों हैं उन्होंने इस पर सोचना शुरू किया यह कमेटी बिठाई केवल पता करो कि वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस क्यों हुई है जो जंगे आजादी थी क्यों हुई तो उन्हें पता चला के अंग्रेजो की गलतियां थीं उनकी जो पॉलिसीज थी वह पॉलिसी जैसी थी जो मैंने हिंदुस्तानियों को बहुत ज्यादा तंग किया जिससे बॉल पर डिपेंड सुई एनी उसमें सबसे इंपोर्टेंट चीज यह थी कि अथॉरिटी जितनी भी थी वह सारी की सारी अंग्रेजों के पास थी वह मुसलमानों के पास या indians के पास जो है या हिंदुस्तानियों के पास नहीं थी तो ऐसे मैंने
यह फैसला किया कि वह यह कैसी पॉलीटिकल पार्टी होनी चाहिए जो पॉलीटिकल पार्टी कम से कम हिंदुस्तानियों को रिप्रजेंट कर सके ऐसे में जो है फिर एक अंग्रेज नहीं है क्विट आएंगे सबसे जो सूजी है इन्होंने 895 के अंदर जो है वह कांग्रेस की बुनियाद रखी ताकि को मुसलमान जो है यह इंडियंस जो है इनको एक ऐसा प्लेटफॉर्म मिल सके जहां पर जो है यह अपनी आवाज बुलंद कर सकें सबसे इंपोर्टेंट चीज माने या ना माने वह बात की बात है लेकिन आवाज को बुलंद कर सके ताकि जो है वह दोबारा से वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस
जैसे हालात जो है वह पैदा ना हूं देखिए इसकी कोशिश की थी यह देखिए इसको बनाया गया तो उसमें सबसे पहले पॉलिटिकल को अवस्था की पुष्टि के लिए के सियासी तौर पर थोड़ा सा और राइट देना हिंदुस्तानियों को ताकि वह दोबारा से रिपोर्ट के हालात पैदा करें इंडियन यूनिटी इसका व्यवस्था की गई एक कांग्रेस इस दावे के साथ बनी थी यह पूरे का पूरा जो हिंदुस्तान है उसकी तमाम जो जहां जितनी भी जो वहां पर क्लासेस रहते हैं चावल सलमान हिंदू हैं अंग्रेज हैं ठीक है ठीक है वह सबके लिए है दूसरा पॉलीटिकल राइट्स के
लिए जो है यानि कि पॉलीटिकल राइट्स है वह सारे के सारे उसको क्या हासिल करना है किसी प्लेटफार्म पर तो प्लेटफॉर्म किया था कांग्रेस का प्लेटफॉर्म है जिसके तो हम इसे हासिल करेंगे तो इस परपस के लिए जो है यह बनाया गया यह नहीं आपने किस दिशा में रखनी है कि परपस था कि सारी की सारी जो हिंदुस्तान है यह सारी जो कि हिंदुस्तान की जो यहां पर माइनारटीज उन सबके लिए बनाया गया ठीक है उसके बाद आगे बढ़ते हैं उन पांच मिनट इसको ऑन किया तो नेक्स्ट हम देखते हैं जी पार्टीशन आफ बेंगल 19052
1995 के अंदर अगला इंपोर्टेंट पार्ट होता है और बंगाल जो है इसको तक सीमित कर दिया जाता है ठीक है जी यह तक सी में बंगाल अब सबसे इंपोर्टेंट चीज अपने दिमाग में रखनी है कि अगर आप यह पूरी लोंग वीडियो नहीं देखना चाहते हैं तो यहां नीचे प्ले लिस्ट मौजूद है जिसके अंदर सारे के सारे हिस्ट्री की वीडियोस मौजूद है तो आप वहां पर क्लिक करके सारे वीडियोस बन भी देख सकते हैं तो पार्टीशन आफ बेंगल अगर बात करें तो पॉलिटिशन बंगाल में सबसे पहले गैस का विवरण देखें तो पार्टीशन आफ बेंगल क्यों हुई
क्योंकि बंगाल जो है वह एक बहुत बड़ा जो है वह इलाका था यह स्थिति स्कार्स में इसका एरिया बहुत बड़ा था तकरीबन जो है वह सिक्स जो है वह 6lack किलोमीटर के करीब उसका एरिया था और इसकी जो आबादी थी 98 मिलियन आठ करोड़ के करीब बदली थी और हिंदुस्तान के सबसे बड़े सौदों में से 10 था ठीक है और इसको मैनेज करना बहुत बड़ा मुश्किल तक यह एडमिनिस्ट्रेटिव लीव्स को मैनेज करना मुश्किल से इस वजह से bigg boss को तकसीम किया गया ईस्ट और वेस्ट के अंदर यह इस पर क्वालिटी सामने यह मैं पर
देखें यह स्प्रिंग और यह टेस्टिंग और फिर यह सारे का सारा एक ही बंगाल था ठीक है और यह असंभव इसके अंदर शामिल साफ व अब जब यह इतना बड़ा एरिया है तो इसको मैनेज करना एक बहुत बड़ा चैलेंज है इसी वजह से जो इसको दो हिस्सों में तक सीमित कर दिया जाए इसके साइड इफेक्ट वेस्ट की साइड पर ठीक है अब जब तक सीन हुआ तो इसके ऊपर रिएक्शन वह क्या है कि मुसलमान तो बहुत ज्यादा खुश से लेकर हिंदुओं ने और कांग्रेस ने इसके ऊपर बहुत सखत किसम का रिएक्शन दिया क्यों उसकी वजह
क्या थी कि हिंदुओं ने कांग्रेस ने क्यों इसके ऊपर बहुत ज्यादा रिएक्शन दिया क्योंकि इस प्लेन गोल था यह बहुत ज्यादा कुछ हाल था क्योंकि इसका जो एक ज्यादा यहां पर जो एरिया था यहां पर इस मंदिर के साथ था तो ऐसे में जो है वह हुआ क्या के यहां पर फैक्ट्रियां जो मिले जोतिबा की ज्योति अव्वल ऑफिस कब्जे में आ गए यह मुसलमानों की मैं जो पिज्जा मैच्योरिटी उस एरिया के अंदर आ गए यहां पर सलमान ज्यादा थे तो ऐसे में मुसलमानों को हिंदुओं को यह बात पसंद नहीं थी मुसलमानों को जो है वह
आजादी मिले यह ऐसा इलाका मिल जाए जहां पर वह फ्री होके रह सके या वह ट्रेड के अंदर खास करके फ्री हो सके क्योंकि आप सबसे इंपोर्टेंट चीज यह थी कि अगर उनको सेट कर दिया गया तो इस मतलब इंडिपेंडेंट हो जाएंगे तो यह बात ना हिंदू चाहते थे ना कांग्रेस से आती थी ऐसे में जो है फिर कांग्रेस को भी यह इतना मजबूत और हिंदुओं को भी तो उन्होंने जो है फिर वह पूरी की पूरी मूवमेंट स्टार्ट कर दी स्वदेशी मूवमेंट ठीक है कि जिसके तहत जितनी भी जो ब्रिटिश गुड-गुड तीन ठीक है कि
जो भी बाहर से चीज में आ रही है वहां से बर्तानिया से आ रही है तो उनका बायकाट किया गया खासकर कि उनके कपड़े का जो है वह रिकॉर्ड किया गया और कि तकरीबन छह साल अगले चलता रहा और फिर 1911 के अंदर जो है इसको कैंसिल कर दिया गया यह जो पार्टीशन की गई थी को खत्म कर दिया गया कि भई अंग्रेजी जानते थे यूनिवर्सिटी से जानते थे कि अगर वह तो यह स्ट्रैट के लिए मैं कारोबार कर रहे हैं साथ में रूल कर रहे हैं तो अगर अंग्रे जो हिंदू है वहीं नहीं मानेंगे
और उनकी सपोर्ट हासिल नहीं होगी तो हिंदुस्तान के अंदर रूल करना बहुत ज्यादा मुश्किल होगा तो ऐसे मैं पार्टीशन को या वापस ले लिया गया लेकिन मुसलमान इस पार्टीशन से बहुत ज्यादा सोचते तूने पहली बार जो है वह सर उठाकर आगे बढ़ने का मौका मिल रहा था और हिंदुओं के जरिए साया नहीं बल्कि अलग से हटके तो इसलिए वह बहुत ज्यादा नाराज हुए इस बात के ऊपर और काफी सोचा कि जो हिंदू है और जो ब्रिटिश है यह तो एक साइड पर है इसका मतलब अगर कुछ करना है तो वह में ही करना है लेकिन
इससे पहले कि एक दो ई वांट टो हैव अ हम अभी देखते हैं वह बहुत इंपोर्टेंट है 90 तो उसके बाद क्या हुआ jio sim लाइट कंडीशन की बात करते हैं 1906 के अंदर नेक्स्ट इंपोर्टेंट यह देखिए शिमला व जो है यह भी एक बहुत इंपोर्टेंट जो है वह वक्त रहा जो के जिसने 22 राय से मुलाकात की शिमला डेफिनेशन क्या है जी 135 रुकने वक्त जो है उसने शिमला में जो है वह लौट मंडल से मुलाकात की जिसको शिमला व कहा गया अब इसने जो मुलाकात की वह क्योंकि इसका पेस्ट बैकग्राउंड यह था कि
न्यू न्यू फॉर्च्यूनर जो पार्टीशन आफ बेंगल तू सलमान काफी ज्यादा खुश थे कि अब उन्हें भी राइट्स मिलेंगे तो इसी खुशी में जो है वह मेल्ट मंटो साहब से मुलाकात के लिए क्योंकि लॉर्ड कर्ज़न चेंज हो चुके थे नए वॉइस राय चुके हैं 1995 के अंदर लौट मंटू तो लौट मंटू के बारे में था कि वह पहले कनाडा के अंदर भी है कि आए थे तो इस वजह से जो है वह काफी अच्छे इंसान थे यानी कि वह दौड़कर से मुख्तलिफ तो ऐसे मुसलमानों ने क्या किया चीन से मुलाकात का वक्त मांगा और मुलाकात का
वक्त नहीं मिला शिमला के मुकाम पर तो इन्होंने 1962 में जो है वह शिमला में उनसे मुलाकात की थी तो उसमें डिमांड्स कहां रखी मुसलमानों ने कि हमारी जो है वह क्या डिमांड है तो उसमें सबसे इंपोर्टेंट डिमांड ज्योति वह सेपरेशन की थी यह सेपरेट्स की थी कहां कहां पर कोर्स के अंदर के भी कोर्ट ने उसे परीक्षित दी जाएं मुसलमानों को अच्छा इलेक्शंस के अंदर जो यह हमारे हल्के से अपडेट की जाए वहां की सपोर्ट्स को और इस फैमिली के अंदर जो है वह मुसलमानों की अलग से हैसियत मौजूद हो यूनिवर्सिटीज के अंदर जो
कैंडिडैट से वहां पर भी मुसलमानों को नुमाइंदगी दी जाए यह बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट रोमांटिक और इसमें सबसे जो कि डिमांड थी वह दीजिए सेट इलेक्शंस की ठीक है अब सेपरेट सेक्शंस कि क्या डिमांड थी कि मुसलमानों ने यह बात कही कि अगर एक हल्का है 5 लाख या वादी का ठीक है वहां पर 5 लाख की आबादी है तो क्योंकि हिंदुओं की आबादी ज्यादा है हिंदू ही ज्यादा अब जब हिंदू ज्यादा है तो इसका मतलब हर पांच में से चार लाख जो है वह हिंदू हैं तो इसलिए यहां पर एक रिमाइंडर हिंदुओं का है एक
मुसलमानों का है तो जीतेगा कौन हिंदुओं का नुमाइंदा जीतेगा ऐसे में मुसलमानों को कोई फायदा नहीं तो ऐसे में आप क्या करें इस अपडेटर इलेक्शन जो सब्सक्राइब मुसलमानों को दें कि यह जो 1 लाख का हल्का है जहां पर लोग मुसलमानों की अवधि है यहां पर इसके लिए अलग से मुसलमानों के लिए इंतेखाबाद का तरीका तो यह बहुत ही इंपोर्टेंट डिमांड और बहुत ही जो है वह लॉजिकल भी क्षीण ऐसे में जो है लॉर्ड मिंटो सब लिखा है कि वह मैं आपके सारे डिमांड जो है उनको अब जो नेक्स्ट आएगा यह जो नया लौटाएगा इंडिया
के अंदर उसके अंदर हम इसको सारे के सारे को रखेंगे और इसमें से बहुत सी डिमांड आपकी जो है वह पूरी भी करेंगे तो यह शिमला डेफिनेशन वह काफी अच्छे तरीके से नहीं वापिस आए उसको काफी हौसला अफजाई जो है वह नताइज मिले आगे बढ़ते हैं अब जब शिमला हो गया तो शिमला वक्त क्योंकि शिमला वापसी मुसलमान काफी ज्यादा वह खुश से और दूसरा 1905 की जो पार्टीशन आफ बेंगल थी उससे भी काफी ज्यादा कुछ तो मुसलमानों ने फैसला किया कि आप क्यों ना एक ऐसी पॉलीटिकल पार्टी बनाई जाए जो सिर्फ़ मुसलमानों के वफादार के
लिए काम कर सके अब आपने इस बात को दिमाग में रखना है इससे पहले जो कांग्रेस ठीक है जो 825 के अंदर बनी थी उसका जूस लॉगिन था वह क्या था कि कोट सबके लिए है जितनी भी ऑल माइनारटीज है हिंदुस्तान के अंदर ठीक है में जुटी है यह माइनॉरिटी हो सबके लिए सब indians के लिए है लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि 895 से लेकर 1905 तक कुछ भी ऐसा नहीं हो सका जिसमें देखने को यह मिला हो कि कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए जो है वहीं रोल प्ले किया जीवन के कांग्रेस के अंदर बड़े-बड़े
मुसलमान लीडर्स भी शामिल थे तो इसके मुसलमानों के लिए यहां पर चेंज भी हाथों सलमान खान जो है वह दो धड़ों के अंदर तक टीम थे कांग्रेस को सपोर्ट करते थे और दूसरे ने जो है वह डिमांड सामने रखी कि हमें मुसलमानों के लिए अलग से सियासी जमात बनानी चाहिए ठीक है क्रिटिकल पार्टी जो है वह बनाने चाहिए तो ऐसे में क्या हुआ जी कि जो मुस्लिम लीग का ऑल इंडिया मुस्लिम लीग एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस ज्योति मुस्लिम एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस ज्योर्थी है जो अलीगढ़ के प्लेटफार्म से चल रही थी उसका एडमिशन हुआ 30th दिसंबर 2016 को ढाका
के अंदर तो वहां पर यह तटीय संबंधित एंट्रीज कोंट्रा मुस्लिम लीग की बुनियाद रखी गई और सारा खान थर्ड जो है इनको सदर बनाया गया मुस्लिम है और व कारण मलिक साहब और मोशन मसाले जो हैं इनको जॉइंट सेक्रेटरी दोनों को मिलाकर बना दिया गया और इस तरह से मुसलमानों के लिए सेपरेट जो है वह पहलू से अजज उसकी बुनियाद रख दी गई और जिसका परपस किया था आपने यह समझना है कि परपस हरगिज भी यह नहीं था कि पावर में आना यानि जो पावर पॉलिटिक्स कि वह परपस किसी सूरत भी नहीं था मुस्लिम लीग
का बल्कि उसका पर कुछ और ही था और क्या था सबसे पहला प्रस्ताव ब्रिटिश मुस्लिम यूनिटी के मुसलमानों और अंगरेजों के बीच में एक कहावत पैदा करना कि यह सियासी जमात क्या करेगी अंग्रेज बहुत दूर हो चुके हैं मुसलमानों से उन्हें नफरत करते हैं वहीं सैयद आरिफ एवं जो था इनका था उनको जो करीब लाया जाए मुस्लिम राज मुसलमानों के हक की बात की जाए कि जहां पर मुसलमानों के हुकुम जैसे आप शिमला ब्लड सर्कुलेशन जोगिया 1968 के अंदर तो उसने मुसलमानों के हित की बात की तो इस तरह से जो है उनकी इस प्लेटफॉर्म
होना चाहिए और गुड रिलेशंस विद दर नेशंस के जितने भी दूसरे को में हैं हिंदुस्तान के अंदर उन सबके साथ अच्छे चालू कि रखना था ठीक है तो यह सारे के सारे जो है वह मेसेज वह मकसद थे मुस्लिम लीग के लेकिन फिर 1931 के अंदर 1913 में जो यह sim लेकिन अपना जो कि बुनियादी i30 के उस प्रकार के अंदर चेंज की और फिर बात की पावर पॉलिटिक्स कि क्या मुस्लिम लीग भी जो है वह जो पॉलिटिक्स करेगी वह पॉलिटिक्स होगी वह भी हकूमत में हिस्सा लेने के लिए बुधवार को कोशिश करें इससे पहले
तो उसका प्रपंच है वहीं तो यह भी जो यह सामने आई कि अहम सिमी के मकसद से यह 1908 के अंदर सामने 2 साल तकरीबन डेढ़ 2 साल के बाद जो है उसे एक ने अपनी जगह पर सामने रखें आगे बढ़ते हैं जी कि ऑडियो इंपोर्टेंट जो है वह 19019 का मंटो मामले रिफॉर्म्स ठीक है अब यह मंटो मामले रिफॉर्म्स जो है यह बहुत इंपोर्टेंट है और जो हमने देखा था 906 के अंदर जो शिमला डेफिनेशन गया था यह शिमला वक्त गया था कि मुसलमानों को सेपरेट जो है वह इलेक्शंस का हक दिया जाए तो
वह मन टो मार्लेश्वर तो आप जो तुरंत क्या कहा था कि जो नेक्स्ट आएगा ठीक है 199 से कहा जाता है तो जो नया एक्स्ट्रा को उसके अंदर हम आपकी बातों को शामिल करेंगे ठीक है तो यह दूध एक जो है वह बशीर साहब से मौज ले साबिर मंटू जी वॉयसराय थे तो ऐसे में क्या हुआ कि इन्होंने जो है मुसलमानों की डिमांड मानने इन सारी तो नहीं लेकिन यह सफल एक्ट्रेस की डिमांड मुसलमानों की कुछ दिनों के अंदर मानी सब के अंदर नहीं मानी ठीक है तो ऐसे में जो यह शिमला कंडीशन जो कामयाब
हो गया और मंटू मामले रिफॉर्म्स सामने आ गए हिंदुस्तान के लिए जिसमें सेपरेट सेक्शंस इन के जुदागाना इंतखाब का सुहाग था वह मुसलमानों का मान लिया गया और यह बहुत बड़ा ब्रेक ट्रुथ इंडियन हिस्ट्री के अंदर ठीक है कि मुसलमानों को सेपरेट माना गया था इससे पहले सलमान शोर तो कर रहे थे कि हम सेट है लेकिन यह माना नहीं जा रहा था ठीक है इसके अलावा इसके अंदर क्या हुआ जी पावर जो है लेजिसलेटिव काउंसिल किसको बढ़ा दिया गया कि भई अब आपने लॉग भी बना सकते हैं और इंडियन जो है उनको शामिल किया
गया दृष्टि पहुंचे केंद्रीय नीति इन इंग्लिश जीवन को भी शामिल किया गया एडमिनिस्ट्रेटिव फसल के अंदर तो इस तरह से आप हनुमान रिफॉर्म्स वह ऑयल जो है वह इंडिया के लिए काफी अच्छी रही और खासकर के मुसलमानों के लिए जो है वह बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट रही है यह कंडोम और इसमें की सबसे बड़ी डिमांड मुसलमानों की सेपरेट सेक्शंस कि वह यहां पर मान ली गई थी ठीक है तो यह इंपोर्टेंट एवं था है आगे बढ़ते हैं और आगे बात करते हैं लखनऊ पैक्ट की कि उस चकली इंपोर्टेंट लखनऊ पैक्ट है 1916 का अब यह जो
लिख नऊ वायदा है यह बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट माना जाता है इंडिया की हिस्ट्री के अंदर अब सबसे पहले किसके बैकग्राउंड की बात करेंगे इसको आप ऐसे अंदर क्या रहा तो सबसे पहले आप देखिए कि अदम साहब जो है वह 1913 के अंदर मुस्लिम लीग के हुसैन बने ठीक है इससे पहले वह ₹90 के अंदर कांग्रेस के रुके थे ऑलरेडी कांग्रेस को जॉइंट कर चुके थे लेकिन उस एंड जॉइन नहीं की थी ऐसे में 1913 के अंदर जो है उन्होंने मुस्लिम लीग को भी जो है वह जॉइंट कर लिया है यह हमने और इसी टाइम पर
काट दिया उनको इन बेस्ट आफ हिंदू मुस्लिम यूनिटी भी कहा गया सरोजनी नायडू साहिबा की तरफ से के भी आप जो है वह मुसलमानों और हिंदुओं की सफीर हैं अब यहां पर आपने ही समझना है कि जो अंग्रेज थे क्योंकि अब हमने देखा कि 1911 के अंदर जो है वह पार्टीशन हुई थी बंगाल कि वह बंगाल की पिटीशन जो है खत्म कर दी गई जब बंगाल की क्वेश्चन खत्म हुई तो मुसलमानों और हिंदुओं के बीच में जो है वह नफरत पैदा होगी दोबारा से मुसलमान और हिंदू जो है वह दूसरे से दूर हो गए अब
टेस्ट ओं थे वह क्योंकि 1995 कर चुके थे अब वे चाहते थे कि हिंदुस्तान के अंदर मुसलमानों को और हिंदुओं को जो है वह इकट्ठा किया जाए तो इकट्ठा होना बहुत ज्यादा जरूरी था एक तो यह इकट्ठा करना चाहते थे दूसरा पक्ष यह था कि वो ड्वार्फ फर्स्ट जो है वह सॉफ्ट हो चुकी थी 1914 कैमरे ठीक है 1984 1918 तक व रही तुझे फर्स्ट वर्ल्ड वॉर रही तो ऐसे में भी अब टेस्ट है वह लाइफ पावर के साथ तो खुद वह और का सबसे बड़ा जो है ना वह पार्टनर था तो ऐसे में उन्हें
जो है हिंदुस्तान के अंदर अफरातफरी नहीं चाहिए थी तो हिंदुस्तान के अंदर मुसलमान और हिंदुओं को जो है वह इकट्ठा करना ही करना था और दूसरा क्या हुआ कि कानपुर के अंदर एक मस्जिद और एक मंदिर जो है उसका कुछ हिस्सा जो है उसको गिरा दिया गया एक रोड जो है ठीक है और रोड को खुला करते हुए उसको उसी करते हुए तो यह जो अब मंदिर किराया तो हिंदुओं को पूरा लगा मस्जिद गिराई तो मुसलमानों को बुरा लगा है कि सलमान और हिंदू जो है वह इकट्ठे हो गए अंग्रेजों के खिलाफ करने का व्यवहारिक
होते हैं और मिलकर आगे बढ़ने लेकिन एक्चुअली में अपने ही समझना है कि अंग्रेजों के अगेंस्ट में यह तहत नहीं था बल्कि निवेश खुद चाहते थे कि इनका तहत पैदा होता कि इंडिया के अंदर जो है यह जो लड़ाई है अफरा-तफरी है वह खत्म हो ठीक है अब ऐसे में जो लखनऊ पैक्ट है यानि कि लखनऊ के अंदर जो है यह मैदा वह क्या था जी कि कांग्रेस में सेंड जो है सबसे पहले इसकी यूनिटी की बात की गई कि यह मौजूदा जो है वह कांग्रेस को मुस्लिम लीग को एक साथ का यह दूसरा जो
है सेल्फ रूल की बाद इसके अंदर की गई कि इंडिया के अंदर जो है वह खुद इस तैयारी की गवर्नमेंट हो खुद तैयारी मतलब जहां पर कुछ सेल्फ रूल हो सके खुद अपने आपको मत कर सके इससे पहले गोखले सांप जो थे यह कांग्रेस के जो है वह लीडर थे और यह जो है वह काफी लीटर ही मानते थे यह मुसलमानों की योनि के यह मानती है कि मुसलमान जो है वह सच्चाई इंडिया के अंदर ठीक है बाकी हिंदू तस्लीम नहीं करते कि मुसलमान भी जो है वह पावर हैं इनका मुरब्बा था ठीक है दूसरा
डोकोमेंट के नाम से मशहूर बाद याद किया जोडिय़ों में पेश किया ठीक है वहीं कुछ मंसूबा था जिसको पेश किया गया कि किस तरह से जुड़े इंडिया के अंदर से रुक जाओ लाया जा सकता है यह मसल इंडिया के अंदर इंडियंस को जो है वह थोड़ा सा और राइट दिया जा सकता है फिर क्या हुआ जी अंग्रेजों ने एक कमेटी बना दी 19 लोगों की कमेटी किसने बनाई अंग्रेजों ने बनाई है अपने दिमाग में रखना है ठीक है और कोलकाता का सिलेक्शन हुआ नवंबर 19 16 के अंदर और इसमें जो है कुछ प्रपोज्ड थे उन
प्रपोज के ऊपर जो है वह एग्रीमेंट हो गया दोनों पार्ट इसका कांग्रेस का भी और मुस्लिम लीग का भी ठीक है तो अब जो प्रपोजल्स से वो क्या थी जी कि उसमें अगर रिस्पोंस तो यह फाइनल हुए लखनऊ के अंदर ठीक है इन कोलकाता के अंदर जो भी प्रपोजल सामने आए और लखनऊ में फाइनल हुए और सबसे इंपोर्टेंट आपने दिमाग में रखना है यह ने बहुत इंपोर्टेंट रोल प्ले किया क्योंकि जो कायदे आज़म थे वह दोनों पार्ट इसके अंदर मौजूद थे तो यह जो 16 रूप में 19 सूखने जो कमेटी थी इसके अंदर का दायित्व
हित थे जो कि दोनों पार्ट इसके अंदर ही मौजूद थे नहीं वह प्रसन्न का ब्रिज का काम कर रहे थे कांग्रेस इंग्लिश में और उसे अमली के बीच में ठीक है तो इनका बहुत इंपोर्टेंट रोल रहा यह एग्रीमेंट लखनऊ पैक्ट करवाने के अंदर तो ऐसे में क्या रिफॉर्म जो इन्होंने लाने की कोशिश की है किस बात के ऊपर दूनागिरी हुए सबसे पहली बात जी मुसलमानों ने avatar अपना सामने रखा कि अगर कांग्रेस हम आपका साथ देंगे कांग्रेस वालों तो फिर आपको क्या करना होगा मुसलमानों को स्विच देनी होंगी यह मुसलमानों को इस हमले के अंदर
से नहीं होंगी जहां पर उनकी स्थिति बनती है वहां पर आप उनकी सीट देनी है सबसे पहले डिमांडेड दूसरा प्रोविंशियल ऑटोनॉमी वृक्ष भाई जो है वह को चुकानी होगी सुबह को जो है वह आपको मक्कार करेंगे और वह नाटक है कर सकते हैं अपने लॉग खुद बना सकते हैं अच्छा फिर कहा गया जी के हिंदुओं को जो है जहां पर मुसलमानों की अक्सरीयत अ जिन इलाकों के अंदर मुसलमान जो है वह शरीयत में होंगे तो वहां पर हिंदुओं को जो है वह प्रोटेक्शन भी जाएगी इसी तरह से कहा गया जहां पर हिंदू और शरियत के
अंदर है ठीक है वहां पर मुसलमान जहां पर माइनॉरिटी करते हैं मुसलमानों को भी प्रोटेक्शन दी जाएगी और फिर कहां गया वन थर्ड जो है वह इंपीरियल लेजिस्लेटिव कौन जो है उसके अंदर मुसलमानों को नुमाइंदगी दी जाएगी हर तीन में से एक बंदा जो है वह मुसलमानों का होगा फिर कहां जी गवर्नर और को जो कौन से लगाव अंदर की गवर्नर की जो कौन सा है सुबह के अंदर ठीक है वह क्या होगी उस काउंसिल के अंदर आधे जो है वह इंडियंस होंगे ठीक है आधे इंडियन शामिल होंगे उसको अंचल के अंदर यह बहुत ज्यादा
जरूरी है ताकि तभी तो वह पूर्वी क्षेत्रों में होगी वह अपनी मर्जी से डिस्टेंस ले सकेंगे तो यह जो है वह कुछ जो है वह डिमांड सामने रखी गई मुस्लिम लीग और कांग्रेस की तरफ से अंग्रेजों के लिए और मिलकर जो है वह इस मामले के ऊपर यह एक जगह इकट्ठे होंगे तो ठीक है हम यह प्रपोज है वह अंग्रेजों से मंजूर करवाते हैं कि यह इंडिया के अंदर ऐसे लॉस लेकर आए ठीक हो गया तो यह थे लखनऊ पैक्ट इस पोटैटो मिनट पर आगे बढ़ते हैं अगले जो इंपॉर्टेंट व्व 1919 के अंदर हुआ वह
क्या था जी मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड वेवफॉर्म्स या मोड ने कहा जाता है यहां से मोंट यहां सिर्फ और तो यह मोमेंट फॉर रिफॉर्म्स यहां से बना ठीक है और इसी को इंडियन गवर्नमेंट एक 1919 भी कहा जाता है कि जैसे 1900 था इसी तरह से 1919 कभी एक्टर यह कानून वन इंडिया के अंदर आ गया 10 साल के बाद जो नार्मल इंडिया के अंदर चला रहा था कि आप दस सालों तक विन्यास लेकर आते थे तो यह दो लोग थे जिन्होंने जो है वह एक बजे हिंदी और एडवाइस चाहिए और ने मिलकर जो है वह यह
जो मोंटेग्यू तय यह बजे ही थे और यह जो है वह इस्राएल थे तो इन्होंने जो है वह मिलकर एक फैसला किया कि वे क्यों क्या लिखू पैक जो है वह चुका है लखनऊ का मुद्दा हो चुका है और कांग्रेस उसे मुस्लिम्स वह एक प्लेटफॉर्म के ऊपर इकट्ठी हो चुकी है तो ऐसे में यह बेस्ट टाइम है किसी भी नए कानून के लाने का क्योंकि दोनों में से कोई भी ऐतराज़ नहीं करेगा तो ऐसे में जो है वह प्रपोजल सामने क्वाइट प्रपोजल्स क्या-क्या थे जिससे कि अंदर क्या कहना है कि अंदर आया इंडलारजमेंट आफ एग्जीक्यूटिव
काउंसिल सबसे पहले कहा गया कि जो एग्जीक्यूटिव काउंसिल है ठीक है जी एक्टिव कौन से यह इसके अंदर अंग्रेज के अंदर योग्य फोन से होगी उसका ट्रेलर लांच किया जाएगा और तीन इंडियन जो है उसके अंदर शामिल किए जाएंगे सबसे पहली बात बाइक कैमरे लेजिसलेशन होगी यह दो अवनी जो है वह करना होगी दो है मानी वह करना कैसे होगी कि एक जो है वह पैर है उसको कौन सा स्टेट का नाम दिया गया और दूसरा जल और है उसको लेजिसलेटिव असेंबली का नाम दिया गया ठीक है उसके बाद कहा गया कि डिसटीब्यूशन आफ पावर
जो है वह सेंटर के बीच में और आंसुओं के बीच में होगी यह जो ताकत है उसको इस गहरा जो है यह ताकत उसको तक सीमित कर दिया जाएगा सेंटर के अंदर और उसके बाद सूबों के अंदर के सुखों को प्राप्त किया जाएगा और सेंटर को भी अलग से राइट दिया जाएगा अब यहां पर आ गए हम डिस्कस करेंगे कि किस तरह से राइडर्स रिबूट होंगे उसके बाद काजी इंक्रीज आफ पावर इन फॉर्मल्स यानि कि जिस हम ली है यह फैमिली है उस समय मलिक को भी जो है उसकी ताकत को बिस्किट पर आपको भी
ज्यादा किया जाएगा जैसे कि एडजर्नमेंट मोशन जो है वह भी वह जो है वह ला सकता है कोई भी मेंबर है वह जर्मन रोशन ला सकता यह फैमिली को जो है वह उस टाइप के सेक्शन को स्टॉप करने का कह सकता कि आप जो इसको तहरीके अनिल तिवारी कहा जाता है कि इस टाइम पर आप इसको स्टॉप करें अब इसको पर मजबूर डिबेट होगी नेक्स्ट नाइन के लिए यह लाइबेरिया जैसे पहले नहीं था उसके बाद जिस सेपरेट सेक्शंस का जो है वह कहा गया कि मुसलमानों की डिमांड थी के पहले अक्षर ठीक है आपके मान
लिया पुलिस हर जगह नहीं माने हर सूबे के अंदर कुछ दिनों के अंदर से अपॉइंटमेंट ऑटोमेशन और यह कहा गया कि कमीशन जो है उसको पॉइंट किया जाएगा जो 10 साल के बाद यह जो कमीशन है यह 10 साल के बाद क्या करेगा जी 10 साल के बाद देखेगा कि यह जो अभी इस टाइम पर लॉस जो है वह लेकर आए हैं यह जो एक है यह टेस्ट कैसा रहा इंडिया के लिए यानि इसके ऊपर जो है वह फीडबैक जिसको कहते हैं कि वह फीडबैक 10 साल के बाद हम लेंगे कमीशन की सूरत में यह
कमीशन जो बनाएगा और फिर इसके अंदर सबसे इंपोर्टेंट चीज होती वह तयार चीज सिस्टेमेटिक अयाची सिस्टम क्या था यह सूबों के अंदर दो तरह के जो है वह इस तरह रावत होंगे सूत्रों के अंदर ठीक है यह कट प्रिवेंट है तो उसके अंदर जो शेरावत है जो थोड़ी है वह दो तरह की होगी और दो तरह के मिस्ट्रीज वहां पर होंगी एक रिसर्च सब्जेक्ट होंगे इन व होंगे जो कि गवर्नर गवर्नर के सेक्रेटरी जो है वह इसको करेंगे जैसे कि दिल्ली के डिफेंस इस तरह कीजिए और सबस्क्राइब घृत सब्सक्राइब करें और सब्सक्राइब वह लोग होंगे
वह घ्र घ्र अपने घी आजादी का तो यह काफी अच्छा स्टैंड तो उस टाइम पर के सुखों कम से कम इतनी आजादी तो दी गई यह जो ट्रांसफरेबल सब्जेक्ट से यह जो है यह अचीव थी यह सिकंदर बाकी जो रिजल्ट है वह तोड़ने के पास से पहले से ही अच्छा डिविजन आफ प्रोविंशियल एडमिनिस्ट्रेशन अब जो पुरुष व्यक्ति उसकी तक सीमित कर दी गई लेकिन स्कैन के तौर पर यह फिर अगर ओवरऑल बात करें इसका आउटकम क्या रहा है यह फीडबैक हां तो फिर हुआ उसकी वजह यह थी कि पॉलिटिकल टर्म ऑयल था वह ज्यादा अफरा-तफरी
थी जो है वह हिंदुस्तान के अंदर ठीक है उस टाइम पर यह जो टाइम चल रहा था 1919 1920 का क्योंकि अवॉर्ड्स एंड हुई थी तो इसी वजह से जो है वो काफी ज्यादा अफरा-तफरी मौजूद टीम इंडिया के अंदर ठीक है तो आगे बढ़ते हैं मैं पौंछ मिनट हो गए हमारे नेक्स्ट बात करते हैं जो खिलाफत मूवमेंट की खिलाफत मूवमेंट भी जो है वह 1919 में स्टार्ट हुई और 1948 तक जो है यह 1924 तक आप इसे कह लें यह गई ठीक है अ खिलाफत मूवमेंट क्या है यह प्योर घी जो है वह मुसलमानों की
तहरीक की लेकिन इसके अंदर जो है वह हिंदुओं ने दिया कांग्रेस ने भी उन्हें भरपूर साथ दिया इनका और सबसे पहले किसकी बैकग्राउंड की बात की जाए तो वर्ल्ड वर ज 1954 में स्टार्ट हुई और 1918 में खत्म हो गई और वर्ष में क्या हुआ कि रिपोर्टर की था जो कि उस टाइम पर ऑटो में इंक्वायरी था यह फैसला फतेह उस्मानिया जो था ठीक है फिर हफ्ते उस्मानिया कि अ खिलाफ इस मामले में फैसला किया जर्मनी का साथ देने का इस वर्ल्ड व फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के अंदर तुझे इसने जमने का साथ देने का फैसला
किया तो जो अलाइव पावर थी जिसको रूल कर रहा था यह जिसका ऐसा बर्ताव मियां ठीक है तो उन्होंने क्या किया जी उन्होंने जंग इनके खिलाफ लड़ी और तुर्की और जर्मनी को शिकस्त योग्य नहीं जर्मनी को फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के अंदर शिकस्त होगी अब जैन हो रही थी तो उस टाइम पर जो बर्तानिया था इन्होंने यह कहा था इंडियन से कि और खास करके इंडिया के मुसलमानों से भी आप अगर हमारा साथ देंगे जान के दंत ठीक है क्योंकि मुसलमान तो इसको चाहते थे मुसलमान तो खिलाफत को चाहते थे ओटोमन अंपायर को मानते थे इंडिया
के अंदर क्योंकि खिलाफ जो है मुसलमानों के लिए मुकद्दर सुधर रहा है हमेशा से ठीक है हजरत अबू बकर के बाद से तो इन अवशेषों के पास है जब के खिलाफ 60 हुई तो उसको भी मानते हैं ठीक है तब तक चलती रही तो ऐसे में क्या हुआ कि मुसलमानों ने यह कहा कि हम आपका साथ देंगे यहीं अंग्रेजों को यह कहा कि हम आपका साथ देंगे बगैर किसी शर्त के ऊपर आपका साथ दे कि आप अगर की जंग जीत जाते हैं क्योंकि तो जंग हो रही थी अगर आप जंग जीतते हैं तो जितने की
सूरत में आप क्या करेंगे जो खिलाफत उस्मानिया है उठो आने वाले जो है इसको नुकसान नहीं पहुंचाएंगे इससे व करे नहीं करेंगे लेकिन जब ब्रिटिश अजीब और जीत गए तो उन्होंने क्या किया खिलाफ दुश्मनों को तोड़ना शुरू कर दिया यह वादा खिलाफी की तो ऐसे में क्या हुआ एक मुमेंट जहां पर इंडिया के बेस्ट की गई यह याद करवाने के लिए अंग्रेजों के भाई आपने तो कहा था कि हम वर्ड जीतेंगे तो हम खिलाफ थे स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे तो आप वादा खिलाफी कर रहे हैं तो इसलिए खिलाफत मूवमेंट आकाश हुआ तो सबसे पहले
क्या हुआ जी खिलाफत कांग्रेस 1918 के अंदर हुई जिसके अंदर जो है वह सबको इकट्ठा किया गया कि भई जो है वह डेकोरम इन सारी की कयादत में यह खिलाफ कौन सा सुई केवल यह क्या हो रहा है और हम इसे कैसे आगे लेकिन जब यह लाया अमल जो है वह तय करना था इसके अंदर तब जो है वह अली ब्रदर्स वह जेल के अंदर थे तो यह भी कहा कि वह इसमें शामिल नहीं हुए तो जब वह जेल से रिहा हुए तो स्थित है वहां पर पहुंचे और फिर मौलाना शौकत अली को की सप्लाई
में जो है वह खिलाफ कमेटी बनाई गई और उन्हें कहा गया कि आप पूरे हिंदुस्तान जो है उसका विजिट करें और हिंदुस्तान के अंदर जो है वह लोगों में यह और उजागर करने बताएं कि अंग्रेजों है वह कितने जो है वह वादा खिलाफ उन्होंने क्या किया ठीक है खिलाफत कमेटी इसी के लवप्रीत खिलाफत वक्त वह बनाया गया तो यह खिलाफ अब आप जो है वह इस राय से मुलाकात की और इस खिलाफत वक्त की जो सबसे इंपोर्टेंट क्वालिटी वह यह थी कि इसके अंदर तमाम के तमाम तरह जो है वह फिर के शामिल हैं नहीं
हर फिर के लोग उपस्थित थे इस आई थे हिंदू थे एडवाइस आफ से मुलाकात की और उन्हें बताया कि तुम वादा खिलाफी कर रहे तो उसने तो उस कहा मैं मानता हूं इस बात को में ब्रिटिश गवर्नमेंट जो है उसको आपकी बात पहुंच जाऊंगा लेकिन मृत्यु गारमेंट ठीक है लाइट सोर्स आफ जूस टाइम पर प्राइम मिनिस्टर थे बर्तानिया के तो उन्होंने जो इसका खास असर नहीं लिया और दूसरा जो वक्ता वह गया युवक ठीक है वह यह गया दूसरा वक्त और दूसरे अपने क्या-क्या चीज वर्ग में जाकर फ्रांस में जर्मनी और इटली में वहां पर
जाकर यू के में जाकर मिठाई वगैरह किए लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ और वह इस बीच में जो जरा वापिस आ गया ठीक है 19 जनवरी 19 को मीटिंग व्यवसाय के साथ जो भी आपको बता दिया कि वह जो है वह उसका जो उसने ऐसा लिया लेकिन ब्रिटिश गवर्नमेंट कोई ऐसा नहीं लिया फिर उससे पहले कुछ होता तो ट्रीटी आफ सेवरल हो गई चाहे 1922 को यह मशहूर ज़माना इक्विटी है जिसके तहत जो है वह टो एंपावर जो है उसको तक सीमित कर दिया गया ठीक है और जिसको आज भी कहा जाता है कि
यह साल बीटी है और सार्वजनिक खत्म होगी तो फिर से जो है वह टमाटर एंपायर यह तुर्की जो है वह मॉडर्न तुर्की फिर से ताकत पड़ेगा तो खैरियत ठीक है तो इसको तक सीमित कर दिया गया और इसी दौरान पर क्या हुआ non-cooperation मूवमेंट जो है 28मई 1922 को जो है वह स्टार्ट हो गई अब यह non-cooperation मूवमेंट जो थी यह स्टार्ट हुई थी यह जो खिलाफत कमेटी थी खिलाफत कमेटी जो अली ब्रदर्स की जो है वह अली ब्रांच इसको रन कर रहे थे तो उन्होंने जो यह प्रपोजल दिया के भाई हमें जो है वह
non-cooperation की अधीनता वन कि यह जो है वह तहरीक चढ़ानी चाहिए जिसके तहत उन्होंने कहा कि यदि हिंदुस्तान के अंदर एक संक्षिप्त कुरियन स्पीड तो यह स्टार्ट कर दी उसके पीछे के तौर पर क्या हुआ कि वह रिकॉर्ड किया गया तमाम के तमाम यूके की चीजों का जितनी भी चीज है जो है ब्रिटिश उस टीम का बायकाट हुआ गवर्नमेंट जॉब कब आएगा हुआ इंस्टीट्यूट स्कूल कॉलेजेस का कोर्स का हर चीज का ब्रेकअप हुआ कि ताकि जो प्रश्न है वह मेल्ट किया जा सके इस दौरान फिर क्या हुआ जी पर इज्जत मूवमेंट हो गई 1922 अंदर
क्योंकि अब जब हिंदुस्तान के हालात काफी ज्यादा खराब हो गई एक तो वहां पर non-cooperation मूवमेंट चलना स्टार्ट हो गई दूसरा तेरी के खिलाफ भी चल रही फिर वही जो है वह अपने आखिरी दम ले रही थी तो ऐसे में जजमेंट हो गई और इज्जत मूवमेंट मौलाना अब्दुल बारी सांप और मौलाना अबुल कलाम आजाद साहब जो है इन्होंने जो है फतवा दे दिया और फतवा क्या दिया जी के हिंदुस्तान जो है वह दारुल हरब है और अब यहां पर रहा नहीं जा सकता इसलिए यहां से इज्जत जो है वह गायब हो गई है तो ऐसे
में एक बड़ी तादाद के अंदर जो है मुसलमान जो है तकरीबन को 5 लाख से लेकर वह तकरीबन 15 लाख तक माना जाता है मुसलमानों ने पाकिस्तान की तरफ की व्रत की सौरभ का निशान में शुरू में तो वेलकम कहा और तकरीबन कोई 18 से 20 हजार के करीब जो है वह उन्होंने महज जिनको रखा लेकिन उसके बाद मैंने अपने फर्ज बंद कर दिए और वह मुसलमान जो कि भूनने पौने दामों यह अपनी प्रॉपर्टीज को अब जो भी विषय या बचा हुआ था इंडिया के अंदर उसको सेल करके गए थे तो वह वापस आने का
बिल भी नहीं रहे लेकिन वह कुछ लोग रास्ते के अंदर जगह यौन कबूतर के रास्ते में नजर आई इतना ज्यादा जो यह जितने असर डाला और इसने हिंदुस्तान के ऊपर भी बहुत बुरा असर डाला फिर मोहल्ला प्राइजिंग हुई अब वो प्लेन जो है वह बगावत हुई तो मोपला बगावत की थी यह मामला जो है यह मालाबार के साहिल जो है ठीक है मुंबई के साथ यह मालाबार के शाहीन के ऊपर जो है यह वो लोग थे जो कि मुसलमान लेकिन अब हे यह अरब जो कबीले थे उनके मुसलमान थे उन्होंने जो है फिर केरला जो
है वह इकट्ठा होना चाहिए जैसे के लिए तो इंच ऊपर जब फायरिंग कर दी गई और 409 मोहल्ला लोग वहां पर शहीद हो गए ऐसे में और बाकियों ने गाड़ियों में भरा और वहां लेकर चलेंगे साथ लोग बहुत दम घुटने घुमर घाल तो इसकी वजह से क्या हुआ कि और ज्यादा हालात खराब हो गए इसी दौरान इंडिया के अंदर ऐसे में क्या हुआ गांधी जी ने जो है वह सिविल डिसऑबेडिएंस की मोमेंट कर दी 1922 के अंदर यानि 1922 में जो है वह यह कहा गया कि भई अब यह आप यह पीछे देखिए बहुत बड़े-बड़े
जड़ से स्टार्ट हो गए क्योंकि गांधी जी ने कहा कि यह सब बाहर आ जाओ तो ऐसे मेल्ट हो गई फिर चोरा चोरी का वाकया हुआ कि मूवमेंट में एसिड सुपर इसमें कहा गया कि टैक्स नहीं पेश किया जाएगा तो जब एक जलसा-जुलूस हो रहा था या मिश्रा के मोमेंट तो ऐसे में पुलिस ने वहां पर क्यों बैठा है कि और ने रोकने की कोशिश की तो वह जो मुजाहिर इन थे उन्होंने क्या किया जो यह जो छोटा सा गांव था चोरा चोरी फैजाबाद के अंदर ठीक है यहां पर थाने को घेर के उसे आग
लगा दी और 22 पुलिस वाले जिंदा जल गए अब ऐसे में फिर गांधी जो है वह नॉन वायलेंस के मानने वाले थे तो गांधी ने जो है वह अपने आपको यह कांग्रेस को सेट कर लिया सोमेश्वर इसलिए यह मोमेंट जेरी के खिलाफ आप अपना दम तोड़ गई तो रोल्फ कांग्रेस है वह यहां पर एंड में बड़ा नेगेटिव प्रभाव घर के नेगेटिव रोल की वजह से जो इतना प्रेशर बिल्ड हुआ यह जो इतना इन थिस क्लास बर्दाश्त सारे के सारे जो है वह जाया होगी इससे फिर क्या हुआ 1923 के अंदर जो है वह खिलाफत ही
खत्म हो गई जो कमाल अतातुर्क हफ्तों में पुदीना उस कर दिया के खिलाफ पर जो है वह इससे खत्म हो खिलाफत का पौधा और मॉडर्न तुर्की जो है उसकी बुनियाद रख दी तो इससे यह खिलाफत मूवमेंट जो है वह बिल्कुल अच्छे और बुरे पक्ष के साथ हिंदुस्तान के अंदर खत्म होगी ठीक है है आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं साइमन कमीशन 1928 कि किस साइमन कमीशन जो है वह क्या रहा है तो साइमन कमीशन कि देखिए अगर बात करें हम केवल साइमन कमीशन क्या है तो वह जो बात कही गई थी 1919 के अंदर
हमने देखा था कि जो 1919 काइनेक्ट है उसके अंदर कहा गया था कि एक कमीशन बनाया जाएगा और वह कमिशन 10 साल के बाद ठीक है 10 साल के बाद क्या करेगा ऑब्जेक्ट करेगा वह तमाम के तमाम रिफॉर्म्स बढ़ाया चीज सिस्टम का के भाई उसने इंडिया के अंदर जो है वह क्या फर्क डाला या इंडियन पॉलिटिक्स है उसके ऊपर क्या उस का असर हुआ तो अब उसका जायजा लेने के लिए जो 1927 के एंड में योनी के उनको भेजा गया और 1948 में जो यहां पोंछे साइमन कमीशन सात लोगों पर मुश्तमिल एक वक्त जो है
वह भेजा गया आप और इसको अगोरा कमीशन भी कहा गया ठीक और गोरा कमीशन क्यों कहा गया क्योंकि इसके अंदर सारे के सारे जो है वह गोरे शामिल थीं अंग्रेज से सारे के सारे कोई भी हिंदुस्तान ही जो है उसके अंदर शामिल नहीं था को इंडियन शामिल नहीं था इस वजह से जो है वह आप यहां पर यह पिक्चर के अंदर देखने गो बैक साइड का स्लोगन दिया व है कि भाई साहब वापस जाएं लिखित क्यों श्रवण को यहां पर वेलकम नहीं किया गया बल्कि उसे वापस जाने का कहा गया तो 2598 तो यह सर
जॉन साइमन की जो है वह सब में 90 अपनी रिपोर्ट पेश की सबसे पहले जो चीज सिस्टम है वह जो हमने था कि केंद्र कहां गया कि वह सिस्टम होंगे और दूसरी जगह ट्रांसफर होंगे तो उनको खत्म कर दिया जाए क्योंकि जो चीज शीघ्र के लिए अच्छा नहीं वह खुद सिस्टम जो है वह नहीं हिंदुस्तान को और यहां पर फेडरल सिस्टम है उसको चाहिए मतलब है कि 15 दिन के अंदर यह सिस्टम घ्य होंगी और वह किसी को सिस्टम को कहा गया और न्यू इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन घ्र इसको जो है वह है कि नए लाइन की
जरूरत है शरीर के संगीत अब यह सबसे इंपोर्टेंट यहां पर रहा इनका यह तो फाइल सिस्टम पर पोस्ट किया दूसरा कहां के इंडिया को नए आयाम की जरूरत है ठीक है तो इस यौवन क्वेश्चन भी अपनी रिपोर्ट लेकर चला गया लेकिन हिंदुस्तान एवं मैं की तरफ से इसको कोई भी जो है वेलकम नहीं किया गया कोई भी फंसी रही जो है वह इसे नहीं मिली है है आगे बढ़ते हैं नेहरू रिपोर्ट 1928 यानि 1928 के अंदर जो है वह नेहरू रिपोर्ट जो है वह सामने आती है तो यह मोती लाल नेहरू साहब जो है वह
आपको सामने दिखाई दे रहे हैं इनकी सब ही में जो है वह ऑल पॉलीटिशियन पास होती है इन तमाम के तमाम जो पार्टियां हैं उन पार्टियों को जो है वह जमा किया जाता है उनकी सब राई जो अ मोतीलाल नेहरू साफ करते हैं और इनका जो परपस होता है वह क्या होता है जी लाइन बनाना कि एक नया आयाम बनाया हिंदुस्तान के लिए क्योंकि इस टाइम पर सबसे बड़ा चैलेंज यह तो यह था कि हिंदुस्तानी अपने यह लाइन बना सकें कि हिंदुस्तानी अपने लिए ही नहीं बनाएंगे तो उसका असर क्या होगा कि अंग्रेज एक लाइन
बना देंगे तो अंग्रेजों के आने से बचने के लिए जो है वह मैंने आज बनाने की कोशिश की तो इसलिए जो है वह ऑल पार्टीज कांफ्रेंस हुई और इसमें नेहरू उत्सव जो है वह अट थे अगस्त 19 28 - रिपोर्ट सामने आई तो कृपया हमने जो है इसके ऊपर स्टैंड लिया क्योंकि यह काफी मोटा सिवाना थी कार यादव ने कहा कि भई जो सेंट्रल लेजिस्लेटिव काउंसिल है उसके अंदर one-third श्याम मुसलमानों को पी जाएं इसीलिए रिपोर्ट के अंदर कहां है यह चेंज लाई जाएं प प्रॉपर बंगाल जो यहां पर मुसलमानों की अवधि के मुताबिक इनको
सीट पी जाएं पूर्वी क्षेत्रों में ढूंढ इस उपाय को नौकरी हासिल हो यह जो तीन पॉइंट्स से काट यादव ने कहा यह आपको शामिल करने हैं इसके अंदर जी यह जो नेहरू रिपोर्ट है इस रिपोर्ट के अंदर जो यह आपको शामिल करनी है तब हम उसे मानेंगे तब हिंदू एंड मुस्लिम नहीं है वह भी दोनों के अंदर फटी हुई थी तो यह काफी ज्यादा मसला मुस्लिम लीग के लिए एक मुसलमान पहले से बैठे हुए थे ऊपर से मुस्लिम यह भी जो है वह दो दिनों के अंदर बटी हुई थी तो ऐसे में जो हिंदू जो
है उन्होंने इस को रिजेक्ट कर दिया कंपलीटली यह का दर्शन के जो प्रपोज से इनको रिजेक्ट कर दिया कि हम इन्हें नहीं मानेंगे या नया इंच अंदर ने शामिल नहीं करेंगे अब ऐसे में क्या हुआ कि जब उन्होंने कहा मैंने इसे रिजेक्ट करते हैं तो फिर कायदे आजम ने जो है वह अपने फेमस फॉर तीन पॉइंट्स दिए कि अगर कोई भी लाइन कोई भी ऐसा कॉन्स्टिट्यूशन जिसके अंदर यह 14 पॉइंट शामिल नहीं होंगे ठीक है उसको जो है वह मुसलमान नहीं मानेंगे या मुझसे मिलिए जो है वह इसको घुमाने लगी अगर आप चाहते हैं कि
मुझे मिली घुमाने आपके नए कॉन्स्टिट्यूशन को तो इसके लिए जरूरी है कि क्या किया जाए इंफोर्मेशन पॉइंट्स को आप शामिल करें या नेहरू रिपोर्ट जगह क्योंकि सिर्फ हिंदुओं की बात कर रही थी यह मुसलमानों को नजरअंदाज करती थी बाकी जो है वह देश की बात हो रही थी तो ऐसे में कैद 115 पॉइंट्स अपने सामने रख ये अच्छा प्रोटीन बॉयज वेयर थे सबसे पहला पॉइंट राजी फैब्रिक और ट्यूशन के बाद जो लाइन है वहां की तरह का होगा सबसे इंपोर्टेंट चीज यह थी कि वो सात फीचर्स क्या होगा इसमें सबसे बड़ा फायदा क्या है कि
जो सुबह हैं उनको आजादी हासिल होगी तो उसमें जहां मुसलमानों के विकसित देशों में ट्विस्ट वह तो आप रह सकेंगे दूसरा क्या है जी इक्वल प्रोपोर्शन टो थे में हर सुबह को जो है वह एक जैसे को सुबह को नौकरी दी जाएगी ऐसा नहीं जहां पर हिंदुओं की आबादी ज्यादा है उनको तो आजादी वह मुसलमानों को ना हो ठीक है माइनोरिटीज पिमगेसन जो है वह होगी यानी कि हर रोज सुबह के अंदर मरकज के अंदर भी फास्ट के अंदर भी और सुबह के अंदर भी जो है वह क्या होगा माइनारटीज को भी जो है वह
इस साल दिया जाएगा और नंबर तो क्या है जीत सेंट्रल लेजिस्लेटिव काउंसिल जो है उसके अंदर हम वन थर्ड रिप्रेजेंटेशन जो है वह मुसलमानों को दी जाएगी जो इस मिली है यह नहीं कि इस सेंटर की उसके अंदर मुसलमानों की 108 होंगी नंबर फाइव पॉइंट्स का सेपरेट ए रिप्रेजेंटेशन फॉर ऑल माइनारटीज और जो माइनोरिटीज है जो अकलियत हैं उनके लिए जो है वह में खूब हर जगह जो है वह रिलेशन मौजूद होगी अलग से नंबर सिक्स पॉइंट था मुस्लिम मेजॉरिटी प्रोटेक्टिव जहां पर मुसलमानों की जो मेजॉरिटी है उसकी हिफाजत की जाएगी जिस सुबह के अंदर
है क्योंकि जहां पर हिंदुओं की मैच्योरिटी है तो वहां पर की प्रोडक्शन बहुत ज्यादा बड़ा चैलेंज है ठीक है नंबर सेवन प्वाइंट्स आफ माइनारटीज को फ्रीडम हस ए लो का जितनी भी अकलियत हैं जो है उनको आजादी हासिल होगी आजादी से मुलाकात वह अपने मजहब को फॉलो कर सकते हैं फ्री लिख फिर आप कोई भी जो बिल है अगर कोई माइनॉरिटी पेश करती है तो उसको वन थर्ड जो है वह पास करेंगे तब बिल पास होगा दवाई पास नहीं हो सकता सिंह जो है उसको मुंबई से सेट करके सुबह बढ़ाया जाए सबसे इंपोर्टेंट यह केपी
की ओर ब्लॉग्स हों भी जो है वह सुखों का त्याग दिया जाए के पीछे जो स्माल मगर भी सरहदी सूबा कुएं पर एनडब्ल्यूएस पीसीज को कहा जाता था ठीक है गवर्नमेंट जॉब जो है उन मुसलमानों का कोटा दिया जाए सबसे इंपोर्टेंट कांस्टीट्यूशनल प्रोटक्शन फॉर आईडियोलॉजी यानि के ऐसा लाइन बनाया जाए या इनके अंदर ऐसी क्लॉक शामिल की जाएं कि जो आईडियोलॉजी है जो मुसलमानों की शिकायत तहजीब तारीफ है हिस्ट्री है ठीक है उसको जो है वह प्रोडक्शन मिलेंगे किसी भी जो माइनॉरिटी उसको प्रोडक्शन मिले नंबर सटीकता 130 प्रेजेंटेशन एंड माइनॉरिटी अफेयर्स मिनिस्टर सेंटर्स और प्रीवेंट्स
कैंसर टैंक वन थर्ड जो है मिनिस्टर्स है उनको मुसलमानों के होंगे यह जो सेंटर के अंदर भी और सुबह के अंदर भी दुश्मन हैं वहां पर भी और सेंटर जो है वहां पर भी जो है वह 100 मिनिस्ट्री से मुसलमानों के पास होंगी और सेंट्रल लेजिसलेटिव असेंबली जो है वह बिल पास करेगी तब जबकि सब यूनिट्स जो है वह भी इसकी इजाजत देंगे यह सब यूनिट्स उसके ऊपर एग्री होंगे अगर सब्सिडी नहीं होते तो सेंट्रल लेजिस्लेटिव इस बिल को पास नहीं कर सकती तो यह प्रोटीन पॉइंट से जो मशहूर ज़माना 14 मुलाकात का इरादों के
जो है वह है जो कि उन्होंने कहा कि अगर नया यह जो है उसके अंदर शामिल किए जाएंगे तो तब जो है वह हमने इनको मानेंगे अदरवाइज हम उस कॉन्स्टिट्यूशन को एक्सेप्ट नहीं करेंगे किसी भी ऐसे लॉक एक्सेप्ट नहीं करेंगे जिसके अंदर यह प्रोटीन पॉइंट शामिल ना हो और यह यौवन की बसीरत मानी जाती है कुछ टाइम पहले वह पॉइंट्स है जो कि मुसलमानों को हिंदुओं के ताप से बचा सकें अ है आगे बढ़ते हैं आगे आ गया अलावा प्रेस 1930 खुदा खत मशहूर ज़माना ठीक है अब खुदा बात क्या है जी के अलावा बाद
के मकाम पर जो है वह जो अलार्मस इकबाल है उन्हें जो कर दिया उसको अलावा डेस्क कहा जाता है इससे पहले क्या हुआ 14.2 है वह यौवन के सामने आ चुके थे है तो अल्लामा इकबाल कैसे पहले हमने देखा कोई जिक्र नहीं हुआ आलू के अल्लामा इकबाल जो है वह बहुत बड़े शायर और फ़लसफ़ी दे और वो अपना रोल प्ले कर रहे थे अपनी बुक्स के थ्रू अपनी पुत्री के थ्रू जो है वह अपना रोल प्ले करें थे इंडियन पॉलिटिक्स के अंदर और जीवनशैली के अंदर अपना रोल प्ले कर रहे थे तो उन्होंने जो सालाना
खुदाई था उसके अंदर जो है वह स्पीच की ओर स्मरण क्या डिमांड किया एक्सेप्ट स्टेट जो है वह डिमांड की ट्यून स्टेटस हम डिमांड कि ठीक है और उन्होंने कहा कि मुस्लिम मेजॉरिटी प्रोविंसेस है जहां पर मुसलमानों की जो है वह अक्सरियत है तो मुसलमानों की अक्सरीयत के जो इलाके हैं जैसे पंजाब हो गया सिद्ध हो गया मैडम यह पीके पीके आज का बंगाल आसाम हो गया यह जो है इनको मिलाकर एक आजाद मुस्लिम रियासत जो है वह बनाई जाए इन मुस्लिम रियासत की बात इन्होंने कि उन्होंने कहा मुझे दिखाई दे रहा है कि इस
इलाके हैं यह कल कोई मुस्लिम रियासत बनेंगे तो इसी वजह से इनको ट्रिम पाकिस्तान कहा जाता है यह पहले बने हैं जिन्होंने यह कहा कि यह राके इन फ्यूचर जो है मुझे दिखाई दे रहा है मुस्लिम स्टेट बनेंगे और ऐसा ही हुआ कि हमने देखा 1947 के अंदर ठीक है ठीक है 17 साल के बाद जो है वह इलाके जो इन्होंने खेत वह इलाके जो है वह पाकिस्तान बने जो इसी वजह से इन को कहा जाता है कि हमने पाकिस्तान का ख्वाब देखा ठीक है तो यह उदय अलाहाबाद था अ है आगे बढ़ते हैं और
आगे है जी इंडियन टैक 1935 अब जो कहानी चली आ रही थी और वह कहानी क्या थी डायन की कहानी थी कि इंडिया में जो है वह एक लाइन जो है वह होना चाहिए और लाइन कैसा होना चाहिए जो इंडियंस को मजबूर हो अब इसके लिए काफी ज्यादा ऐड भी हो चुकी थी हमने देखा 1919 जो है 1999 के अंदर 1919 के अंदर ठीक है अब उसके बाद साइमन कमीशन आया 1945 के अंदर नेहरू रिपोर्ट 1948 के अंदर आई वह फाइट सीन जो के कॉन्स्टिट्यूशन के लिए हो रही थी फिर 1929 के अंडर-14 पॉइंट्स आगे
फिर 1938 के अंदर जो है मैं 2019 के अंदर राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस स्टार्ट होगी इसका संबंध इसके अंदर से टू 31 के अंदर और 32 कैंटीन साल यह राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस चलती रही हूं के अंदर किसी तरह से इंडियन जूनियर हिंदुस्तानी जो है वह अपने लिए कोई लाइन बना सके कॉस्ट कॉन्स्टिट्यूशन बना सके लेकिन अफसोस की बात कि आपस में लड़ते झगड़ते रहे मुसलमान और हिंदू और ऐसे में जो है वह लाइन न बन सका यह मुसलमानों लोगों ने शव मिल गए लाइन नहीं बनाया तो फिर वह अंग्रेजों ने खुद जो है वह अकाउंट बनाया
और उस लाइन को जो है वह जो हमने देखा था साइमन कमीशन जो रिपोर्ट पेश की थी उसकी निगरानी के अंदर जो है उसको सामने रखकर तो एक ही जगह बना दिया जिसको इंडियन एक्स 1935 कहा गया हो कि इसको जो है वह रिजेक्ट किया मुस्लिम लीग ने भी कांग्रेस ने भी लेकिन जब यह फूल नहीं बना सके तो उनके पास कोई सलूशन भी नहीं था इसके सेट करना ठीक है तू क्या था जी शामिल थे शनाया नेहरू रिपोर्ट जिसमें आगे राह टेबल यह सारे के सारे जो मराहिल थे जो तय किए गए इस आईने
के लिए लेकिन यह न बन सका फिर एक पास वश में क्या कहा गया कि फर्स्ट अप्रैल 9037 को यह सबसे पहले यह उबला हुआ 1935 को जो बनना इलेक्शन के टाइम पर इसके फोर्थ पार्ट से और ट्रेन शेड्यूल्स पर मुश्तमिल था यह फेडरल सिस्टम था सबसे पहले क्योंकि इसमें कहा गया था कि डाइजेस्टिव सिस्टम खत्म करके व फकीर ने जाम लाया जाए तो पार्किंजनिज्म इसके अंदर आ गया आफ ट्रॉपिकल चेंजेस सिलाई कि जैसे क्वेश्चन को मुंबई से जो है वह सेट कर दिया गया बर्मा जो है उसको भी सबमिट कर दिया गया इंडिया से
क्योंकि बार गूगल इंडिया के साथ ही था 1965 इससे पहले उसको सेट किया गया और एंड बीजेपी या फिर के पीछे जो है उसको एक प्लेट बना दिया गया और एगजेक्टिव की जो है उसकी बुनियाद रखी गई इसके तहत सब्सक्राइब की गई थी तथा सिस्टम 1919 में इस बात को कहा गया था उसी को subscribe our channel को सब्सक्राइब कर सकते हैं यह जो है वह सारे के सारे कर सकते हैं ठीक है तो यह 1995 में कहा गया कि जो है वह भी को किसी की तरफ क्योंकि यह थी तो वहां से लोग इस
तरह से है लेकिन यह जो है यह इंडियन एक्स है यह किसी को भूल नहीं था लेकिन फिर भी इसके तहत जो इलेक्शंस हुए ठीक है जो इलेक्शंस हुए 1947 के उन्हें इलेक्शंस में जो है वह कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने ही हिस्सा लिया गोपियों ने कुबूल नहीं था फिर भी उन्होंने जो है वह हिस्सा लिया कि अगर बात करते थे इलेक्शंस के बाद की तो इलेक्शंस हुए इलेक्शन कहती है कि तौर पर क्या हुआ 3637 9837 के इलेक्शंस होंगे और इलेक्शंस के बाद जो है वह कांग्रेस और मुस्लिम लीग जो है यह के
बीच में लक्षण से तो इलेक्शंस में 11 सूबों में से आठ में जो है वह कांग्रेस जीत के योनि टोटल 1771 में से 70 60 है वह कांग्रेस जीती तो यह बहुत बड़ी कांग्रेस की कामयाबी मीणा अच्छा इसके बाद क्या हुआ जब कांग्रेस जीत गई तो कांग्रेस ने स्लोगन लगाया कि हिंदुस्तान के अंदर दो ही पावरफुल हैं आप ठीक है जो हिंदुस्तान है यह जो इंडिया है इंडिया के अंदर दो ही ताकते हैं उन्हें झंडे लगा दिए हर जगह पर एक साइड पर तिरंगा लगाया त्रि कलर फ्लैग और दूसरा ट्वीट जो है वह अकाउंट का
झंडा था इनके साइड पर ब्रिटिश और दूसरी साइड पर कांग्रेस है तो मुसलमान जो है मुसलमान नाम की कोई चीज अब यहां पर नहीं क्योंकि बहुत है तो वह यहां पर जीतेगा क्योंकि मुसलमान भी जो है वह कांग्रेस को यह बड़ी तादात के अंदर सपोर्ट कर रहे थे हम यह देखा था ठीक है तो ऐसे में जो मुस्लिम लीग के खास करके मुस्लिम लीग को कहा गया कि मुस्लिम लीग आज से जो है वह उसका कोई वजूद नहीं क्योंकि वहां रह चुकी है तो फिर कांग्रेस मिनिस्टर्स बनी इसके ऊपर जब कांग्रेस मिनिस्टर्स बनी इस साल
के लिए तो ऐसे में कांग्रेस ने क्या किया आलम की इंतहा कर दी थी कांग्रेस ने क्या किया मुसलमानों पर जुल्म ढाने की कोशिश की गाय की कुर्बानी पर पाबंदी लगा दी गई हिंदी लैंग्वेज संस्कृत और उर्दू को खत्म किया गया था उनके ऊपर पाबंदी लगा दी यही नहीं दे सकते वंदे मातरम खतरा भी बढ़ जाता है इसके अंदर ऐसे होते हैं जो कि इस्लाम की सब्सक्राइब की गई मुसलमान नौजवानों को उनको चेंज करने के लिए गांधी ने की थी मदद की दोबारा से जो है वह को जो है वह उनके जो अ एवरी कलर
फ्लैग जो था उसको लहराया गया और मस्जिदों के अंदर जो है वह सूअर छोड़े गए नवाज के टाइम पर डोलक बजाया गया और हर तरह से मुसलमानों की जो शॉप स्थिति के 19वें का दुकानें वगैरह थी उनका रिकार्ड किया गया उनके कारोबार का रिकार्ड किया गया बहुत ज्यादा इन हर तरह से कोशिश की गई कि जहां उसे मलिक इंवोल्व है यह मुसलमान है उनको नुकसान पहुंचाया जाए क्योंकि कांग्रेस के अंदर भी मुसलमान थे फिर भी इसके बावजूद तुमसे मलिक को भी जो है वह काफी ज्यादा टाइम पर टॉर्चर किया है लेकिन फिर भी मुस्लिम ली
अब सलमान के लिए काम करती रही और मैं एहसास दिलाती रही फिर क्या हुआ जी कांग्रेस के की हकूमत खत्म हो गई अब खत्म कैसे हुई कांग्रेस के हुकूमत वर्ल्ड वॉर सेकंड स्टार्ट हो गई 1939 अंदर फिर वही हुआ के अलावा इसके अंदर जो है वह लाइफ इस वेबसाइट पर थी जिसमें जो है वह ब्रिटिश टो थे वह उनके हित थे तो बर्तन में गवर्नमेंट जो थी उस टाइम पर जंग में मसरूफ थीं तो ऐसे में क्या हुआ कि वह कांस्टीट्यूशनल चेंजेस जो है वह लाना चाहती थी तो वह यह कि जो कांग्रेस थी उसने
सोचा कि यह बेहतरीन टाइम है अंग्रेजों को यह के बर्तनों को ब्लैकमेल करने का अगर उस टाइम पर ब्रिटिश गवर्नमेंट टो प्रेशराइज किया जाए तो वह यहां पर सेल्फ रूल के लिए मान सकते हैं और इंडिया को छोड़ सकते हैं तो ऐसे मैंने एडमिनिस्ट्रेटिव फंक्शंस की डिमांड की कई एडमिनिस्ट्रेटिव पवन सिंह यादव बनाई जाए और साथ में क्वांटिटी एयर कंडीशनर चेंज की जो है बात की तो ऐसे में उन्होंने कहा कि अगर आप यह बात नहीं मानेंगे तो हम आपको whatsapp के अंदर सपोर्ट नहीं करेंगी कांग्रेस ने कहा लेकिन ब्रिटिश है उस नींबू को व्हाट्सएप
स्टार्ट हुई थी अपने आपको काफी पावरफुल समझ रहे थे तो उन्होंने जो है रिजेक्ट कर दिया मैंने मानने से इंकार कर दिया फिर नतीजा क्या हुआ कांग्रेस ने जो है वह रिजाइन कर दिया जब कांग्रेस ने डिजाईन किया दुकानदारों ने मुसलमानों को टाइम पर योर में निजात मनाने को कहा यह विधेयक डिलीवरेंस जो है वह 2017 दिसंबर 1979 को जो है वह मनाया गया जो मैंने जो आपके भाई शुक्र करो आपकी कांग्रेस से जान छूटी अब यहां पर सबसे इंपोर्टेंट यह है कि यह फर्स्ट टाइम था पिछले 500 सालों के बाद 8 साल मुसलमानों को
तरे तो 800 सालों के बाद जो है वह कांग्रेस को या हिंदुओं की बात की जाए तो हिंदुओं को मौका मिला मुसलमानों के ऊपर रूल करने का इस वजह से उन्होंने अब उनके दिमाग तो यह छात्रों ने कसर निकालनी है कि वह जो मुसलमान इतना दूर इनके ऊपर करते रहे तो मुस्लिम थोड़े छुट फर्स्ट टाइम इनको मुसलमानों के ऊपर 800 साल के बाद रूल करने का मौका मिला सबसे इंपोर्टेंट है इस वजह से स्विट्जरलैंड की इंतहा कर दी अब ऐसे में क्योंकि अब यह जो ढाई साल से मुसलमानों के लिए जैसे गुर्जर यह तो सलमान
जानते थे इस वजह से मुसलमानों को भी अब जो है वह इलाज हो गया कि अगर हिंदुस्तान के अंदर जो है वह मुसलमानों की कोई जरूरत है कि हिंदुस्तान के अंदर तो वह मुस्लिम लीगी है ना कि जो कांग्रेस के मुसलमान है फिर भी बहुत बड़ी तादाद में लोग सपोर्ट कर रहे थे कांग्रेस को लेकिन फिर भी एक बड़ा तबका जो है वह सैनिकों ने ज्वाइन किया था इस वजह से ज्वाइन किया सिर्फ इस वजह से कि कांग्रेस ने बहुत ज्यादा मुस्लिम ड्राई थे अ है आगे बढ़ते हैं यह रिलेशन की बात करते हैं कि
राधे लाहौर कराची लाहौर क्या है लाहौर के मिंटो पार्क के अंदर 23 मार्च 1940 कोंग्रेचुलेशन पास कि इसको लो रेजोल्यूशन अगर आप धुंधला और कहा जाता है अब हुआ यह कि जब कांग्रेस का रूल एंड हो गया 90 जो कांग्रेस हुआ तो ऐसे में क्या हुआ था उसका इलाज 22 और 23 मार्च को 1940 को लाहौर लाहौर के एक बार किया था लेकिन इससे पहले कि ये हो गई कि जो है वह जो है वह मैंने यह अब स्कूल यूनिफार्म थी तो यूनिफार्म यूनिफार्म तो उन्होंने व्हाट्सएप के अंदर जो है वह भी कोई भी वहां
के अलावा कोई भी नहीं है अच्छी तरह की कोई भी मुमेंट नहीं चलेगी लेकिन फिर भी उन्होंने इसको मानने से इंकार किया तो मैंने फायरिंग खोल दी और 50 जो है वह लोग शहीद हो गए यहां पर तो ऐसे में जो है वह लाहौर के हालात बहुत ज्यादा यह पंजाब के हालात काफी खराब हो गए तो बहुत से लोगों ने कहा एंडरसन को मशवरा दिया कि आप जो है वह लाहौर का जलसा मनसुख करने लेकिन उन्होंने क्या किया उन्होंने इनकार कर दिया और वह जो है वह चैप्टर चले गए इन लोगों को देखने तो ऐसे
में क्या हुआ के जो है हमदर्दी का एलिमेंट भी शामिल हुआ और जब यह जो कॉन्फ्रेंस है यह था कि यदि यह मिशन जो यमुना की दुआ तो इसके अंदर बहुत बड़ी तादाद में इन एक लाख से ज्यादा लोग जो है उसमें शिरकत की और बांस के मुताबिक 5 लाख लोगों ने जो है वह शिरकत की इसके अंदर सिर्फ इसलिए का इलाज हमने जो वहां पर तो हमदर्दी दिखाई वह दूसरा बुक पीछे नहीं हटे ऐसे हालात के अंदर भी तो एक्सट्रैक्शन आप ऐसे में क्या हुआ कि मौलिक हक साहब ने वहां पर रिलेशन पेश की
थी जिसमें कहा गया कि जो शुमार मगर भी सरहदी सूबे में वह उदय पाल ने कहा था बंगाल और आसाम जो है उनको मिला के बुक लिस्ट बनाई जाएं अब स्टेट की बात नहीं की गई पेट की बात की गई क्या आजाद मुस्लिम स्टेट बनाई जाएगी उसको सबसे पहले सपने जो है वहां पर माना इससे इन इंडिया की डिवीजन की जो है बात कीजिए व्हाट्सएप स्टेटस की बात की गई ठीक है उसके बाद क्या हुआ जिसके ऊपर रिएक्शन जाए और बहुत ही साथ ही संज्ञान जले कैसे पहले यहां पर पॉइंट आप समझते चलें कि कार्य
समय पीस पीस के अंदर क्या कहा कि आएगा तो ने कहा कि जो मुसलमानों का यहां पर मसला है हिंदुस्तान के अंदर कि मुसलमान यहां पर ऑलमोस्ट सात करोड़ के करीब है वह मुसलमान इंडिया के अंदर मौजूद हैं तो यह कुछ माइनॉरिटी यानि अकलियतों का मसला नहीं के भाग्य को अकलियत नहीं है आप अगर यह समझते हैं कि मुसलमान अकलियत हिंदुस्तान के अंदर तो यह आपकी गलतफहमी है मुसलमान अकलियत नहीं बल्कि यह इंटरनेशनल इशू है और इंटरनेशनल शुरू किया है कि मुसलमान साथ करोड़ के करीब है यह पूरे का पूरा वतन है यह पूरे पूरा
मुल्क बना सकते हैं इसलिए आपको सोचना होगा और मुसलमानों को एक अलग से होमलैंड देना होगा उनको सब स्टेट्स देनी होंगी तो यह सबसे इंपोर्टेंट यहां पर स्थानीय निकाय अ इस बात को प्रचारित किया कि भई यह मुसलमान एक बटन है कोई माइनॉरिटी नहीं है बेसन से आए हिंदू न्यूज़ पेपर्स इसके ऊपर जो है वह बड़ा ही मजाक उड़ाया इसके ऊपर के भाग यह पाकिस्तान बनाने चले हैं यह हलवा कि इस रिजर्वेशन के अंदर कहीं पर भी पाकिस्तान का जो वर्ड है वह यूज नहीं किया गया था लेकिन वे डोंट के तौर पर जो है
वह कहेंगे पाकिस्तान बनाने चले हैं ब्रिटनी स्पीयर्स ने इसे हाइलाइट किया लेकिन मजाकिया अंदाज में राजगोपालाचार्य साहब जो थे उन्होंने जो है यह कहा कि यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे कि गाय हो और दो भाइयों इसके ऊपर लड़ाई हो जाए उसको आधा काट लें ठीक है इन्हें गाय को दो हिस्सों में काट लें कांग्रेस के मुसलमान थे वह से खुश नहीं थे क्योंकि कांग्रेस मुसलमान मुत्ताहिदा हिंदुस्तान की बात करते थे तक टीम की बात नहीं करते थे मौलाना अबुल कलाम आजाद के साथ जो थे तो उन्होंने जो है वह को नहीं माना जो मुस्लिम
लीग के मुसलमान थे उन्होंने जो है वह इसकी पुष्टि की से माना कि हां जी हम मानते हैं हम कायदा के साथ खड़े हैं यह उम्मीद के साथ खड़े हैं कि हमें सेपरेट स्टेट दी जाए अगर बात की जाए इसकी इंपोर्टेंट की तो हिस्ट्री अंदर बहुत ज्यादा जो है वह इंपॉर्टेंट मानी जाती है हिस्टॉरिकली क्यों क्योंकि यह वह टर्निंग प्वाइंट था कि जहां से जो है मुसलमानों को यह मुस्लिम लीग को खास करके 1 मिनट बाद करना क्या है इससे पहले कि मुसलमानों के राइट्स के लिए कि मुसलमानों को उनके राइट थी एक अलग से
वतन बनाने की रणनीति बनाने के बाद जो है वह कंप्लीट रॉ के अंदर तो इसलिए नहीं तो यह बहुत इंपोर्टेंट टर्निंग पॉइंट तो आगे बढ़ते हैं हैं और आगे बात करते हैं क्रिप्स मिशन कि किस मिशन 1942 कि अ कृष्ण मिशन क्या था कि वर्ल्ड वॉर सेकंड जो है वह चल रही थी 99285 तो यह टाइम पर अपने जोड़ों के ऊपर थी और जो जापान था वह whatsapp पर में शामिल हो चुका था और यह बर्तानिया के अगेंस्ट में था तो वर्तनियां गैस में था तो हकूमत पर तानिया की जो है वह जिन-जिन राज्यों के
ऊपर यह करके हिंदुस्तान के ऊपर और बर्मा के ऊपर हिंदुस्तानी में ब्रिटिश गवर्नमेंट तो इसलिए जो जापान था उसने जो है वह इसका बढ़ना शुरू कर दिया था वर्मा की तरफ और बर्मा को क्रॉस करके इसका अगला टारगेट इंडिया था तो ऐसे में जो है वह फिर अप इंडियन सपोर्ट बहुत ज्यादा जरूरी थी कि जो कांग्रेस कि वह चाहती थी कि अगर जापान आएगा इंडिया के अंदर तो यह जापान को सपोर्ट करेंगे क्यों क्योंकि अंग्रेजों ने यहां से निकालना है इसकी जापान को सपोर्ट करेंगे तो इसलिए अब अंग्रेजों ने यह देखा योनी के ब्रिटिश गवर्नमेंट
यह देखा कि अब जो है वह हिंदुस्तानियों की सपोर्ट जो है वह बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है इस वर्ल्ड वॉर सेकंड में और इस व्हाट्सएप को जीतने के लिए तो उन्होंने क्या किया कि उन्होंने एक जो है वह मिशन भेजा तीन अपराध पर मुश्तमिल जिसको जो टाइट किया सैफ ने और यह मिशन jodi चार मार्च 1942 को जो है वह इंडिया पहुंचा और इसमें जो है वह अपने प्रपोज है पहले पॉलीटिकल पार्टी से मीटिंग की और उसके बाद अपने प्रपोजल सामने रखे ताकि जीरा से इंडियंस की जो है वह हिमायत हासिल की जा सके तो प्रपोज़
किया कि आप यहां पर सबसे पहले प्रपोज को देखिए सबसे पहले कहां गया जी के जो वॉर है जब वह खत्म होगी इंजन जो है वह खत्म होगी तो उसके साथ में पर एक लेजिसलेटिव काउंसिल जो है कानून सांस इस फैमिली जो है वह इस्टैबलिश्ड की जाएगी उसका के अमल में लाया जाएगा और जो कानून साथ इस हम ली है उसके जो अज्ञान है उनका इंतखाब जो है वह प्रोविंशियल असेंबली से किया जाएगा और यह जो प्रोफेशनल समय से किया जाएगा तो उसके बाद ही अपना नया कॉन्स्टिट्यूशन भी बना सकती है यह फैमिली होगी कानों
शामली अपना आइन भी बना सकेगी हिंदुस्तानियों को लाइन बनाने का त्योहार दिया गया और रॉयल स्टेग से शाही रास्ते वह भी जो है वह इसमें शामिल हो सकती हैं अपनी मर्जी के साथ ही रास्ते और इंडिया को जो है वह डा क्विक टिप्स दिया जाएगा यानी आजाद कर दिया जाएगा एक ऐसा स्टेटस डोमिनियन का कि जिसके कुछ हद तो ब्रिटिशों के पास होंगे बाकी जो है उनको आजादी नहीं अपना लाइन वह बना सकेंगे डिफरेंसेस पॉज़िटिव है जब तक जान खत्म नहीं होती वह तब तक जो है वह ब्रिटिश कमेंट की ही होगी ठीक है उसके
बाद प्रोविंशियल इलेक्शंस जो है वह के बाद करवाए जाएंगे सुबह लक्षण भी होंगे ठीक है और यह तो आप इसे कंप्लीट लिख सेट कर सकते हैं या जो है वह कंपलीटली रिजेक्ट कर सकते हैं यह कहा गया इन प्रपोजल्स के अंदर बीन प्रपोज्ड ऊपर यह रिएक्शन क्या या कांग्रेस कार्यकर्ता कांग्रेस वर्किंग कमेटी टू अप्रैल 1962 उसका इलाज हुआ उन्होंने कहा कि हमें इन प्रपोजल से पाकिस्तान की बू आती है या पाकिस्तान बनता दिखाई देता है ठीक है तो इसलिए हम इनको नहीं मानेंगे प्रोविंस आफ फ्रीडम जो है इन्हें बिलकुल क़ाबिले क़ुबूल नहीं था क्योंकि तब
सलमान जो है वह स्टेट्स है जहां पर मुसलमानों की अक्सरीयत तो इसका मतलब वह शरीयत में वहां जुदा हो सकते थे इस तरह के भी हमें यह कबूल नहीं तो इंडियन फ्रीडम को चाहते थे कि हिंदुस्तान अबे वह आजादी मिले असल में उनका परपस भी यही कहा कि उन्हें का अगर हमने इनको इस चैप्टर लिया तो इसका मतलब यह जो में प्रेशर बिल्ड किया है 2 साल पहले यह तीन साल पहले जब हमने कांग्रेस की मिनिस्ट्री से डिजाइन किया था तो फिर उसका प्रश्र का फायदा नहीं होगा इसी चाहती थी कि इस टाइम पर कोई
भी बाद जो है वह एक्सेप्ट न की जाए बल्कि कहा जाए यहां से छोड़कर जाएं और हम सेल यहां पर करें तो गांधी का रिस्पांस किया था कि वह एक आउट डेटेड चेक है यानी एक ऐसा चेक है जो आप जो है जिसकी डेट निकल चुकी है तो आप मेहरबानी करके इसको हमें ना बताएं मुस्लिम लीग के रिएक्शन किया था मुस्लिम लीग ने भी रिजेक्ट किया क्योंकि हमें इसमें पाकिस्तान बनता दिखाई नहीं दे रही कांग्रेस ने कहा पाकिस्तान बनता दिखाई दे रहा है उसमें लिखा है बनता दिखाई नहीं दे रहा इंडियन यूनियन जो है उसको
इस बात पर उसे मलिक को एतराज था इंडियन यूनियन के ऊपर भिक्षु इंडियन यूनियन जो है उनको ख्याल यथावत यह इंडियन यूनियन बनाना चाहते हैं सपोर्ट नहीं करना चाहते तो कांग्रेस की मेजॉरिटी होगी समय के अंदर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का यह हाल था तो ऐसे में कांग्रेस को भी जो लो है वह पास करवा सकती कि जो एक्जिस्टिंग लो है उसको चेंज भी कर सकती है तो इसलिए यह जो है वह बिल्कुल भी क़ाबिले क़ुबूल नहीं था तो इससे जो किस मिशन था वह भी यानि कि फेल हो गया है है आगे बढ़ते हैं
है और बात करते हैं को इंडिया मूवमेंट की 1942 में ही जो है यह जो क्रिप्स मिशन आया तो कृष्ण जब नाकाम होकर वापिस चला गया तो क्विट इंडिया मूवमेंट स्टार्ट होगी अब क्विट इंडिया मूवमेंट स्टार्ट हुई थी यह प्योर घी जो है वह कांग्रेस की एक मुमेंट मानी जाती है और कांग्रेस के मोमेंट क्यों मानी जाती है क्योंकि कांग्रेस से उस टाइम पर मुकम्मल तौर पर इस तैयारी में थी कि किसी तरह से जो है वह हिंदुस्तान के तैयार है उनके पास आए और जन्म ज्यादा ज्यादा प्रेशराइज किया जा सके अंग्रेजों को और अंग्रेजों
है यहां से छोड़कर भागे तो ऐसे में कांग्रेस में पहले बता चुका हूं कि कांग्रेस इरादा कर चुकी थी कि जापान को जो है वह सपोर्ट करेंगे क्योंकि जापान वह वर्मा में पहुंच चुका था तो ऐसे में उनका खयाल ही था और कांग्रेस जो है वह एक आज़ाद हिंद फ़ौज जो है वह भी बना रही थी जापानियों की मदद से है जो कि वह जो कि वह किसके खिलाफ अंग्रेजों के खिलाफ जो है वह लड़ेगी तो उनका भाग्य था का यह जो है वह इससे कंपलीटली दूर चोरकारसा ने मुसलमानों को भी यह कहा कि भई
आपने जो आयुर्वेद इंडिया मूवमेंट से दूर ही रहना है क्योंकि आपने आपके साथ शामिल नहीं होना तो अभी गांधी जी जो है वह जिससे सिर्फ करके निकलें यह थे तो उनको अरेस्ट कर लिया गया और 60 हजार लोगों को जो है वह अरेस्ट किया गया और बड़े बीड्स को अरेस्ट करके जेल में डाल दिया गया या फिर हाउस अरेस्ट को उनके घरों पर जो है वह कैद कर दिया गया और फिर 1945 में जब वह और खत्म हुई तो उन सबको छोड़ा गया सिर में जो गांधी जी हैं उनको 1944 मन की सहज है वह
ठीक नहीं थी तो उनको जो है वह रिहा कर दिया लेकिन यह से लेकिन जब उनको जेल में डाला गया तो उसमें क्या हुआ क्या इतनी बड़ी तादाद में इंडिया के अंदर हिंदू थे तो फिर एक मुमेंट चली सिविल डिसऑबेडिएंस इन क्विट इंडिया मूवमेंट काफी ज्यादा कामयाब भी रही कि मुझे बड़ी लेडीस को डाला गया तो 12 से नाकाम होना चाहिए था लेकिन ऐसे मैं बहुत से लोग जो है वह बाहर निकल आए और जो बहुत से लोग बाहर निकले तो उसमें जो है वह ज्यादा क्विड हुआ अंग्रेजों के ऊपर आगे बढ़ते हैं एक घंटा
तो इसमें जो है वह चुके हमारी वीडियो को शेयर फॉर्मूला 9 4 राजगोपालाचार्य साहब जो है उनका फॉर्मूला आ चुका है अब यह राजगोपालाचार्य साहब जो है उन्होंने फॉर्मूला पेश किया नाइट इन फ्लोर के अंदर एक सलूशन पेश किया था ठीक है जिसको शेयर फॉर्मूला कहा जाता है और यह सामने जो आप उनको वह फोटो फिरता नजर आ रहा है आपको तो क्विट इंडिया मूवमेंट जो है वह एक किस्म की नाकाम हुई उसके बाद जो है वह गांधी जी भी जेल में थे बाकी लोग भी जेल के अंदर थे तो कांग्रेस वह सेल्फ रूल चाहती
थी तो ऐसे में जो राजगोपालाचार्य था यह समझते थे कि अगर हिंदुस्तान जो है हिंदुस्तान को के सेल्फ रूल चाहिए या अंग्रेजों से जो है यह ब्रिटिश है उनसे आजादी चाहिए उसके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है कि मुसलमान है वह साथ दें क्योंकि जब तक मुसलमान साथ नहीं देंगे जो 84325678 ओढ़ के कई मुसलमानों को नजरअंदाज किया जाए तो हिंदुस्तान के अंदर आजादी बहुत ठीक है ठीक है तो ऐसे में इन्होंने जो है वह यह कहा कांग्रेस की तरफ से कोई मदरासी फैमिली के रुके थे और उन्होंने यह कहा कि मुसलमान आठ करोड़ के करीब
है तो मुसलमानों में साथ शामिल करके जो है वह आगे जाना चाहिए और मुसलमानों को यह कहा कि अगर हम आपको साथ शामिल करते हैं तो आप क्या करेंगे आप तो इंडिया की डिवीजन में इन तक टीम जो होगी इसमें हमारी मदद करेंगे दूसरा मुसलमान जो है वह से लेफ्ट को सपोर्ट करेंगे तीसरा जो है जब यह जंग खत्म हो जाएगी ठीक है यह जब हम इकट्ठी हो कैमरे तो यहां से भगा देंगे तो फिर कमीशन बना देंगे यह कमेटी बना देंगे तो यह तय करेगी कि कहां-कहां किन किन इलाकों में मुसलमानों की अक्सरीयत है
तो यह बात उन्होंने कहा तो दी ऐसे कांग्रेसी लीडर ठीक है लेकिन उसके बाद रिएक्शन जो आयरिश इसमें क्या हुआ तो मुसलमानों तो नहीं माना लेकिन जो कांग्रेस ही कांग्रेस के अपने ही लोगों ने जो है राजगोपालाचार्य साहब का जीना दूभर कर दिया और इनको पूरी बात है कि इन चीज हाथ के ऊपर यह पर्सनल लाइफ के ऊपर है किए गए यहां तक कि उन्होंने फिर जो है वह कांग्रेस से ब्रिगेड क्वेश्चन दे दिया और इस समय से बिजली साइन कर दिया लेकिन इसका जो प्लस पॉइंट था वह यह था कि फर्स्ट टाइम किसी हिंदू
ने जो है वह एक्सेप्ट किया था कि हिंदुस्तान के अंदर दो ताकते हैं और दूसरी ताकत वह मुसलमान है तो मुसलमानों को जो है वह साथ लिए बिना आगे नहीं बढ़ सकते तो इसका एक प्लस प्वाइंट माना जाता है ठीक है है आगे बढ़ते हैं और 1944 के अंदर यह जो है वह गांधी जी नाटोक होती है यह गांधी जी ना जो है वह में जाकर रात होते हैं 1944 के अंदर ही अब यह गांधी जाम लग रहा तापमान ने फर्स्ट मुज़ाकरात और लास्ट में जा गिरा थे जो गांधी और जिन्ना के बीच में हुए
इसके ऊपर जी हिंदुस्तान के मुताबिक हिंदुस्तान के ऊपर यह सप्रेशन के ऊपर हुए और यह सब टेंपल 1944 के अंदर हुए ठीक है कुछ इंडिया मूवमेंट के बाद जब इनको रिलीज़ किया गया 9 4 के अंदर गांधी को उनके स्वेटर के खराबी की वजह से तो उस टाइम पर जो है इन्होंने पर त्यौहार से मीटिंग सेट कर दी अब यह क्या हुआ यह गांधी वर्सेस जिन्हें टॉक्स कि अब गांधी से जिन्ना टॉक्स किया कि ज्ञान भी थे वह चाहते थे कि इंडिया जो है वह मुत्तहिद रहिए क्योंकि कांड गांधी जी एवं को फिलॉसफर माना जाता
है फ़लसफ़ी को फ़लसफ़ी की हैसियत से उन्होंने जो है वह यौवन को एग्री करने की कोशिश किस बात की ऊपर के वह देखिए आज जो लोग मुसलमान है किसी जमाने में इस सारे के सारे हिंदुस्तानी थे और हकीकत बीण और अगर एक खास वक्त दौरान अगर इन्होंने जो है वह अपना मजहब जो है वह तब्दील कर लिया हो और हिंदुस्तान जब दिल भर के मुसलमान हो गए हो तो इसका मतलब यह तो नहीं कि हिंदुस्तान ही नहीं रहे तो है तो हिंदुस्तानी इसलिए तक टीम की बात न करें लेकिन क़ायदे-आज़म यह बात कही कि बात
यह है कि चलो एक खास वर्क में ही सही यह मुसलमान हुए लेकिन जब यह मुसलमान हो गए ठीक है जब मुसलमान हो गए तो इसका मतलब यह अलग इन्होंने एक उम्र की जो है वह बुनियाद रख दी अब यह लकू है ठीक है अब यह हिंदुस्तानी नहीं रहे हिंदुस्तान के अंदर यह लोगों में भी इंडिया के साथ नहीं रह सकते कि दोनों कि फिलॉसफी स्नान से गांधी जी हमको अग्रि नहीं कर सके इस दौरान 21 खुद भी लिखे गए और पर्सनल मीटिंग भी हुई का ज्यादा के साथ गांधी की लेकिन यह जाकर आज भी
फेल हो गए और कि आखिरी ऐप को क्षीण हिंदुस्तान को मुस्तैद रखने की जिसके ऊपर का यह जो है वह एग्री नहीं हुए क्योंकि वे जानते थे कि अगर गांधी जो है वह तो नॉनवॉयलेंस की पॉलिसी जो है वह ऐड करेंगे लेकिन जो बाकी लोग हैं तो उनका क्या होगा तो वह विस्तार से मुसलमानों के सेट करेंगे ठीक है कि दूसरों से आगे बढ़ते हैं है इसके बाद आता है जो शिमला कॉन्फ्रेंस 1945 यू विल प्ले इन थिस को कहा जाता है ठीक है शिमला कॉन्फ्रेंस क्या ठीक है शिमला के मुकाम पर जो है वह
कांफ्रेंस बुलाई गई हिंदुस्तान के लीडरों की हिंदुस्तान का मुस्तकबिल तय करने के लिए उसको शिमला का रस कहा जाता है वर्ल्ड वॉर सेकंड हैंड हो चुकी थी 1945 के अंदर ऐसे ही है जी 1939 में जो स्टार्ट हुई थी अब जब व्हाट्सएप हैंड हुई और एंड कैसे हुई कि जापान जो है उसको शिकायत हो गई दूसरी साइड में जर्मनी है उसको भी शिक्षकों की ओर अलाइव पावर्स है दोबारा से जीत गई है ने के बर्तन में हुकूमत वह कामयाब रही मगर बर्तन में हुकूमत काम में आप तो रही लेकिन उसे इस जन्म में जो है
वह बहुत ज्यादा नुकसान का सामना करना पड़ा छह साल की जेल के अंदर तो उसमें क्या हुआ कि लॉर्ड विल साफ जो है वह अ 22 राय बने तो उन्होंने क्या किया जाए उन्होंने दोबारा से एडमिनिस्ट्रेटिव कौन से जो है क्योंकि वॉर खत्म हो चुकी थी उनका जो वह इंतजाम है कौन से जोन के पहले मॉडल थी तो अब उसको दोबारा से बहाल करते हैं और व हिंदुस्तान का इंतजाम चला तो उन्होंने जो प्रपोजल दिया ठीक है उसमें क्या कहा कि पूर्वांचल इंटिरिम गवर्नमेंट जो है उसके अकॉर्डिंग वह किसके रिकॉर्डिंग योगी 1935 का जो इंडियन
नेक्स्ट है यह उसके अकॉर्डिंग रिक्वेस्ट भेजो है उनको भी आजादी दी जाएगी उनके अंदर भी इनकी जैसी एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स वफा के अंदर होगी वैसी एडमिनिस्ट्रेटिव से जो है वह सूबों के अंदर भी होगी ठीक है और यह जो है वह फाड़कर सूमो का इंतजाम चलाएगी और एग्जीक्यूटिव काउंसिल की जो मेंबर्स हैव अ हिंदुस्तान से ही लिए जाएंगे तो यह मैंने कहा और फिर इस प्रपोजल को इन्होंने जो है वह बरतनी प्राइम मिनिस्टर से पास भी करवाया और उसके बाद क्या हुआ जी शिमला में जो है इन्होंने 25 जून 1945 को कांफ्रेंस बुलाई 21 टॉप जो
लीडर्स से उनको शिमला बुलाया गया कि आप आए और उन्होंने अपना जो यह कौन के सामने रख लिया और खाता क्या था जी प्रपोज़ किया थे अब वह है वॉइस आफ की तरफ से कि छह सीट से कांग्रेस की होंगी जो एडमिनिस्ट्रेटिव कौन सा लेंस की बात की जा रही है कि यह जो इंतजामी कौन से लोग इसके अंदर जो छह सीट है वह होंगी कांग्रेस की मौत अच्छी तरह मुसलमानों की होंगी और तीन सीट से है वह माइनोरिटीज की होगी ठीक है यह प्रपोजल रखा गया प्रॉब्लम क्या था कि पॉइंट से मुसलमानों की होंगी
उनमें से एक होगा तो मुसलमान लेकिन वह नॉन मुस्लिम लीगी होगा होगा मुसलमान लेकिन उससे मिली उसको झुकना नहीं करेगी बल्कि कोई और पार्टी जो है यह कांग्रेस ठीक है या फिर यूनिट्स पार्टीज है पंजाब की वह इसको करेगी लेकिन उसे क्लिक जो है उसको इन उस नहीं करेगी क्यों क्योंकि मुस्लिम लीग जो है वह नुमाइंदा जमात नहीं और यह 19037 कलेक्शन में बसे हो चुका है अब हम लिख हारी है तो इसका मतलब उसके लिए जो है वह एक सीट जो है वह किसी भी तरह से दूसरे और अंतिम लिखी होगी दूसरा उस करेंगे
और यही जिद थी गांधी की भी ठीक है और यह जो है वह अतिथि सुंदर हटवाना साहब जो है उनकी भी कि वह चाहते थे कि उनकी पार्टी को यह सीट मिले तो 6 कॉन्ग्रेसी पांच मुसलमान जिनमें से चार मुस्लिम लीग की ओर 19 मुस्लिम और तीन जो है वह ली है तो उसका चौथा अपराध प्रवृति क्विड डिपॉजिट बनी थी अब हुआ था कि कालाधन जो है उन्होंने इसके ऊपर स्टैंड लिया और काला धन नहीं मानने से इंकार कर दिया कि मुस्लिम लीग के अलावा भी जो है वह मुसलमानों की कोई सिक्षा मुसलमानों को रिप्रजेंट
कोई कर सकता है चिकन कहा कि अगर हिंदुस्तान के अंदर जो है वह मुसलमानों की कोई नुमाइंदा जमात है को मुसलमानों को रिप्रेजेंट करती है तो वहीं जो है वह तंगी है तो इसका मतलब फैमिली ही जो है वह मुसलमानों को लेकर 1500 के पांचवा जो सीट से मुस्लिम लिखी ही होंगी तो ऐसे में जो है फिर इस बात के ऊपर डेढ़ लाख पैदा हुआ और यह पांचवें भाव फेल हो गई और 17 जुलाई को जो है वह डिवाइस आपने कह दिया कि भी कॉन्फ्रेंस जो है वह नाकाम हो गई अब पता कैसे चलाया जाए
कि यह जो है ठीक है जो कि अदम है वह सच कह रही है जो कांग्रेस के मुस्लिम ही मुसलमानों की वाइफ का फैसला करें कि कौन मुसलमानों की नुमाइंदगी जमा हो गया है है आगे बढ़ते हैं की बात करते हैं इलेक्शंस कि अब देखिए जब शिमला कॉन्फ्रेंस हो गई और शिमला कॉन्फ्रेंस नाकाम हो गई ऐसे और नाकाम क्यों हुई क्योंकि क़ायदे आज़म ने यह मानने से इंकार कर दिया कि मुस्लिम लीग के अलावा भी कोई सियासी जमात है जो मुसलमानों को रिप्रजेंट कर सकती है तो फैसला फैक्शंस पर होना था तो इलेक्शंस हुए मे
1948 1945 के अंदर जो है वह यूके के अंदर इलेक्शंस हुए और उसके नतीजे के तौर पर नई गोमट बनी वहां पर लेबर पार्टी की और लेबर पार्टी को म्यूट बन्नी और मेज़ जो थे वह प्राइम मिनिस्टर बने अब उन्हें जब देखा कि वर्ल्ड वॉर सेकंड खत्म हो चुकी है जिसका बहुत बड़ा नुकसान जो है वह हुआ तो ऐसे में अब जो इंडिया है वहां से तूने कोई खातिर फायदा नहीं हो रहा तो वह ऐसा कर चुके थे कि अब जो है वह इंडिया को लक्ष्य की तरफ ले जाया जाए इसको आगे लेके जायेगी इसका
कोई सलूशन ढूंढा जाए तो ऐसे में क्या हुआ जी की दो बड़ी पार्टियां सामने सामने इलेक्शंस के अंदर इंडिया के अंदर क्वेश्चंस नोट्स किए गए ठीक है दिसंबर 1945 में सेंटर के लक्षण झुके और 1946 के अध्यक्षों के लक्षण सूर्य ठीक है और स्लोगन किया था जी कांग्रेस का स्लोगन था यूनाइटेड इंडिया कांग्रेस ने कहा कि भाई अगर आप हमें वोट देंगे तो हम क्या करेंगे इंडिया को मुत्तहिद रखेंगे इसे एक टीम होने से बचाएंगे और मुस्लिम लीग ने कहा अगर आप हमें वोट देंगे तो हम पाकिस्तान बनाएंगे ठीक है इसका मतलब दो बिल्कुल वॉइस
लोग जाग एक साइड में मुस्तैद हिंदुस्तान है और दूसरी साइड पर है वह पाकिस्तान के स्ट्रगल है तो मुसलमानों को फैसला करना था क्योंकि पाकिस्तान चाहिए यह मुस्तैद हिंदुस्तान चाहिए क्योंकि हम जानते हैं कि मुसलमान जब 9037 क्वेश्चंस हुए थे तो उन्होंने कांग्रेस को वोट किया था यह मुत्ताहिदा हिंदुस्तान को और मुत्ताहिदा हिंदुस्तान को वोट करने का नतीजा उन्होंने ढाई साल उठता था और ढाई साल में देखा था कि कैसा था मुत्ताहिदा हिंदुस्तान इसलिए फैसला कर चुके थे कि इस बार जो है वह पाकिस्तान होगा ठीक है तो अब हम इसे जरा इलेक्शन हुए सेंटर
के फॉर के 200 सीट्स इन टोटल शो में अतिथि मुसलमानों की 38 की 30 मुसलमान जीत के यह बहुत बड़ी कामयाबी है कि सौ फीसद हंड्रेड परसेंट जो रिजल्ट है सेंटर के अंदर मुसलमानों के हाथ में रहा था कि कांग्रेस की जो सीट से 19 उसने 1578 है उसे ज़ोर उसमें से जिंक कांग्रेस ने हंड्रेड परसेंट कामयाबी हासिल नहीं की लेकिन उसे देखते हुए प्रशांत को कामयाबी हासिल की और 86 पॉइंट्स 6% जो है यह रिजल्ट की हो रही मुस्लिम लीग की सुबह की बात की जाए तो सूबों के अंदर जो है वह टोटल फॉर्म
एंड 5c मुसलमानों की ओर 430 श्याम सलमान जीते और 11 में से आठ सुबह मुसलमानों के हुकूमत बने और इस तरह से क्या हुआ जी के कायदे-आज़म की जो बात थी वह साबित हुई के इंडिया के अंदर जो है वह मुसलमानों की वह एडवांस जमा जो है वह मुझसे मिलेगी है और मुस्लिम लीग ने कसम खा सकते हैं 30 है वह इंडिया के अंदर किया अब इन लेकिन इसका आंसर क्या हुआ कि क़ायदे आज़म को यहां से क्लिक को भी इस बात का अंदाजा हो गया कि मुसलमान इस टाइम पर जो है वह मुस्लिम लीग
के साथ हैं और उन्होंने वोट जो किया है वह पाकिस्तान के लिए किया है अब सबसे इंपोर्टेंट चीज थी उन्होंने कार्यक्रम के लिए या 21 मैं आपको मत के लिए वोट नहीं बल्कि पाकिस्तान बनाने के लिए वोट किया तो यह सबसे इंपोर्टेंट है तो यह सबसे इंपोर्टेंट है यहां पर यह इलेक्शंस का नतीजा है वह मुसलमानों के हक में आया आगे बढ़ते हैं नई दिल्ली लेजिसलेटिव कौन कन्वेंशन हुआ 1946 के अंदर ठीक है यह जो मजा ले से कानून सांस है इसका एक गिलास हुआ 1940 के अंदर और यह ग्लास क्या था कि वह तमाम
के तमाम राख्यौ खड़े हैं और यहां पर यह जो लेजिस्लेटर्स हैं जितने भी लोग हैं इनसे जो है वह यहां पर सिर्फ कर रहे हैं तो जो इलेक्शंस हुए उसे लक्ष्मण के हिस्से के तौर पर जितने लोग भी जीते चाहे वह रोमांस इसके अंदर तैं या सेंटर के अंदर से वह सारे के सारे जितने भी जो लोग से अब उनको इकट्ठा किया गया दिल्ली के अंदर ठीक है और उन सबको बैठाया गया केवल बैठो अब हम जीते तो है लेकिन हम क्यों जीते हैं इस बात को जरा आप दोबारा से जो है वह रिपीट करते
हैं तो कि जब ने कहा देखो हम जीते क्यों हैं हम अपने नारे के ऊपर जीते हैं और हमारा नारा किया था हमारा नारा था पाकिस्तान का कि हमने पाकिस्तान बनाना है तो यह याद रखना कि अब जब हम में संलिप्त में जाएंगे तो ऐसा ना हो कि हमेशा बीच में जाकर यह जो स्लोगन है पाकिस्तान कैसे भूल जाएं बल्कि हमने पाकिस्तान के लिए ही जो है वह स्ट्रगल करनी है तो 1946 के अंदर यह क्वेश्चन हुआ और हुसैन शहीद शहर वर्दी साहब जो थे इन्होंने जो है वह रिलेशन पास की जिसमें उन्होंने कहा कि
हमें जो प्रोस्टेट से जो उन्होंने कहा था लाहौर अधिवेशन के अंदर कई हमें जो है वह स्टेट्स रहे वह बनाई जहां पर मुसलमानों के क्षत्रिय थे वेबसाइट पर मगर भी इलाकों दूसरे पर मशीन की लाकर फिर इसको सेट करके कहा गया कि स्टेट बनाई जाए रिमूव जो है वह बनाया जाए इन एक आजाद मुल्क होगा जिसका नाम होगा पाकिस्तान ठीक है जो कि वह आजाद मुल्क बनाया जाए तो इससे फिर उस रिलेशन को इन सबके सामने जितने भी थे उन्होंने पास किया और यह जो लेजिसलेटिव काउंसिल यहां पर एक बार रिपीट हो गया फिर से
कि हमारी अब जो अगली स्ट्रगल है वह सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान के लिए है और किसी चीज के लिए नहीं है है आगे बढ़ते हैं कि अपने मिशन प्लान-1946 का बीमा मिशन प्लान 1946 ठीक है थे कांबिनेशन कैन क्या है अब इलेक्शंस होते हैं और लक्ष के नतीजे के तौर पर जो है वह आपको मत बनती है अब इलेक्शन सब होते हैं तो लक्षण के नतीजे के तौर पर ऑफिस की बात यह है कि आंख मत बनी है यह हुकूमत का के अमल में लाना है अब जो हुकूमत होगी यह डैम गवर्नमेंट जो बनेगी वह
किस तरह बनेगी के हिसाब से बनेगी उसके अंदर जो सीट है वह किस तरह से होगी यह है कि मुसलमानों की कितनी होंगी कांग्रेस की कितनी होंगी माइनारटीज की कितनी होंगी तो इन तमाम बातों को तय करना था तो इनको तय करने के लिए जो है वह तीन लोगों को भेजा गया सर्च टिप्स को शपथ एक लॉरेंस को ओवरलोड व को इन लोगों को भेजा और यह क्योंकि कैबिनेट के मेंबर देते ब्रिटिश रैबिट के मेंबर थे इसी वजह से इसको जो है वह कैबिनेट मिशन प्लान कहा गया और को 1946 में भेजा गया यह 24th
मार्च 2018 अधिक यौन जो है वह पॉलीटिकल पार्टी से पहले डायलॉग्स से उनकी राय जान सके कि किस तरह से जो है वह यहां पर स्पेसिफिक की साख मत बनेगी क्वाथ सिक्सटीन में 1946 को जो है इन्होंने प्रॉसेस दिए है अब प्रपोज किया था एक टाइम था दूसरा सिंपली शॉर्ट टर्म यह कहा कि शॉर्ट टर्म में हुकूमत वह बनाएगी पार्टी जो लॉन्ग सब्सक्राइब जो पार्टी को नहीं करेगी इसका मतलब सबसे पहले यूनियन ऑफ इंडिया के जो घ्र घ्र और इस निशान को में ए बी और सी घ्र जो maggi इलाके के पंजाब स्कूल के अंदर
हिंदू शामिल होंगे तेजी से होंगे और शीघ्र कि मुसलमानों के कि बंगाल और आसाम है कि बंगाल और आसाम यह शामिल होंगे ठीक है और इनको इससे एक बार यह बाहरा ग्रुप बनेगी एबीसी करके है अब उसके बाद कहां गया जी जो पॉवर है उसकी जो तक sim है वह किस तरह से होगी कि उसमें सबसे इंपोर्टेंट फॉरेन मिनिस्ट्री टेलीकम्युनिकेशन और डिफरेंस जो है यह तो रहेगा अंग्रेजों के पास ठीक है कि ब्रिटिश गवर्नमेंट के पास यह रहेगा सेंटर के पास रहेगा और बाकी जो है प्रोवेंशियल अथॉरिटी जो है वह भी दी जाएगी सूत्रों को
भी अथॉरिटी जाएगी सुबह खुद मुख्तार होंगे ठीक है सूत्रों के अनुसार हासिल होगी और 10 साल के बाद कोई भी डुबो होना चाहिए सेंटर से डुबो सकता है यह बहुत ही पॉइंट होना चाहिए हो सकता है और जो भी शामिल होंगे इसके अंदर अपनी मर्जी से शामिल होना चाहते हैं तो इस घृणित बनेगी तो यह तो आप इसे क्लिक करेंगे इसे कट करेंगे तो ऐसे में क्या हुआ था का जूस के ऊपर रिएक्शंस आए उनको आप समझना है सबसे पहले मुस्लिम लीग जो है उसने इनको एक्सेप्ट कर लिया उसने काजी हमें कुबूल है इसका मतलब
क्यों क्योंकि मुझसे लिए कुछ बात पर कबूल था कि 10 साल के बाद जब कोई सुबह जुदा होना चाहिए डुबो सकता है इसका मतलब आज नहीं तो 8 से 10 साल के बाद पाकिस्तान तो बन सकता है कि जहां पर muslim-majority हुकुम अलग कर लेंगे कांग्रेस ने इडियट्स को रिजेक्ट कर दिया ठीक है कांग्रेस रिजेक्ट क्यों किया कि 10 साल के वृद्ध हो सके तो इसका मतलब फिर तो पाकिस्तान बन जाएगा फर्स्ट में मुस्लिम लीग एक्सेप्ट किया कांग्रेस से रिजेक्ट किया अब जो वॉइस आफ थे उनका काम किया था जो उन्होंने प्रॉमिस किया हुआ था
उसके अकॉर्डिंग लिया बाबू मत जो है वह मिलनी चाहिए थी मुसलमानों को क्यों कि मुसलमानों इसको कंप्लीट लुक सेट किया था लेकिन वह इस समय अपने वादे से परे और उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को मनाने की कोशिश की और कांग्रेस को कहा कि भई आप जो है वह शामिल हो जाएं तो कांग्रेस ने बाद में जो है स्पीड सेट किया क्योंकि कांग्रेस की जब नेहरु साहब बने जुलाई के अंदर तो नेहरू ने क्या कहा है कि देखो मैं जोंटी तो हमारी होगी संलिप्त अंदर जब इस समय के अंदर हमारी मेजॉरिटी होगी तो हम ऐसा
करेंगे हम इस लोक चेंज कर देंगे जो 10 साल मिला है तो इसमें कांग्रेस ने इसको कट कर लिया बाद में लेकिन फिर बाद में मुसलमानों ने जो है वह हमने जो है उसको रिजेक्ट कर दिया और डायरेक्ट एक्शन डे मनाया किस बात के ऊपर केवल जो वापिस आए है उसने जो है वह अपनी दुकान पर काम नहीं रहा तो इस वजह से दुनियां के जी राशि के दिन मनाया अब यह जो डाइरैक्शन देता राशि बादाम का दे इस दिन जो है वह दंगे फसाद हुए बहुत ज्यादा तोड़ो जलसे-जुलूस हुई और उसके नेतृत्व में बहुत
ज्यादा नुकसान हुआ इंडिया को तो फिर जब देखा वॉयसराय है कि अगर अकेली कांग्रेस को मत बनाएगी तो उसी नींबू को चलने नहीं देगी सेंड एक बहुत बड़ी पॉवर है तो उसने भी मुस्लिम लीग को फिर बैकहैंड पर राजी करने की कोशिश की और एटीएम कार्डों समझते थे कि अगर वह मिलना हुए हकूमत के अंदर तोड़ने का नुकसान है तो ऐसे में उन्होंने भी हामी भर ली और फिर इस तरह से वह भी हुकूमत में शामिल हो गए और फिर इस तरह से जो है वह यह एप्लीकेशन हम यह मान सकते हैं कि यह काम
है आप हो में अपने मिशन के अंदर और अब हम आगे देखेंगे कि मिनिस्टर्स उन्हें उनके लोकेशन किस तरह से हुई है में ब्रेक मत बनती है 1946 के अंदर जी ठीक है अब रुको मत जो है वह किस तरह से बनती है वह इससे बनती है कि सबसे इंपोर्टेंट में रहा है थे लास्ट टॉपिक हमारा जतिन जून का मंसूबा ठीक है जतिन जून का मंसूबा जो है इसको देखते हैं क्या है अब देखिए जब यह फैसला हो गया कि इंडिया को जो है वह डिवाइड करना है उसके हों सिसकियां थे एक तो फाइनेंस मिनिस्टर
मुसलमानों के पास थी तो मुसलमान और हिंदू जूही ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग आपस में इनकी लड़ाई पर चुकी थी दूसरा मोतीलाल नेहरू साहब जो थे वह चाहते थे टैबलेट कहां ढूंढ माना जाए उसमें भी मुश्किल बात थी मैंने उनके साथ वैसा नहीं होने दे रहे थे तीसरा जो कॉलोनाइजेशन का पीरियड था वह एंड बोला था अब यह सबसे की पॉइंट है क्योंकि बाकी जो है वह तो छोटे पॉइंट से लेकिन यह जो है यह क्राइम रिकार्ड था कि कॉलोनाइजेशन क्या था कि ब्रिटिश टो थे जो बर्तन भी थे उन्होंने क्या किया था कि बाहर
के मुल्कों में जाकर छोटी-छोटी कॉल 19 बना ली थी के 1617 के बाद सी तो अब जब देखा उन्होंने कि अब वर्ल्ड वॉर सेकंड जो है वह एंड 1945 के अंदर तो यह वर्ड सेकंडों में बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा गिव एक तरह से जीव व सेकेंड व हारते-हारते जीते थे क्योंकि अगर इस वर्ल्ड वॉर सेकंड के अंदर अमेरिका जो है वह इस रोल प्ले करता और एटम गिरा था जापान के ऊपर तो उसमें क्या होता है कि उसमें उनके लिए बहुत मुश्किल था युक्तियुक्त कि वह इंडिया को बचा सकते हैं जापानियों से तो ऐसे में
जो है वह बना रहा था तुझे यूज की वजह से जीता तो उसको भी बहुत साथ तो इसका मतलब नहीं था उनको बात करते जा रहे थे सब्सक्राइब चीज कि अब उनके लिए यह कि वर्तमान नियुक्त करना मुश्किल हो रहा था कि वह जो ही सब्सक्राइब नहीं बचा था इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वे जो भी करें तो मैंने उनको आखिरी बनाकर भेजा गया और आखिरी कोशिश के तौर पर पॉलीटिकल पार्टीज थी उनसे मीटिंग की और उन्हें कहा कि आप हिंदुस्तान के साथ रह सकते हो तो इंकार किया है बड़े अ छोड़ के ऐसे में
फिर क्या हुआ कि उन्होंने फैसला किया कि हिंदुस्तान को तक सीमित कर दिया जाए तो 311 के तहत क्या हुआ जी कहां गई है जो पंजाब है पंजाब और बंगाल है इन दोनों का अलग-अलग इस्लाम बुलाया जाएगा की संलिप्ता ठीक है पंजाब और बंगाल का पहले अलग-अलग हिंदुओं और मुसलमानों का जो है वह अलग सब्सक्राइब के मुसलमान पाकिस्तान के साथ और इसके साथ तो इससे पंजाब और बंगाल की मुसलमानों की फैसला किया है यह फैसला करेगी जिसका फैसला किया कि उन्होंने पाकिस्तान के साथ घृणा का फैसला शीघ्र ही करेगा क्योंकि उनके पास तो उन्होंने फैसला
किया कि हम पाकिस्तान के साथ शामिल होंगे जो थे माना जाता है कि वह स्वयं की बहुत अच्छे दोस्त हैं और उसके बाद जी के पी के का फैसला लिया इंटरव्यू प्लीज टाइम पर कहा गया तो एंड बीएसपी का जो फैसला था वह सरेंडर मृत्यु के वह रेफ्रेंस हम के थ्रू फैसला होगा यह फ्रंट में फैसला हुआ कि उन्होंने जो है पाकिस्तान के साथ शामिल होना है उसके बाद जी कहां का जो रॉयल स्टेटस है जो ही रास्ते हैं उनकी अपनी मर्जी है कि वह अपनी मर्जी से जिसके साथ भी शामिल होना चाहिए शामिल हो
सकती हैं और जो कॉन्स्टिट्यूशन है यह अपना कॉन्ट्रिब्यूशन भी बनाएंगे अपने कंस्ट्रेशन के तहत अपने हुकूमत को रन कर सकती हैं तो बेसिकली तो 1975 का जो एक्स्ट्रा उसी कोई जो है वह थोड़ा सा चेंज करके लागू किया गया पाकिस्तान और इंडिया के अंदर इसके परीक्षण किया है जो कांग्रेस की आंधी कांग्रेस ने तो उसको सेट किया क्योंकि हालात ऐसे बने लेकिन जो आदमी कांग्रेस की उन्होंने इसके ऊपर जो है वह रिएक्शन बेक यह बिल्कुल मुनासिब नहीं है और यह एक आदमी जो है वह तक टीम है और यह आदमी तक टीम जो है यह
खत्म हो जाएगी जबकि हमारे मुसलमानों भाइयों को पता चलेगा कि भई यह तो गलत काम है तो ऐसे में जो है ना यह दक्षिण खत्म हो जाएगी ठीक है तो इसलिए वहां से लिए कोई मानने को तैयार नहीं थे कांग्रेस के भई यह तक टाइम हो रहा है खासकर के कांग्रेसी मुसलमान जो थे वह भी बहुत बड़े क्रिस्टियन से मुस्लिम लीग यह चाहती थी इसलिए के लिए तो यह बहुत बड़ी सेलिब्रेशन थी तो इस तरह चोदा जुलाई 1947 को जो है वह ब्रिटिश सिस्टम लिए जो है उससे यह पास हुआ यह लोअर थर्ड ऊन का
और इस तरह से हिंदुस्तान को जो है वह तक सीमित कर दिया गया और डॉक्यूमेंटेशन के हिसाब से 15अगस्त को जो है यह दोनों मुल्कों ने आजाद होना था और इससे 14 अगस्त को है वह इस भाई साहब जो अलार्म बैटर सब कराची आए और कराची समरी में सदैव किया और उसके बाद नेक्स्ट जो है वह वापस मुंबई गए और वहां पर जो है दिल्ली में वहां पर 19 लांच किया तो इससे पाकिस्तान वह 14 अगस्त को और इंडिया जो है वह 15 अगस्त को आजादी मनाता है ठीक है तो यहां पर यह जो हमारा
सिलसिला था एक लौंग लेक्चर का जो कि एक घंटा और सोंठ मिनट पर ऑलमोस्ट हम उत्तर मिलता यहां पर एंड हुआ और इसमें हमने देखा नाइन यानि मॉडर्न हिस्ट्री जितनी विधि ठीक है मॉडर्न हिस्ट्री फॉर करते हैं 98 1847 से लेकर 1947 तक कितनी भी स्पीड थी वह यहां पर हमारी कंप्लीट हुई थी और जिस अगर आपको यह स्टेप बाय स्टेप भी कोई वीडियो देखनी है तो उसमें आप जो है न च प्ले लिस्ट मौजूद है उस प्ले लिस्ट अंदर जाकर जो पुरानी वीडियो से वहां पर जाकर देख सकते हैं है और सबसे आखिर में
आप तमाम लोगों को यह जिनको भी जो भी इसके ऊपर जो है वह कोई भी इशू हो कोई भी डाउट हो यहां पर तो वह कमेंट कैंडी बता सकते हैं कि यहां पर डाटा कलेक्ट चूज हुआ है कुछ भी हुआ तो वह कमेंट में जो है वह बता सकते हैं डिश ग्रीस कर सकते हैं ए सेंटेंस फॉर वाचिंग अ