सोचो अगर आज से साल बाद तुम्हारे पास इतना पैसा हो कि तुम्हें हर महीने सैलरी का इंतजार ना करना पड़े। सोचो अगर तुम्हारे बिल्स, ईएमआई [संगीत] और डेली एक्सपेंसेस तुम्हारी मेहनत से नहीं बल्कि तुम्हारे इन्वेस्टमेंट से पूरे होने लगे। सुनने में यह मुश्किल लगता है क्योंकि आज की दुनिया में हर कोई जल्दी अमीर बनना चाहता है। लोग जल्दी प्रॉफिट चाहते हैं, [संगीत] जल्दी सक्सेस चाहते हैं। जल्दी लग्जरी लाइफ चाहते हैं। लेकिन कड़वा सच यह है कि वेल्थ जल्दी नहीं बनती। [संगीत] यही वजह है कि ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी काम करते रहते हैं। फिर भी फाइनेंशियली
फ्री नहीं बन पाते। वारेन बफेट ने एक बार कहा था कि स्टॉक मार्केट इंपेशेंट लोगों से पैसा लेकर पेशेंट लोगों को देता है। और यहीं से शुरू होता है उनका 10 साल वाला रूल। एक ऐसा रूल [संगीत] जिसने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल किया। क्या तुमने कभी नोटिस किया है कि मिडिल क्लास लोग हमेशा पैसों की टेंशन में रहते हैं। सैलरी आती है, फिर बिल्स चले जाते हैं। हर बार जब इनकम बढ़ती है, एक्सपेंसेस भी बढ़ जाते हैं। हर बार जब थोड़ा पैसा बचता है, कोई नई जरूरत सामने आ [संगीत] जाती है
और धीरे-धीरे इंसान मनी ट्रैप में फंस जाता है। लेकिन वारेन बफेट का अप्रोच बिल्कुल अलग था। उन्होंने जल्दी पैसा कमाने की कोशिश [संगीत] नहीं की। उन्होंने टाइम को अपना सबसे बड़ा वेपन बनाया। इस वीडियो में तुम जानोगे कि वारेन बफेट का 10 साल वाला रूल क्या है? कैसे कंपाउंडिंग ऑर्डिनरी इंसान को रिच बना सकती है? और क्यों पेशेंस फाइनशियल फ्रीडम की सबसे [संगीत] बड़ी की है? अगर तुम सच में अपने फाइनेंशियल फ्यूचर को बदलना चाहते हो तो इस वीडियो को आखिर तक जरूर देखना। लाइक करो अगर तुम फाइनशियली फ्री बनना चाहते हो और कमेंट करके
बताओ कि तुम अगले 10 साल बाद अपनी लाइफ कैसी देखना चाहते हो। अब तैयार [संगीत] हो जाओ क्योंकि आगे जो बातें तुम जानने वाले हो वह शायद पैसों को देखने का तुम्हारा नजरिया हमेशा के लिए बदल दें। चैप्टर [संगीत] एक अंडरस्टैंडिंग द 10 ईयर रूल। सोचो अगर कोई इंसान तुमसे कहे कि अगर तुम अगले साल तक सिर्फ सही फाइनेंशियल डिसीजंस लेते रहो तो तुम्हारी पूरी जिंदगी बदल सकती है। ज्यादातर लोग इस बात पर हंसेंगे [संगीत] क्योंकि आज की दुनिया फास्ट रिजल्ट्स की दुनिया बन चुकी है। लोग इन्वेस्टमेंट शुरू करते ही प्रॉफिट देखना चाहते हैं। लोग
बिजनेस शुरू करते ही लग्जरी लाइफ इमेजिन करने लगते हैं। लेकिन वारेन बफेट का माइंडसेट हमेशा अलग था। उन्होंने कभी जल्दी अमीर बनने की कोशिश नहीं की। उन्होंने हमेशा टाइम को अपना सबसे पावरफुल एसेट माना। यही उनका ईयर रूल [संगीत] था। बफेट किसी भी इन्वेस्टमेंट को खरीदने से पहले खुद से एक सवाल पूछते थे। क्या मैं इस इन्वेस्टमेंट को अगले साल तक होल्ड कर सकता हूं? अगर जवाब ना होता तो वह इन्वेस्टमेंट करते ही नहीं थे। क्योंकि उनके लिए इन्वेस्टिंग सिर्फ पैसा कमाने का तरीका नहीं था [संगीत] बल्कि ओनरशिप का गेम था। यही वह चीज है
जो ऑर्डिनरी इन्वेस्टर्स और वेल्थी इन्वेस्टर्स के बीच सबसे बड़ा फर्क बनाती है। आज ज्यादातर लोग स्टॉक्स को लॉटरी टिकट की तरह ट्रीट करते हैं। मार्केट थोड़ा ऊपर [संगीत] गया एक्साइटमेंट शुरू। मार्केट थोड़ा नीचे गया पैनिकिक शुरू। हर बार जब न्यूज़ चैनल्स डर फैलाते हैं, लोग अपनी इन्वेस्टमेंट्स बेच देते हैं। हर बार जब कोई नया ट्रेंड आता है, लोग बिना सोचे पैसे लगा देते हैं। यही रीजन है कि मेजॉरिटी लोग कभी रियल वेल्थ क्रिएट नहीं कर पाते। वारेन बफेट कहते हैं कि स्टॉक मार्केट इमोशंस को पनिश करता है। अगर तुम इंपेशेंट हो [संगीत] तो मार्केट तुम्हारे
पैसे खा जाएगा। लेकिन अगर तुम पेशेंट हो, डिसिप्लिंड हो तो वही मार्केट तुम्हारे लिए वेल्थ मशीन बन सकता है। कड़वा सच यह है कि लोग इन्वेस्टमेंट से ज्यादा एक्साइटमेंट खरीदते हैं। उन्हें स्लो ग्रोथ [संगीत] बोरिंग लगती है। उन्हें ओवरनाइट सक्सेस स्टोरीज ज्यादा अट्रैक्टिव लगती हैं। लेकिन रियलिटी यह है कि सस्टेनेबल वेल्थ हमेशा बोरिंग प्रोसेस से बनती है। धीरे-धीरे लगातार डिसिप्लिन के साथ। अब सवाल यह है कि बफेट पेशेंस को इतना इंपॉर्टेंट क्यों मानते हैं? इसका जवाब कंपाउंडिंग में छुपा हुआ है। शुरुआत में कंपाउंडिंग बहुत स्लो लगती है। पहले कुछ [संगीत] सालों तक ग्रोथ छोटी दिखती
है। यही फेज सबसे डेंजरस होता है क्योंकि ज्यादातर लोग यहीं हार मान लेते हैं। इमेजिन करो कोई इंसान हर महीने ₹1000 इन्वेस्ट करता है। पहले एक या दो साल में रिजल्ट्स एवरेज दिखेंगे। शायद एक्साइटमेंट भी ना आए। लेकिन अगर वही इंसान साल तक कंसिस्टेंसी मेंटेन कर ले तो वही छोटी इन्वेस्टमेंट्स पावरफुल वेल्थ में बदलने लगती हैं। यही रीजन है कि बफेट हमेशा लॉन्ग टर्म थिंकिंग की बात करते हैं। क्योंकि टाइम ऑर्डिनरी इन्वेस्टमेंट्स को एक्स्ट्राऑर्डिनरी बना देता है। लेकिन प्रॉब्लम यह है कि लोग पेशेंस नहीं रख पाते। [संगीत] सोशल मीडिया ने इंसानों को इंस्टेंट रिवॉर्ड का
एडिक्ट बना दिया है। हर चीज जल्दी चाहिए। [संगीत] पैसा भी जल्दी चाहिए। लेकिन वेल्थ और क्विक मनी दोनों अलग चीजें हैं। मिडिल क्लास माइंडसेट की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही है कि वह शॉर्ट टर्म कंफर्ट के लिए लॉन्ग टर्म फ्रीडम सैक्रिफाइस कर देते हैं। सैलरी आई, [संगीत] शॉपिंग हो गई। बोनस आया, नया फोन खरीद लिया। थोड़ा एक्स्ट्रा पैसा आया, लाइफस्टाइल अपग्रेड हो गया। लेकिन वेल्थी माइंडसेट बिल्कुल ऑोजिट होता है। रिच पीपल शुरुआत में सैक्रिफाइस करते हैं ताकि फ्यूचर में फ्रीडम मिल सके। वारेन बफेट आज भी सिंपल लाइफ स्टाइल जीते हैं। जबकि वह दुनिया के सबसे अमीर
लोगों में शामिल हैं। क्योंकि उन्होंने समझ लिया था कि दिखावा वेल्थ नहीं होता। एसेट्स वेल्थ होते हैं, ओनशिप वेल्थ होती [संगीत] है, टाइम वेल्थ होता है और यही ईयर रूल का सबसे बड़ा लेसन है। अगर तुम हर फाइनेंशियल डिसीजन को अगले साल के पर्सपेक्टिव से देखना शुरू कर दो, तो तुम्हारी स्पेंडिंग हैबिट्स बदल जाएंगी। तुम्हारी इन्वेस्टमेंट्स बदल जाएंगी और धीरे-धीरे तुम्हारी पूरी फाइनेंशियल लाइफ बदलने लगेगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आगे तुम जानोगे कि आखिर क्यों ज्यादातर लोग फाइनेंशियली सक्सेसफुल बनने से पहले ही हार मान लेते हैं? और कैसे फियर और ग्रीद साइलेंटली [संगीत]
उनकी वेल्थ डिस्ट्रॉय कर देते हैं। चैप्टर दो। व्हाई मोस्ट पीपल नेवर बिकम रिच? क्या तुमने कभी सोचा है कि दुनिया में इतने लोग पूरी जिंदगी मेहनत करते हैं? फिर भी फाइनेंशियली फ्री क्यों नहीं बन पाते? लोग सुबह से रात तक काम [संगीत] करते हैं, सैलरी कमाते हैं, ईएमआई भरते हैं, बिल्स पे [संगीत] करते हैं। फिर भी महीने के आखिर में स्ट्रेस खत्म नहीं होता। कड़वा सच यह है कि प्रॉब्लम सिर्फ कम इनकम की नहीं है। असली प्रॉब्लम माइंडसेट और बिहेवियर की है। वारेन बफेथ कहते हैं कि वेल्थ बनाने के लिए इंटेलिजेंस से ज्यादा इमोशनल कंट्रोल
जरूरी होता है। लेकिन मेजॉरिटी लोग इमोशंस से ड्रिवन लाइफ जीते हैं। जब मार्केट ऊपर जाता है, लोग ग्रीड में इन्वेस्ट करते हैं। जब मार्केट नीचे आता है, लोग फियर में बेच देते हैं। हर बार जब पैनिकिक बढ़ता है, लोग गलत डिसीजंस लेते हैं [संगीत] और यही साइकिल उन्हें सालों तक फाइनेंशियली स्टक रखती है। मिडिल क्लास लाइफ का सबसे डेंजरस ट्रैप यही है कि इंसान [संगीत] धीरे-धीरे सर्वाइवल मोड का हिस्सा बन जाता है। सैलरी आने का इंतजार, फिर सैलरी खत्म होने का डर। हर [संगीत] महीने यही साइकिल रिपीट होती रहती है। लोग सोचते हैं कि ज्यादा
इनकम उनकी प्रॉब्लम सॉल्व कर देगी। लेकिन रियलिटी यह है कि बिना फाइनेंशियल डिसिप्लिन के इनकम बढ़ने से सिर्फ एक्सपेंसेस बढ़ते हैं। हर बार जब सैलरी बढ़ती है, लाइफ स्टाइल भी अपग्रेड हो जाता है। बिगर [संगीत] फोन, एक्सपेंसिव क्लोथ्स, अननेसेसरी सब्सक्रिप्शन और धीरे-धीरे इंसान खुद को रिच दिखाने में बिजी हो जाता है। लेकिन वारेन बफेट हमेशा कहते हैं कि रिच दिखना और एक्चुअली रिच होना दो अलग [संगीत] चीजें हैं। वेल्थ वो है जो तुम्हारे बैंक अकाउंट और इन्वेस्टमेंट्स में बचती है। दिखावा वह है जो लोगों को इंप्रेस करने के लिए खर्च कर दिया जाता है। यही
वजह है कि कई हाई सैलरी वाले लोग भी फाइनेंशियली वीक होते हैं। अब सवाल यह है कि लोग मिस्टेक्स रिपीट क्यों करते रहते हैं? क्योंकि सोसाइटी ने लोगों को स्पेंडिंग सिखाई [संगीत] है। इन्वेस्टिंग नहीं। बचपन से हमें यही बताया जाता है कि अच्छी जॉब लो, स्टेबल सैलरी कमाओ, सेफ लाइफ जियो। लेकिन कोई यह नहीं सिखाता कि पैसा ग्रो कैसे किया जाता है। कोई यह नहीं बताता कि इनफ्लेशन धीरे-धीरे सेविंग्स की वैल्यू कम करता रहता है। अगर तुम्हारा पैसा सिर्फ बैंक अकाउंट में पड़ा है तो टेक्निकली वह हर साल वैल्यू लूज कर रहा है। वारेन बफेट
इसीलिए ओनरशिप की बात करते हैं। वह बिजनेसेस खरीदते हैं। [संगीत] एसेट्स खरीदते हैं। ऐसी चीजें खरीदते हैं जो टाइम के साथ ग्रो करें। जबकि ऑर्डिनरी लोग लायबिलिटीज खरीदते रहते हैं। नई कार, एक्सपेंसिव गैजेट्स, लग्जरी लाइफ स्टाइल। शुरुआत में यह चीजें खुशी देती हैं। लेकिन बाद में यही चीजें फाइनेंशियल प्रेशर बन जाती हैं। हर बार जब मार्केट क्रैश होता है, मेजॉरिटी लोग डर जाते हैं। न्यूज़ चैनल्स नेगेटिव हेडलाइंस दिखाते हैं। लोग पैनिकिक में [संगीत] इन्वेस्टमेंट्स बेच देते हैं। लेकिन इंटरेस्टिंग बात यह है कि वारेन बफेट ऐसे मोमेंट्स का इंतजार करते हैं। वो कहते [संगीत] हैं कि
जब बाकी लोग डर रहे हो तब ओपोरर्चुनिटीज पैदा होती हैं। यही वेल्थी माइंडसेट है। रिच पीपल फियर में भी लॉजिक ढूंढते हैं। जबकि ऑर्डिनरी लोग फियर में डिसीजंस लेते हैं। यही फर्क लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएट करता है। अगर तुम इमोशनली स्टेबल नहीं हो तो [संगीत] फाइनेंशियल मार्केट्स तुम्हें हमेशा मैनिपुलेट करेंगे। इसलिए बफेट पेशेंस और डिसिप्लिन को सबसे बड़ा वेपन मानते हैं। क्योंकि वेल्थ सिर्फ नॉलेज से नहीं बनती। बिहेवियर से बनती है। सच यह है कि मेजॉरिटी लोग रिच बनने से पहले ही हार मान लेते हैं। शुरुआत में रिजल्ट्स स्लो होते हैं। इन्वेस्टमेंट्स छोटी लगती हैं।
प्रोग्रेस दिखाई नहीं देती और फिर इंसान कंपेयर करना शुरू कर देता है। सोशल मीडिया पर दूसरों की लग्जरी लाइफ देखकर उसे लगता है कि वह पीछे रह गया है। लेकिन रियलिटी यह है कि रियल वेल्थ साइलेंस में बिल्ड होती है। धीरे-धीरे लगातार बिना दिखावे के वारेन बफेट ने भी ओवरनाइट सक्सेस अचीव नहीं की थी। उनकी वेल्थ का बड़ा हिस्सा लाइफ के बाद के सालों में आया [संगीत] क्योंकि कंपाउंडिंग को टाइम मिला। यही रीजन है कि वह हमेशा लॉन्ग टर्म थिंकिंग की बात करते हैं। अगर तुम शॉर्ट टर्म इमोशंस को कंट्रोल करना सीख जाओ तो फाइनेंशियल
फ्यूचर पूरी तरह बदल सकता है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आगे तुम जानोगे कि आखिर कंपाउंडिंग [संगीत] इतनी पावरफुल क्यों है? और कैसे छोटी-छोटी इन्वेस्टमेंट्स टाइम के साथ मैसिव वेल्थ में बदल जाती [संगीत] हैं। चैप्टर तीन द पावर ऑफ कंपाउंडिंग। इमेजिन करो कि तुमने आज एक छोटा सा पेड़ लगाया। पहले कुछ महीनों तक उसमें ज्यादा फर्क दिखाई नहीं देगा। उसकी ग्रोथ स्लो [संगीत] होगी। शायद तुम्हें लगे कि इतना इंतजार करने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन अगर वही पेड़ सालों तक लगातार ग्रो करता रहे तो एक दिन वही छोटा पौधा विशाल पेड़ बन
जाता है। कंपाउंडिंग भी बिल्कुल ऐसा ही काम करती है। शुरुआत में रिजल्ट्स छोटे दिखते हैं। लेकिन टाइम के साथ ग्रोथ इतनी पावरफुल हो जाती है कि ऑर्डिनरी इंसान भी एक्स्ट्राऑर्डिनरी वेल्थ क्रिएट कर सकता है। वारेन बफेट [संगीत] की पूरी सक्सेस का फाउंडेशन इसी प्रिंसिपल पर बना है। उन्होंने कोई मैजिक ट्रिक यूज नहीं की। उन्होंने सिर्फ टाइम, पेशेंस और कंपाउंडिंग की पावर को समझा। यही रीजन है कि उनकी वेल्थ का बड़ा हिस्सा उनकी लाइफ के बाद के इयर्स में तेजी से ग्रो हुआ। [संगीत] क्योंकि कंपाउंडिंग शुरुआत में स्लो होती है, लेकिन बाद में एक्सप्लोसिव बन जाती
है। कड़वा सच यह है कि ज्यादातर लोग कंपाउंडिंग का सबसे इंपॉर्टेंट फेज [संगीत] सर्वाइव ही नहीं कर पाते। शुरुआत के साल बोरिंग लगते हैं। इन्वेस्टमेंट अकाउंट धीरे ग्रो करता है। कोई ड्रामेटिक चेंज दिखाई नहीं देता और इंसान फ्रस्ट्रेशन महसूस करने लगता है। हर बार जब रिजल्ट्स स्लो दिखते हैं, लोग स्ट्रेटजी बदल देते हैं। हर बार जब कोई नया ट्रेंड आता है, लोग अपनी डायरेक्शन बदल देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। वरन बफेट कहते हैं कि मार्केट में सबसे ज्यादा पैसा उन लोगों ने कमाया है जिन्होंने पेशेंस रखा क्योंकि कंपाउंडिंग [संगीत] कंसिस्टेंसी को रिवॉर्ड करती
है एक्साइटमेंट को नहीं। इमेजिन करो दो लोग हैं। पहला इंसान हर महीने छोटी अमाउंट इन्वेस्ट करता है और 15 साल तक कंटिन्यू रखता है। दूसरा इंसान हर साल नई स्ट्रेटजी ढूंढता रहता है। जल्दी प्रॉफिट चस करता रहता है। [संगीत] शुरुआत में दूसरा इंसान स्मार्टर दिखाई देगा। लेकिन लॉन्ग टर्म में पहला इंसान फाइनेंशियली ज्यादा पावरफुल बन जाएगा क्योंकि वेल्थ अक्सर स्पीड से नहीं कंसिस्टेंसी से बनती है। अब सवाल यह [संगीत] है कि कंपाउंडिंग आखिर इतनी पावरफुल क्यों है? क्योंकि इसमें सिर्फ तुम्हारा पैसा काम नहीं करता [संगीत] बल्कि तुम्हारे रिटर्न्स भी तुम्हारे लिए काम करने लगते हैं।
यही [संगीत] पॉइंट गेम को बदल देता है। शुरुआत में ग्रोथ लेनिया लगती है। लेकिन धीरे-धीरे वही ग्रोथ एक्सपोनेंशियल बन जाती है। यही रीजन है कि बफेट हमेशा कहते हैं कि सबसे वैलएबल चीज मनी नहीं टाइम है। अगर तुम जल्दी शुरू करते हो [संगीत] तो छोटी इन्वेस्टमेंट्स भी फ्यूचर में मैसिव डिफरेंस क्रिएट कर सकती हैं। लेकिन अगर तुम हमेशा परफेक्ट टाइमिंग का इंतजार करते रहोगे तो सबसे बड़ा एडवांटेज लूज कर दोगे। मेजॉरिटी लोग इन्वेस्टिंग शुरू करने से पहले बड़ी इनकम का इंतजार करते हैं। उन्हें लगता है कि जब ज्यादा पैसा होगा तब इन्वेस्ट करेंगे। लेकिन रियलिटी
यह है कि इन्वेस्टिंग हैबिट इनकम से ज्यादा इंपॉर्टेंट [संगीत] होती है। वेल्थ डिसिप्लिन से बिल्ड होती है। अमाउंट से नहीं। मिडिल क्लास माइंडसेट की एक और प्रॉब्लम यह है कि लोग इंस्टेंट प्लेजर के लिए फ्यूचर सैक्रिफाइस कर देते हैं। सैलरी आते ही शॉपिंग, ईटिंग आउट अननेसेसरी अपग्रेड्स शुरू हो जाते हैं। हर बार जब एक्स्ट्रा पैसा आता है, लाइफस्टाइल बिगर हो जाता है। [संगीत] लेकिन रिच माइंडसेट ऑोजिट डायरेक्शन में काम करता है। वेल्थी लोग पहले एसेट्स बिल्ड करते हैं। बाद में लाइफस्टाइल अपग्रेड करते हैं। वारेन बफेट आज भी सिंपल लाइफ जीते हैं। क्योंकि उन्होंने समझ लिया
कि दिखावा शॉर्ट टर्म हैप्पीनेस देता है। लेकिन ओनशिप लॉन्ग टर्म फ्रीडम देती है। यही रीजन है कि वह हमेशा बिजनेसेस और प्रोडक्टिव एसेट्स खरीदने की बात करते हैं। क्योंकि कंपाउंडिंग सिर्फ इन्वेस्टमेंट्स में नहीं हैबिट्स में भी काम करती है। अगर तुम रोज छोटी फाइनेंशियल मिस्टेक्स रिपीट करते हो तो टाइम के साथ वह तुम्हें फाइनेंशियली वीक बना देंगी। लेकिन अगर तुम रोज छोटे स्मार्ट डिसीजंस लेते हो तो वही डिसीजंस फ्यूचर में मैसिव वेल्थ क्रिएट कर सकते हैं। सच यह है कि कंपाउंडिंग सिर्फ पैसा बढ़ाने का सिस्टम नहीं है बल्कि माइंडसेट बदलने का प्रोसेस है। जब इंसान
लॉन्ग टर्म सोचने लगता है, तब उसके डिसीजंस बदलने लगते हैं। वह दिखावे से ज्यादा ओनरशिप पर फोकस करने लगता है। वह क्विक प्रॉफिट से ज्यादा स्टेबिलिटी और ग्रोथ कोेंस देने लगता है। और यहीं से रियल फाइनेंसियल ट्रांसफॉर्मेशन शुरू [संगीत] होती है। वारेन बफेट का पूरा फिलॉसफी इसी आइडियल पर बेस्ड है। स्लो ग्रोथ बोरिंग लग सकती [संगीत] है। लेकिन वही बोरिंग कंसिस्टेंसी एक दिन फाइनेंशियल फ्रीडम बन जाती है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं होती। आगे तुम जानोगे [संगीत] कि आखिर वारेन बफेट का मनी माइंडसेट ऑर्डिनरी लोगों से इतना अलग क्यों है और कैसे उनकी सोच उन्हें
दुनिया के सबसे सक्सेसफुल इन्वेस्टर्स में बदल देती [संगीत] है। चैप्टर चार वारेन बफेट का मनी माइंडसेट क्या तुमने कभी नोटिस किया है कि कुछ लोग एवरेज इनकम होने के बावजूद फाइनेंशियली स्टेबल होते हैं जबकि कुछ लोग हाई सैलरी कमाने के बाद भी हमेशा पैसों की टेंशन में रहते हैं। यही फर्क माइंडसेट का होता है। वारेन बफेट हमेशा कहते हैं कि पैसा पहले दिमाग में बनता है। उसके बाद बैंक अकाउंट में दिखाई देता है। यही रीजन है कि उनका मनी माइंडसेट ऑर्डिनरी लोगों से पूरी तरह अलग है। जहां मेजॉरिटी लोग पैसा खर्च करने के तरीके ढूंढते
हैं। वहीं बफेट पैसा ग्रो करने के तरीके [संगीत] ढूंढते हैं। जहां लोग लग्जरी देखकर एक्साइटेड हो जाते हैं। वहीं बफेट ओनरशिप और वैल्यू देखते हैं। यही सोच उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है। कड़वा सच यह है कि ज्यादातर लोग रिच दिखना चाहते हैं। [संगीत] रिच बनना नहीं। उन्हें एक्सपेंसिव लाइफस्टाइल चाहिए। लेकिन फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए रिक्वायर्ड डिसिप्लिन नहीं चाहिए। मिडिल क्लास माइंडसेट हमेशा शॉर्ट टर्म कंफर्ट ढूंढता है। सैलरी आई तो इंस्टेंट खुशी चाहिए। नया फोन ब्रांडेड क्लोथ्स, एक्सपेंसिव वेकेशंस। हर बार जब इनकम बढ़ती है, लाइफ [संगीत] स्टाइल भी अपग्रेड हो जाता है। लेकिन वारेन
बफेट का अप्रोच बिल्कुल ऑोजिट है। वो आज भी सिंपल हाउस में रहते हैं। [संगीत] सिंपल फूड खाते हैं और अननेसेसरी स्पेंडिंग अवॉइड करते हैं। क्योंकि उन्होंने समझ लिया कि वेल्थ का मतलब दिखावा नहीं होता। वेल्थ का मतलब फ्रीडम होता है। फ्रीडम [संगीत] जहां तुम्हें सिर्फ बिल्स पे करने के लिए काम ना करना पड़े। यही वह माइंडसेट शिफ्ट है जो ऑर्डिनरी इंसान को फाइनेंशियली [संगीत] स्ट्रांग बना सकता है। बफेद हमेशा कहते हैं कि अगर तुम ऐसी चीजें खरीदते रहोगे [संगीत] जिनकी तुम्हें जरूरत नहीं है तो एक दिन तुम्हें ऐसी चीजें बेचनी पड़ेंगी जिनकी तुम्हें जरूरत है।
और यही लाइन मॉडर्न लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा ट्रुथ बन चुकी है। अब सवाल यह है कि बफेट डिसीजंस कैसे लेते हैं? मेजॉरिटी लोग इमोशंस से डिसीजंस लेते हैं। फियर, ग्रीड, एक्साइटमेंट, कंपैरिजन। लेकिन बफेट लॉजिक और पेशेंस से डिसीजंस लेते हैं। [संगीत] जब मार्केट क्रैश होता है, लोग पैनिकिक करते हैं। लेकिन बफेट ओपोरर्चुनिटीज ढूंढते हैं। जब बाकी लोग ट्रेंड फॉलो कर रहे होते हैं, तब बफेट साइलेंस में एनालिसिस कर रहे होते हैं। क्योंकि उनका फोकस शॉर्ट टर्म नॉइज़ पर नहीं लॉन्ग टर्म वैल्यू पर होता है। यही वेल्थी माइंडसेट है। रिच पीपल हर चीज को फ्यूचर वैल्यू
के पर्सपेक्टिव से देखते हैं। [संगीत] अगर कोई चीज फ्यूचर में पैसा जनरेट नहीं करेगी तो वह उसे केयरफुली इवैल्यूएट करते हैं। जबकि ऑर्डिनरी माइंडसेट इंस्टेंट सेटिस्फैक्शन को प्रायोरिटी देता है। यही रीजन है कि कई लोग [संगीत] पूरी जिंदगी इनकम कमाने में स्पेंड कर देते हैं। लेकिन एसेट्स बिल्ड नहीं कर पाते। वारेन बफेट का एक और पावरफुल प्रिंसिपल है सर्कल ऑफ कॉम्पिटेंस। इसका मतलब यह है कि वह सिर्फ उन्हीं चीजों में इन्वेस्ट करते हैं जिन्हें [संगीत] वह डीपली समझते हैं। आज मेजॉरिटी लोग दूसरों को देखकर इन्वेस्ट [संगीत] करते हैं। किसी ने क्रिप्टो से पैसा कमाया तो
सब क्रिप्टो में चले गए। किसी ने ट्रेडिंग से प्रॉफिट बनाया तो सब ट्रेडिंग एक्सपर्ट बन गए। लेकिन बफेट ब्लाइंडली ट्रेंड्स फॉलो नहीं करते। वह पेशेंस से स्टडी करते हैं। फिर डिसीजंस लेते हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि मनी लॉस्ट होने का सबसे बड़ा रीजन इग्नोरेंस होता है। यही रीजन है कि वह नॉलेज को सबसे वैल्यूएबल इन्वेस्टमेंट मानते हैं। उन्होंने अपनी लाइफ का बड़ा हिस्सा रीडिंग और लर्निंग में स्पेंड किया। क्योंकि जितना ज्यादा इंसान फाइनेंशियल सिस्टम्स को समझता है, उतना ही बेटर डिसीजंस ले पाता है। सच यह है कि वारेन बफेट का माइंडसेट सिर्फ इन्वेस्टिंग के
बारे में नहीं है [संगीत] बल्कि लाइफ फिलॉसोफी के बारे में है। वो डिसिप्लिन को टैलेंट से ज्यादा इंपॉर्टेंट मानते हैं। वो कंसिस्टेंसी को मोटिवेशन से ज्यादा पावरफुल मानते हैं। और सबसे इंपॉर्टेंट [संगीत] वो टाइम को मनी से ज्यादा वैलुएबल मानते हैं। क्योंकि पैसा वापस कमाया जा सकता है। लेकिन वेस्टेड टाइम वापस नहीं आता। यही रीजन है कि वह हमेशा लॉन्ग टर्म थिंकिंग की बात करते हैं। अगर तुम अपने फाइनेंशियल डिसीजंस को अगले 10 या 20 साल के पर्सपेक्टिव से देखना शुरू कर दो तो तुम्हारी प्रायोरिटीज [संगीत] बदल जाएंगी। तुम दिखावे से ज्यादा ओनरशिप पर फोकस
करोगे। तुम एक्सपेंसेस से ज्यादा एसेट्स पर ध्यान दोगे और धीरे-धीरे तुम्हारा पूरा फाइनेंशियल फ्यूचर बदलने लगेगा। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं होती। आगे तुम जानोगे कि आखिर वह कौन सा डिसिप्लिन सिस्टम है जिसने वारेन बफेट को डेकेड्स तक फाइनेंशियली अनस्टपेबल बनाए रखा। चैप्टर पांच [संगीत] 10 ईयर डिसिप्लिन सिस्टम। सोचो अगर कोई इंसान अगले 10 साल तक बिना रुके बिना डिस्ट्रैक्शंस के सिर्फ स्मार्ट फाइनेंशियल हैबिट्स फॉलो करता रहे। शायद शुरुआत में उसकी लाइफ ऑर्डिनरी दिखे। शायद लोग उसे बोरिंग कहें। लेकिन वही इंसान धीरे-धीरे फाइनेंशियली पावरफुल बनने लगता है। वारेन बफेट का सबसे बड़ा सीक्रेट कोई हिडन
इन्वेस्टमेंट फार्मूला नहीं था। उनका सबसे बड़ा वेपन डिसिप्लिन था। वही डिसिप्लिन जिसने उन्हें देखेड्स तक सही डिसीजंस लेने में मदद की। क्योंकि वेल्थ अचानक नहीं बनती [संगीत] वो डेली हैबिट से बनती है। हर बार जब तुम इंपल्सिव स्पेंडिंग अवॉइड [संगीत] करते हो। हर बार जब तुम अननेसेसरी लाइफस्टाइल अपग्रेड रोकते हो। हर बार जब तुम शॉर्ट टर्म एक्साइटमेंट की जगह लॉन्ग टर्म ग्रोथ चूज करते हो तब तुम्हारा फाइनेंशियल फ्यूचर [संगीत] मजबूत होता है। कड़वा सच यह है कि मेजॉरिटी लोग मोटिवेशन पर डिपेंड करते हैं। जब मोटिवेशन हाई होता है तब सेविंग शुरू। जब एक्साइटमेंट आती है
तब इन्वेस्टमेंट शुरू। [संगीत] लेकिन कुछ ही दिनों बाद सब खत्म। यही वजह है कि लोग कंसिस्टेंसी मेंटेन नहीं कर पाते। वरन बफेट का अप्रोच बिल्कुल अलग था। वो इमोशंस पर नहीं सिस्टम्स पर डिपेंड करते थे क्योंकि इमोशंस टेंपरेरी होते हैं। लेकिन सिस्टम्स लॉन्ग टर्म रिजल्ट्स क्रिएट करते हैं। इमेजिन करो दो लोग हैं। पहला इंसान साल में दो बार अग्रेसिवली इन्वेस्ट करता है। लेकिन [संगीत] बीच में डिसिप्लिन लूज कर देता है। दूसरा इंसान हर महीने छोटी अमाउंट कंसिस्टेंटली इन्वेस्ट करता है। शुरुआत में दोनों के रिजल्ट्स सिमिलर लग सकते हैं। लेकिन 10 साल बाद दूसरा इंसान फाइनेंशियली
बहुत आगे निकल जाएगा क्योंकि कंपाउंडिंग सिर्फ पैसे पर नहीं हैबिट्स पर भी काम करती है। अब सवाल यह है कि बफेट डिसिप्लिन [संगीत] कैसे मेंटेन करते थे? पहला प्रिंसिपल था अननेसेसरी नॉइज़ इग्नोर करना। आज दुनिया डिस्ट्रैक्शंस से भरी हुई है। सोशल मीडिया, ट्रेंड्स, न्यूज़, लग्जरी, लाइफस्टाइल, प्रेशर। हर जगह कंपैरिजन चल रहा है। लोग दूसरों की सक्सेस देखकर अपनी स्ट्रेटजी बदल देते हैं। लेकिन बफेट हमेशा अपने प्रोसेस पर फोकस्ड रहे। उन्होंने शॉर्ट टर्म मार्केट मूवमेंट्स को कभी इमोशनली कंट्रोल नहीं करने दिया। क्योंकि उन्हें पता था कि टेंपरेरी पैनिकिक लॉन्ग टर्म वेल्थ डिस्ट्रॉय कर सकता है। यही
रीजन है कि वह हमेशा पेशेंस को पावर मानते हैं। अगर इंसान हर मार्केट क्रैश में डर जाए तो वह कभी वेल्थ बिल्ड नहीं कर सकता। फाइनशियल फ्रीडम उन लोगों को मिलती है जो डिफिकल्ट फसेस में भी डिसिप्लिन मेंटेन करते हैं। [संगीत] दूसरा प्रिंसिपल था डिलेड ग्रेटिफिकेशन। यानी आज छोटी खुशी सैक्रिफाइस करके फ्यूचर में बड़ी फ्रीडम क्रिएट करना। मिडिल क्लास माइंडसेट अक्सर यही मिस्टेक करता है। सैलरी आई तुरंत खर्च शुरू। बोनस आया लग्जरी परचेस शुरू। लेकिन वेल्थी माइंडसेट फ्यूचर फोकस्ड होता है। [संगीत] रिच पीपल पहले एसेट्स बनाते हैं। बाद में लाइफस्टाइल अपग्रेड करते हैं। वारेन बफेट
ने हमेशा सिंपल लाइफस्टाइल रखा [संगीत] क्योंकि उनका फोकस अपीयरेंस पर नहीं ओनरशिप पर था। यही वो डिफरेंस है जो ऑर्डिनरी अर्नर्स और वेल्थी बिल्डर्स के बीच दिखाई देता है। अगर तुम हर एक्स्ट्रा इनकम को लायबिलिटीज में डालते रहोगे तो तुम हमेशा फाइनेंशियल प्रेशर में रहोगे। लेकिन अगर वही पैसा एसेट्स में जाता है तो धीरे-धीरे तुम्हारे लिए पैसिव इनकम क्रिएट होने लगती है और यहीं से रियल वेल्थ बिल्डिंग शुरू होती है। तीसरा प्रिंसिपल था कंसिस्टेंसी ओवर इंटेंसिटी। मेजॉरिटी लोग जल्दी रिजल्ट्स चाहते हैं। उन्हें ड्रामेटिक ट्रांसफॉर्मेशन चाहिए। लेकिन वारेन बफेट जानते थे कि फाइनेंशियल ग्रोथ मैराथॉन की
तरह होती है। स्प्रिंट की तरह नहीं। स्मॉल डिसिप्लिंड एकशंस रिपीटेड ओवर इयर्स एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिजल्ट्स क्रिएट करते हैं। यही रीजन है कि वह डेली रूटीनंस, रीडिंग हैबिट्स और काम डिसीजन मेकिंग को [संगीत] इतनाेंस देते थे। क्योंकि वेल्थ सिर्फ अर्निंग का गेम नहीं है। बिहेवियर का गेम है। अगर बिहेवियर अनस्टेबल है तो इनकम कितनी भी बड़ी हो पैसा टिकेगा नहीं। लेकिन डिसिप्लिंड बिहेवियर एवरेज इनकम को भी पावरफुल वेल्थ में बदल सकता है। सच यह है कि यह डिसिप्लिन सिस्टम बोरिंग लग सकता है। लेकिन यही बोरिंग कंसिस्टेंसी फ्यूचर में फ्रीडम बनती है। हर बार जब तुम सही फाइनेंशियल
डिसीजन रिपीट करते हो, तुम अपने फ्यूचर को स्ट्रांग बना रहे होते हो। शुरुआत में चेंजेस छोटे दिखाई देंगे। लेकिन टाइम के साथ वही स्मॉल हैबिट्स मैसिव रिजल्ट्स क्रिएट करेंगी। [संगीत] यही वारेन बफेट फिलॉसोफी का सबसे पावरफुल लेसन है। फाइनेंशियल सक्सेस किसी लकी मोमेंट का रिजल्ट नहीं होती [संगीत] बल्कि डिसिप्लिंड इयर्स का रिजल्ट होती है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं होती। आगे तुम जानोगे कि आखिर लॉन्ग टर्म वेल्थ बिल्ड करने का प्रैक्टिकल रोड मैप क्या है? और कैसे ऑर्डिनरी लोग भी धीरे-धीरे फाइनेंशियल फ्रीडम अचीव कर सकते हैं। चैप्टर [संगीत] छह हाउ टू बिल्ड लॉन्ग टर्म वेल्थ?
इमेजिन करो कि एक दिन तुम्हारी मंथली एक्सपेंसेस तुम्हारी नौकरी से नहीं बल्कि तुम्हारे इन्वेस्टमेंट्स और एसेट्स से पूरे होने लगे। इमेजिन करो कि तुम्हें हर सुबह सिर्फ बिल्स पे करने के लिए उठना ना पड़े। यही फाइनेंशियल फ्रीडम है और वारेन बफेट के अकॉर्डिंग यह फ्रीडम किसी लकी ब्रेक से नहीं आती बल्कि लॉन्ग टर्म वेल्थ सिस्टम से बनती है। कड़वा सच यह है कि मेजॉरिटी लोग पूरी जिंदगी एक्टिव इनकम के पीछे भागते रहते हैं। वह अपनी पूरी एनर्जी सिर्फ सैलरी बढ़ाने में लगा देते हैं। लेकिन सैलरी अकेले वेल्थ नहीं बनाती। क्योंकि इनकम तभी पावरफुल बनती है
जब उसे सही डायरेक्शन मिले। [संगीत] अगर पैसा सिर्फ खर्च हो रहा है तो चाहे इनकम कितनी भी बड़ी हो फाइनेंशियल स्ट्रेस खत्म नहीं होगा। लेकिन अगर वही इनकम एसेट्स बिल्ड कर रही है तो धीरे-धीरे वेल्थ क्रिएट होने लगती है। यहीं से वारेन बफेट का सबसे इंपॉर्टेंट प्रिंसिपल शुरू होता है। [संगीत] ओनशिप। बफेट हमेशा कहते हैं कि अगर तुम सोते समय भी पैसा कमाना नहीं सीखते तो तुम्हें पूरी जिंदगी काम करना पड़ेगा। यही रीजन है कि वह बिजनेसेस, प्रोडक्टिव [संगीत] एसेट्स और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट्स को इतनाेंस देते हैं क्योंकि एसेट्स [संगीत] फ्यूचर इनकम जनरेट करते हैं
जबकि लायबिलिटीज सिर्फ पैसा कंज्यूम करती हैं। लेकिन मेजॉरिटी लोग इसका उल्टा करते हैं। सैलरी बढ़ते ही बिगर हाउस एक्सपेंसिव कार, लग्जरी लाइफस्ट शुरुआत में यह सक्सेस जैसा फील होता है। लेकिन धीरे-धीरे यही चीजें फाइनेंशियल प्रेशर बन जाती हैं। [संगीत] ईएमआई बढ़ती जाती है। स्ट्रेस बढ़ता जाता है और इंसान फ्रीडम से और दूर होता जाता है। वारेन बफेट इसी ट्रैप से बचने की सलाह देते हैं। वह कहते हैं कि रिच बनने का मतलब एक्सपेंसिव लाइफ नहीं बल्कि स्ट्रांग फाइनेंशियल पोजीशन है। अब सवाल यह है कि ऑर्डिनरी इंसान लॉन्ग टर्म वेल्थ बिल्ड कैसे करें? पहला स्टेप है
इन्वेस्टिंग को हैबिट बनाना। लोग अक्सर सोचते हैं कि इन्वेस्टमेंट सिर्फ रिच लोगों के लिए है। लेकिन रियलिटी यह है कि इन्वेस्टिंग ही ऑर्डिनरी लोगों को फाइनेंशियली स्ट्रांग बनाती है। चाहे छोटी अमाउंट हो, कंसिस्टेंसी सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है। हर महीने थोड़ा पैसा एसेट्स में डालना फ्यूचर फ्रीडम खरीदने जैसा है। दूसरा स्टेप है स्किल्स डेवलप करना। वारेन बफेट हमेशा नॉलेज को बेस्ट इन्वेस्टमेंट मानते हैं क्योंकि स्किल्स फ्यूचर इनकम इनक्रीस करती हैं। अगर इंसान सीखना बंद कर देता है तो उसकी अर्निंग पोटेंशियल भी धीरे-धीरे रुक जाती है। इसलिए लॉन्ग टर्म वेल्थ सिर्फ पैसे से नहीं ग्रोथ माइंडसेट से
बनती है। तीसरा और सबसे पावरफुल स्टेप है पेशेंस। यही वह चीज है जो मेजॉरिटी लोग लूज कर देते हैं। शुरुआत में प्रोग्रेस स्लो होती है। इन्वेस्टमेंट्स [संगीत] छोटी लगती हैं। पैसिव इनकम ऑलमोस्ट इनविज़िबल होती है और यहीं लोग गिव अप कर [संगीत] देते हैं। लेकिन रियलिटी यह है कि वेल्थ बिल्ड होने में समय लगता है। जैसे पेड को ग्रो होने में साल लगते हैं। वैसे ही फाइनेंशियल सिस्टम्स को मचूर होने में भी समय लगता है। वारेन बफेट की वेल्थ भी ओवरनाइट [संगीत] नहीं बनी थी। उनकी लाइफ के बाद के डेकेड्स में कंपाउंडिंग ने एक्सप्लोसिव ग्रोथ
क्रिएट की। यही रीजन है कि वह हमेशा लॉन्ग टर्म थिंकिंग की बात करते हैं। [संगीत] अगर इंसान 10 या 20 साल के पर्सपेक्टिव से डिसीजंस लेना शुरू कर दे तो उसका पूरा फाइनेंशियल फ्यूचर बदल सकता है। मिडिल क्लास माइंडसेट अक्सर सर्वाइवल पर फोकस्ड रहता है। लेकिन वेल्थी माइंडसेट सिस्टम्स [संगीत] पर फोकस्ड रहता है। अच पीपल सिर्फ इनकम नहीं बनाते। इनकम जनरेटिंग सिस्टम्स बनाते हैं। यही डिफरेंस ऑर्डिनरी अर्नर्स और फाइनेंशियली फ्री लोगों के बीच सबसे बड़ा गैप क्रिएट करता है। अगर तुम्हारे पास सिर्फ एक्टिव इनकम है तो तुम्हारी फाइनेंशियल लाइफ हमेशा अनसर्टेनिटी में रहेगी। लेकिन अगर
तुम्हारे पास एसेट्स, इन्वेस्टमेंट्स [संगीत] और पैसिव इनकम सिस्टम्स हैं, तो धीरे-धीरे स्टेबिलिटी आने लगती है और यहीं से रियल फ्रीडम शुरू होती है। सच यह है कि वारेन बफेट का यह रूल सिर्फ इन्वेस्टिंग स्ट्रेटजी नहीं है [संगीत] बल्कि लाइफ फिलॉसोफी है। यह पेशेंस सिखाता है। डिसिप्लिन सिखाता है। लॉन्ग टर्म थिंकिंग सिखाता है। और सबसे इंपॉर्टेंट यह इंसान को दिखावे से हटाकर ओनरशिप की तरफ ले जाता है। शुरुआत में यह प्रोसेस स्लो लगेगा। [संगीत] शायद बोरिंग भी लगे लेकिन टाइम के साथ यही कंसिस्टेंसी एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिजल्ट्स क्रिएट करेगी क्योंकि अल्टीमेटली वेल्थ स्पीड से नहीं [संगीत] डायरेक्शन से
बनती है और जो इंसान सही डायरेक्शन में लंबे समय तक चलता रहता है उसे फाइनेंशियल फ्रीडम से कोई नहीं रोक सकता। कंक्लूजन सोचो अगर आज से साल बाद तुम पीछे मुड़कर अपनी जिंदगी [संगीत] को देखो और रियलाइज करो कि तुम्हारे सारे फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स सिर्फ इसलिए खत्म हुए क्योंकि तुमने एक सही डिसीजन लिया था। एक ऐसा डिसीजन जिसमें तुमने जल्दी अमीर बनने की कोशिश छोड़कर लॉन्ग टर्म वेल्थ बिल्ड करने का रास्ता चुना। यही वारेन बफेट का सबसे बड़ा लेसन है। वेल्थ किसी लकी मोमेंट का रिजल्ट नहीं होती। वेल्थ, डेली [संगीत] डिसिप्लिन, पेशेंस और सही माइंडसेट का
रिजल्ट होती है। कड़वा सच यह है कि दुनिया ज्यादातर लोगों को इंस्टेंट प्लेजर [संगीत] की तरफ धकेलती है। हर जगह दिखावा है, कंपैरिजन है, जल्दी सक्सेस का प्रेशर है। लेकिन रियल फाइनेंशियल फ्रीडम हमेशा साइलेंस में बिल्ड होती है। धीरे-धीरे लगातार सालों तक शुरुआत में प्रोग्रेस छोटी दिखेगी। शायद कोई नोटिस भी ना करें। लेकिन टाइम के साथ वही स्मॉल डिसीजंस तुम्हारी पूरी फाइनेंशियल [संगीत] लाइफ बदल देंगे। अब सवाल यह है कि तुम किस डायरेक्शन में जाना चाहते हो? वही डायरेक्शन जहां हर महीने सैलरी का इंतजार करना पड़े या वह डायरेक्शन जहां तुम्हारे एसेट्स तुम्हारे लिए [संगीत]
काम करें। क्योंकि अल्टीमेटली पैसा सिर्फ कंफर्ट नहीं देता। पैसा चॉइससेस देता है, फ्रीडम देता है, सिक्योरिटी देता है। और यही रीजन है कि वारेन बफेट हमेशा लॉन्ग टर्म थिंकिंग की बात करते हैं। अगर तुम पेशेंस सीख जाओ, [संगीत] इमोशंस कंट्रोल करना सीख जाओ और कंसिस्टेंट इन्वेस्टिंग हैबिट बिल्ड कर लो तो ऑर्डिनरी इनकम होने के बावजूद भी एक्स्ट्राऑर्डिनरी वेल्थ क्रिएट की जा सकती है। लेकिन इसके लिए तुम्हें शॉर्ट टर्म डिस्ट्रैक्शंस इग्नोर करने होंगे। तुम्हें दिखावे से ज्यादा ओनरशिप कोेंस देनी होगी। तुम्हें आज की छोटी खुशी सैक्रिफाइस करके फ्यूचर की बड़ी फ्रीडम चूज करनी होगी। सच यह
है कि फाइनेंशियल फ्रीडम किसी एक बिग ओपोरर्चुनिटी से नहीं आती बल्कि हजारों छोटे स्मार्ट डिसीजंस से बनती है। हर बार जब तुम अननेसेसरी स्पेंडिंग अवॉइड करते हो। हर बार जब तुम एसेट्स बिल्ड करते हो। हर बार जब [संगीत] तुम फ्यूचर को प्रेजेंट कंफर्ट से ज्यादाेंस देते हो तब तुम फाइनशियली स्ट्रांगर बनते हो। शायद जर्नी स्लो लगे लेकिन रिमेंबर करो कंपाउंडिंग हमेशा शुरुआत में इनविज़िबल होती है। इसलिए खुद पर ट्रस्ट रखो। प्रोसेस पर ट्रस्ट रखो और टाइम को अपना सबसे पावरफुल पार्टनर बनाओ। अगर इस वीडियो ने तुम्हारी सोच बदल दी हो [संगीत] तो इसे लाइक जरूर
करो और कमेंट करके बताओ कि अगले 10 [संगीत] साल में तुम अपनी फाइनेंशियल लाइफ को कहां देखना चाहते हो। सब्सक्राइब करो [संगीत] क्योंकि आगे भी हम ऐसी ही पावरफुल फाइनेंशियल बुक्स और वेल्थ माइंडसेट लेसंस को सिंपल लैंग्वेज में समझने वाले